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मंडल की नहरों को 217 करोड़ की दरकार

Deoria

Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
देवरिया। वाल्मीकि नगर बैराज से यदि पानी छोड़ भी दिया जाए तो भीे खेतों की सिंचाई नहीं हो पाएगी। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली से देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज और गोरखपुर के खेतों को पानी देने के लिए 217 करोड़ रुपये की दरकार है।
करीब 30 करोड़ रुपये देवरिया के नहरों को दुरुस्त करने के लिए चाहिए। सिंचाई विभाग ने भी अपने रोस्टर में इस बात को स्वीकार कर लिया है। वर्ष 1961 में मुख्य पश्चिमी गंडक नहर का निर्माण कार्य शुरू हुआ। 1971 में पूरी मुख्य पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली विकसित कर ली गई।
मुख्य पश्चिमी गंडक नहर से 3400 किलोमीटर नहरों का संजाल महराजगंज, कुशीनगर, देवरिया और गोरखपुर बिछा दिया गया। इसमें 1725 कि लोमीटर नहरें कुशीनगर में और 400 कि लोमीटर नहरें देवरिया जिले में हैं। अन्य महराजगंज और गोरखपुर में है। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर की कुल शीर्ष क्षमता 18 हजार क्यूसेक है। इसमें 15800 पानी उत्तर प्रदेश की सीमा में आता है।
उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करने वाले पानी में से 8500 क्यूसेक बिहार का हिस्सा है। बाकी 7300 क्यूसेक से कुशीनगर, महराजगंज, देवरिया और गोरखपुर के नहरों को पानी दिया जाता है। आज यह स्थिति नहीं है। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर में लगभग 3600 क्यूसेक पानी ही उत्तर प्रदेश की सीमा में प्रवेश करता है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि इतने क्यूसेक पानी से मंडल की नहरें कैसे फीड होती होंगी। स्वयं विभाग ही इस बात को स्वीकार करता है कि मुख्य पश्चिमी गंडक नहर प्रणाली की स्थिति जर्जर है।
उसके जीर्णोद्धार की जरूरत है। वर्ष 2008 में सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता ने शासन को पत्र भेजकर इसके लिए 141.91 करोड़ रुपये की मांग की थी। यह रकम आज की तारीख में बढ़कर 217 करोड़ रुपये हो गई है। इसमें 30 करोड़ रुपये देवरिया जिले की नहरों के लिए चाहिए। बाकी रुपये से मुख्य पश्चिमी गंडक का जीर्णोद्धार, नहरों की सिल्ट सफाई, डबलों का निर्माण और गेट की मरम्मत होगी।
बगैर इसके नहरों में समुचित पानी नहीं जा सकता। कार्यालय अधीशासी अभियंता सिंचाई खंड द्वितीय ने वर्ष 2012-13 के लिए जारी रोस्टर में इस बात को स्वीकार करता है। विभाग के रोस्टर में लिखा गया है कि मुख्य पश्चिमी गंडक नहर औसतन 1.75 सिल्ट है। विभाग के प्रस्तावित कार्य योजना के मुताबिक कार्य न होने से नहरों के टेल तक पानी नहीं पहुंच सकता है। अधीशासी अभियंता आरके सक्सेना का कहना है कि बजट आते ही नहरों को ठीक करा दिया जाएगा।
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