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बाढ़ से 1500 हेक्टेयर फसल डूबी, कई रास्ते बंद

Deoria

Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। क्षेत्र में पिछले आठ दिनों से हुई भीषण बरसात से बाढ़ आ गई है। यहां करीब 1500 हेक्टेयर धान और मक्के की फसल पूरी तरह से डूब गई है। कुर्ना और बथुआ नदी के उफनाने से तटवर्ती आधा दर्जन गांवों में पानी घुस गया है। इससे आधा दर्जन मार्ग अवरुद्ध हो गए हैं। रुद्रपुर से देवरिया, बरहज और निबही को जाने वाली सड़क पर पानी फैल जाने से आवागमन में परेशानी हो रही है।
बड़ी नदियों राप्ती और गोर्रा में उफान जारी है। शुक्रवार की शाम गोर्रा नदी खतरे के निशान 70.50 मीटर तक पहुंच गई थी। राप्ती नदी का जलस्तर 70.00 मीटर पर पहुंच गया है। राप्ती और गोर्रा के जलस्तर में व्यापक बढ़ोत्तरी से बंधों की कटने का खतरा बढ़ गया है। दो दिन से बंद बरसात से लोगों को कोई राहत नहीं मिल रही है। तराई क्षेत्र में हो रही बारिश से छोटी नदियां बेतहाशा बढ़ रही हैं। इस कारण रुद्रपुर निबही मार्ग पर पानी भर गया है। मदनपुर नकईल मार्ग पर पांच फीट पानी लग जाने से रास्ता बंद हो गया है। रुद्रपुर देवरिया और रुद्रपुर बरहज मार्ग पर पानी रोड को क्रास कर बह रहा है। बाढ़ का पानी जंगल डोमरडीला, हड़ही, सोनबह, इस्लामाबाद, पिड़हनी, डाला, दीनापार, सरया, कृतपुरा, गाजन डहरौली, छपरा, भीरवा, पटवनियां गांव में घुस चुका है। इस क्षेत्र की धान और मक्के की फसल पूरी तरह डूब गई है।
रिसाव से खतरा बढ़ा
सेमरौना नकईल बांध के करीब डाला के पास रेग्युलेटर में तेज रिसाव से करीब 500 एकड़ फसल के डूबने का खतरा बना हुआ है। इसी बांध के करीब मदनपुर नकईल मार्ग पर बथूआ नदी पर बने पक्के पुल का दोनों तरफ का एप्रोच धंस गया है। इस कारण पुल से बड़ी गाड़ियां नहीं निकल पा रही हैं। रेग्युलेटर के रिसाव को रोकने के लिए सिंचाई विभाग युद्ध स्तर पर लगा है। रिसाव को बोरी आदि भर कर बंद करने का प्रयास किया जा रहा है।
बंधों पर बढ़ाई गश्त
अधिशासी अभियंता डीएन राम ने बताया कि भीषण बरसात के कारण जलस्तर में तेजी से वृद्धि हुई है। एहतियात के तौर पर बंधों पर गश्त तेज कर दी गई है।
परसिया देवार बंधे में कई जगह रिसाव
दर्जनों टोलों में घुसा पानी, सैकड़ों एकड़ फसल जलमग्न
बरहज। घाघरा और राप्ती नदियां उफान पर हैं। बाढ़ का पानी नदी पार के परसिया देवार के मुख्य बंधे पर दबाव बनाते हुए कई जगहों पर रिसाव करना शुरू कर दिया है। रामजानकी मार्ग मेहियवां में स्थित खतरनाक बनती जा रही है। वहीं कूरह परसिया में कटान के चलते ग्रामीण घरों को तोड़ने लगे हैं। विशुनपुर देवार, भदिला प्रथम, कुंद महाल धनया आदि गांव बाढ़ पानी से घिर गए हैं।
पिछले चौबीस घंटे से घाघरा का जलस्तर स्थिर है। शुक्रवार की की शाम थाना घाट पर बने मापक के अनुसार घाघरा खतरे के निशान 66.50 मीटर से एक मीटर ऊपर 67.50 मीटर पर प्रभावित हो रही थी। नदी पार के परसिया देवार के मुख्य बंधे पर धोबीपुरा, हरिनारायन के मकान के सामने और नदी घाट के तरफ रिसाव हो रहा है। दसरसरिया, चौहान टोला, बरमहवां, नकिहवा, भदिला प्रथम, कुंदमहाल धनया आदि गांवों में पानी घुस गया है। बाढ़ को देखते हुए ग्रामीण भयभीत हैं। विशुनपुर देवार का स्कूलहिया, हरिजन बस्ती, जरलहवा, बरमहवा टोला पानी से घिर गया है। रामजानकी मार्ग मेहियवां में घाघरा का पानी मार्ग से सीधे टकरा रहा है। रात से कूरह परसिया में हो रही भीषण कटान के चलते लोग अपने घरों को तोड़ना शुरू कर दिए हैं। गौरा कटइलवा, कुबाईच टोला गांव के चाराें तरफ बाढ़ का पानी फैला हुआ है। नगर के निचले इलाकों में भी बाढ़ का पानी घुस गया है। इस बाबत पूछे जाने पर तहसीलदार आशाराम वर्मा ने कहा कि प्रशासन बाढ़ को देखते हुए चौकसी बरत रहा है। बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों के आवागमन के लिए उन्नीस नावें लगाई गई है।
बाढ़ से भाटपाररानी में फसल डूबी
भाटपाररानी। छोटी गंडक नदी, खनुआ नदी एवं हाहा नाला में आई बाढ़ से सैकड़ों एकड़ फसल डूब गई है। छोटी गंडक नदी के किनारे बनकटा शंभू, खैराट, संवरेजी, जिरासो, चनुकी, मठदमोदरा, दिस्तौली, करमुआ आदि गांवों की मक्का, बाजरा, बजरी, अरहर आदि फसलें डूबी है। इन गांवों के किसान भृगुरासन, दुर्गा, पारस, मुन्नीलाल, बलम, भोला, राधा, सूर्यदेव, चंद्रदेव, हरेराम, विशेषर आदि ने बताया कि नदी के जल स्तर में इस तेजी से वृद्धि हुई है कि बाढ़ की स्थिति आ गई है। पहले से तैयारी न होने के कारण फसल डूब रही है। अरहर की फसल भी प्रभावित है। खनुआ नदी के धर्मखोर करन के पास रेग्युलेटरों से रिसाव होने से पानी छरौंछा, सरया, गुलहा ताल, पकड़ी बाबू आदि तालों में पहुंचकर ओवर फ्लो कर रही है। तटबंधों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। तहसीलदार सच्चिदानंद दूबे ने बताया कि नायब तहसीलदार व लेखपाल निगरानी कर रहे हैं।
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