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ठहरे पानी से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ा

Deoria

Updated Sun, 23 Sep 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। बरसात के पानी से जलमग्न आधा दर्जन गांवों की सुधि लेने की फुर्सत प्रशासन को नहीं मिल पा रही है। इन गांवों में जल जमाव के कारण संक्रामक रोग फैलने की आशंकाएं बढ़ गई हैं। तीन तरफ से पानी से घिरे गांवों में लोगों को शुद्ध पेय जल के लिए भी मशक्कत करनी पड़ रही है।
हड़ही, दुधनाथ बनकट, कृतपुरा, सोनवह आदि गांवों में जमे पानी से बदबू उठ रही है। इन गांवों के लोगों की फसल को चौपट कर चुका पानी अब बीमारी फैलाने लगा है। भीषण बरसात से क्षेत्र के तीन दर्जन गांवों में जल जमाव हो गया है। क्षेत्र के जेई प्रभावित गांवों में जल जमाव से खतरा और बढ़ गया है। शनिवार को सेमरौना गांव में गंदगी के कारण एक बच्चा बीमार हो गया। चिकित्सकों ने मस्तिष्क ज्वर की आशंका जताई। परिवार वाले उसे इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कालेज ले गए हैं। पानी से भरे गांवों में बीमारी की रोकथाम को अब तक कोई उपाय नहीं हो पाया है। सोनबह गांव में जल जमाव से हर साल संक्रामक रोग फैलता है। इतना सब कुछ होने के बाद भी स्वास्थ्य महकमा गांवों में क्लोरीन की एक टैबलेट भी नहीं बाट पाया। ग्रामवासी सत्यवान यादव, भभूति यादव, श्रीकिशुन, बलवंत यादव, प्रदीप यादव, फत्तेबहादुर सिंह आदि ने कहा कि बरसात से उफनाई छोटी नदियां बाढ़ की स्थिति पैदा कर दी हैं। तीन तरफ से घिरे गांवों के लोगों को नाव से निकलना पड़ रहा है। पानी सड़ने से संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ गया है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग कुछ नहीं कर रहा है। सीएचसी के अधीक्षक डा. एसएन शर्मा ने कहा कि जलमग्न गांवों में टीम भेजी जा रही है। गांव की आशा बहनों को क्लोरीन की गोलियां बांटने को दी जा रही हैं। विभाग संक्रामक रोगों की रोकथाम को प्रयास कर रहा है।

खतरे के निशान को पार कर गई छोटी गंडक नदी
d अमर उजाला नेटवर्क
मझौलीराज/भटनी। छोटी गंडक नदी का जल स्तर बढ़ने से तटवर्तीय गांवों में हड़कंप है। सलेमपुर के नदावर पुल के पास लगे केंद्रीय जल आयोग के अनुसार छोटी गंडक नदी खतरे के निशान से डेढ़ मीटर ऊपर बह रही है। भटनी क्षेत्र के कई स्थानों पर भारी कटान की भी सूचना है। पयासी, बनकटा मिश्र समेत कई गांवों के लोग मझौलीराज और सलेमपुर नाव से जा रहे हैं।
लगातार बारिश के कारण छोटी गंडक नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ता जा रहा है। शनिवार को खतरे के निशान 64.500 मीटर को पार करते हुए 66.050 मीटर ऊपर बह रही है। इससे मझौलीराज नगर एवं भटनी क्षेत्र के आधा दर्जन गांवों में कटान हो गई है। नदावर घाट से बनकटा मिश्र, पयासी होकर दनउर को जाने वाला बंधा भी कमजोर हालत में होने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। बंधे कई जगह पर रेनकट के कारण धंस गए हैं। नदावर-बरसीपार बंधा भी रेनकट से प्रभावित है। नदावर घाट मंदिर भी पानी में डूब गया है। मझौलीराज के बाबा भोला शाह मजार के सामने और चनुकी बंधा पर कटान तेजी से हो रही है वहीं भटनी क्षेत्र के तेनुआ, भरहेचौरा, जिगिना मिश्र, पुरनाछापर, नूरीगंज के सामने कटान तेज हो गया है। तेनुआ गांव में प्राथमिक विद्यालय से महज 50 मीटर दूरी पर नदी बह रही है। तेनुआ गांव के सुरेश सिंह, बद्री कुशवाहा, रामयादी, जयप्रकाश कुशवाहा आदि ने कटान रोकने की मांग की है।
घाघरा हुई स्थिर, पानी से घिरे हैं गांव
d अमर उजाला नेटवर्क
बरहज। घाघरा के जलस्तर में ठहराव आने से तटवर्ती गांवों के लोग थोड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। हालांकि बाढ़ के पानी से कई गांव अभी भी घिरे हुए हैं। कूरह परसिया में कटान जारी रहने लोगों की मुसीबतें बरकरार हैं। रामजानकी मार्ग मेहियवां में भी ठोकरों पर दबाव बना हुआ है। नदी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर प्रवाहित हो रही है।
थाना घाट पर बने मापक के अनुसार शनिवार को घाघरा का जलस्तर स्थिर रहा। नदी खतरे के निशान 66.50 मीटर से ऊपर 67.50 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। नदी अभी भी खतरे के निशान से एक मीटर ऊपर बह रही है। बाढ़ का पानी गांवों को अभी घेरे हुए हैं। भदिला अब्बल, कुंदमहाल धनया, विशुनपुर देवार के आधा दर्जन टोले पूरी तहर पानी से घिरे हुए हैं। कूरह परसिया गांव में कटान जारी रहने भयभीत किनारे के बाशिंदे अपने मकानों को तोड़ सामान सुरक्षित ठौर पर ले जाने में जुटे रहे। यहां नदी के बढ़ते-घटते जलस्तर के साथ हो रहा कटान अब गांव को पूरी तरह निगलने को आतुर है। रगरगंज, कूरह परसिया, कटइलवा में फसलें बाढ़ के पानी से डूब गई हैं। मेहियवां में रामजानकी मार्ग के बचाव को बने ठोकरों का अग्रभाग पानी से डूबने से उनके क्षतिग्रस्त होने की आशंका बनी हुई है। एसडीएम त्रिभुवन विश्वकर्मा ने बताया कि नदी का जलस्तर स्थिर है। अगले एक दो दिनों में नदी का पानी घटने की संभावना है। बाढ़ से प्रभावित लोगों को नाव और अन्य सुविधाएं मुहैया कराई गई है।

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