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मरने के बाद मिली मजदूरी

Deoria

Updated Mon, 17 Sep 2012 12:00 PM IST
रुद्रपुर। इस्लाम में कहा गया है कि मजदूर का पसीना सूखने से पहले उसकी मजदूरी दे दो। कहीं बाद में ऐसा न हो कि तुम भूल जाओ और उसकी मजदूरी मारी जाए। लेकिन अपने देश में सरकार तक इस बात को नहीं मानती। मलेरिया उन्मूलन के लिए दवा का छिड़काव करने वाले मजदूरों को 17 साल बाद स्वास्थ्य महकमा मजदूरी दे रहा है। वह भी तब जब विधानसभा में विधायक ने 16 वर्ष पूर्व मामला उठाया था। जिसके बाद सदन की आश्वासन समिति ने मजदूरी दिलाने का आश्वासन दिया। मगर अफसोस कि उसको अपनी कार्यवाही पूरी करने में कुल 16 साल लग गए। बता दें कि इस बीच एक मजदूर की मौत हो गई है। उसके घर जब सरकार के कारिंदे मजदूरी देने पहुंचे तो पत्नी फफक पड़ीं।
मामला रुद्रपुर क्षेत्र का है। वर्ष 1994-95 में मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत 36 मजदूरों ने डीडीटी का क्षेत्र में घर-घर छिड़काव किया था। इन दिहाड़ी मजदूरों को तब 35 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी मिलनी थी। छिड़काव के बाद तत्कालीन स्वास्थ्य निरीक्षक रामगोपाल जिले से मजदूरी का पैसा 76,800 रुपया लेकर चले थे। रास्ते में बदमाशों ने रामगोपाल को कट्टा सटाकर पैसा लूट लिया। गरीब मजदूरों की मजदूरी का पैसा लुट जाने के बाद व मजदूरी के लिए स्वास्थ्य विभाग का चक्कर काट रहे थे। इस मामले को तत्कालीन विधायक जयप्रकाश निषाद ने वर्ष 1996 में विधानसभा में उठाया। विधानसभा की आश्वासन समिति ने मजदूरी के भुगतान का आश्वासन दिया। लेकिन इस पर अमल करने में उसे 17 साल लग गए।
इस बीच लक्ष्मीपुर के एक मजदूर राजेंद्र की मौत भी हो गई। 17 साल पहले छिड़काव करने वाले मजदूर अब मजदूरी मिलने की आस छोड़ चुके थे। रविवार को सीएचसी के प्रभारी डा. एसएन शर्मा के नेतृत्व में सीएमओ आफिस की टीम लक्ष्मीपुर गांव में जब मजदूरी बाटने गई तो मृतक राजेंद्र की पत्नी फफक कर रो पड़ीं। पति के कमाई का 2,100 रुपया उसके मरने के बाद मिला। विधानसभा की आश्वासन समिति ने सभी मजदूरों की मजदूरी वितरित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।
वर्तमान दर से मिले मजदूरी: जयप्रकाश
रुद्रपुर। पूर्व विधायक जयप्रकाश निषाद ने कहा कि 17 साल पहले मजदूर 35 रुपया प्रतिदिन के हिसाब से काम किए थे। आज सरकारी मजदूरी 125 रुपया हो गई है। मजदूरी देने में देरी स्वास्थ्य महकमा ने किया है, इसलिए उसे क्षतिपूर्ति देनी चाहिए। उन्होंने मजदूरों को वर्तमान दर से मजदूरी दिलाने के लिए अब शासन में मामला उठाने को कहा है।
कोट
बकाया मजदूरी का भुगतान शासन के निर्देश के अनुसार आए बजट में से हो रहा है। कुल 36 लोगों में 76,800 रुपये मजदूरी बांटी जा रही है। ---सीएमओ डॉ. एएन तिवारी
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