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मेरी आंखों से किसी को रोशनी मिल जाए तो अच्छा

Deoria

Updated Thu, 22 Nov 2012 12:00 PM IST
गोरखपुर। इंजीनियर बनने का सपना पाले 16 साल के शिवांक राव ने फंदे से लटक कर जान दे दी। सुसाइड नोट में लिखा है कि पोस्टमार्टम के बाद मेरी आंखें किसी के काम आ जाएं तो उसके लिए सुकून की बात होगी। इस इबारत ने हर आंख नम कर दी तो चौंकाया भी।
मौत के नाम से जहां बड़े बड़े शूरमा दहल जाते हैं, चेतना काम नहीं करती वहां शिवांक के मन में दूसरों के लिए ऐसी चिंता, सचमुच साधारण जिगरा वाला किशोर नहीं था वो। शायद उसके इतने सुंदर मन की थाह उसके आत्मीय लगा पाते तो वह जिंदगी से नहीं हारता। वह बला का सुंदर था। उसकी तस्वीर बताती है कि उसके आंखों में सम्मोहन था। देवरिया के कछार इलाके के गांव नगवा खास से इंजीनियर बनने का ख्वाब साकार करने के लिए उसने गोरखपुर के एक कोचिंग में दाखिला लिया था। दोस्तों का दोस्त था वो तो शिक्षकों का चहेता भी। संजय राव का दुलारा बेटा था। बेटे के सपने में रंग भरने के लिए पिता थाइलैंड में थे। वह गोरखपुर के मोहद्दीपुर में किराए का कमरा लेकर इंजीनियरिंग की तैयारी कर रहा था। घर पर मां और एक भाई के साथ बेहद खुशनसीब कुनबा था शिवांक का। पर मंगलवार को इस कुनबे के सपनों पर बिजली गिर गई। न जाने कौन सी ठेस लगी इस किशोर मन को कि उसने कमरा बंद कर सुसाइड नोट लिखा और फंदे से लटककर दुनिया ही छोड़ दी। कल तक मां बाप को ढेर सारे हसीन सपने दिखाने वाला बेटा उम्र भर का गम दे जाएगा किसी ने कल्पना भी नहीं की थी।
मौत की सूचना पाकर पहुंची मां के करुण क्रंदन में यही टीस बार बार उठ रही थी काश! मौत से पहले बेटे की फोन पर भी आवाज सुन लेती तो शायद मां का दिल उसके मन में घुल रहे अवसाद की आहट पा जाता। पर वह तो पढ़ाई का बहाना बनाकर छठ पर भी घर नहीं गया। दुखियारी मां का आंचल छोटा पड़ गया आशीर्वाद के लिए। शिवांक का सुसाइड नोट उसके दिल का आइना है। जिस किसी से जिस भी रूप में उसे स्नेह मिला है सबको नाम से उसने याद किया है। इसके साथ मेयर सत्या पांडे के प्रति बेहद आदर व्यक्त किया है। पत्र की ये लाइनें बताती हैं कि पढ़ाई के साथ जन सरोकारों से जुड़े लोगों के प्रति वह कितना संवेदनशील था। पिता के अरमानों पर खरा न उतरने की टीस ने शायद उसे जिंदगी छोड़ने को मजबूर कर दिया। उसकी इसी पीड़ा को अगर समय पर डाइग्नोस कर लिया गया होता तो एक नायाब सितारा असमय मौत की नींद न सोता।
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