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एक साल मेें 50 सेंटीमीटर तक नीचे चला गया पानी

Chitrakoot

Updated Sat, 06 Oct 2012 12:00 PM IST
वाटर रिचार्ज के नाम पर करोड़ों खर्च पर गिर रहा जलस्तर
संतोष सिंह
चित्रकूट। जिले के किसानों के लिए बुरी खबर है। भूजल के लगातार दोहन से जलस्तर की स्थिति चिंताजनक हो गई है। जलस्तर गिरने की वजह से ही मऊ व रामनगर विकास ख्ंाड को डेड जोन घोषित करना पड़ा। इसके तहत इन जगहों पर किसी भी किसान को ट्यूबवेल लगवाने के लिए परमीशन नहीं होगी। जल निगम के अधिशासी अभियंता जेपी सिंह भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि जिले में भूजल स्तर में लगातार गिरावट आ रही है। वह मानते है कि अगर यही हाल रहा तो जनपदवासियों पीने के पानी के लाले पड़ जाएंगे। जनपद में भू-जल संरक्षण व प्रबंधन के लिए करोड़ों रुपए का बजट खर्च हो चुका है। आश्चर्यजनक यह कि इस साल कई सालों की अपेक्षा ज्यादा बारिश होने के बाद भी जलस्तर में कोई बढ़त नहीं हुई।
जिले में गिरता जलस्तर भू-वैज्ञानिकों और जल निगम के अधिकारियों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। जलस्तर में प्रतिवर्ष औसतन 45 से 60 सेमी प्रतिवर्ष की दर से गिरावट दर्ज की जा रही है। जल निगम से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले के विभिन्न क्षेत्रों में जलस्तर पिछले साल के इसी माह से लगभग 50 सेमी नीचे रिकार्ड किया गया। आंकड़ों में मानिकपुर ब्लाक में पानी की उपलब्धता सबसे नीचे पाई गई है। मानिकपुर ब्लाक में जलस्तर 50-55 मीटर, रामनगर व राजापुर में 10-15 मीटर, मऊ में 30-40 मीटर, पहाड़ी में 8-10 मीटर और कर्वी में 8-25 मीटर के बीच मिलता है।
जल निगम के अधिशासी अभियंता जेपी सिंह ने बताया कि जनपद दोहित क्षेत्रों की श्रेणी में आ गया है। इसका मतलब यह है कि जिले मे पानी का दोहन बंद कर इसे फिर से रिचार्ज करने की आवश्यकता है। उनका कहना है कि बुंदेलखंड क्षेत्र पठारी होने के कारण पानी जमीन में धंसता ही नहीं। इसकी वजह से भूजल स्तर कम होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि मानिकपुर का क्षेत्र तो सीधा पहाड़ होने के नाते वहां तो एक बूंद भी पानी जमीन में नहीं रिस पाता है। उन्हाेंने बताया कि जहां कहीं भी जमीन या मिट्टी पर्याप्त है वहां पर जल स्तर में कम गिरावट देखी गई है। उन्हाेंने बताया कि सबसे दिक्कत तो उन्हें ही होने वाली है। मानिकपुर जैसे 180 फुट जलस्तर के क्षेत्रों में 300 से 325 फुट की गहराई तक पाइप लगाना पड़ता है। उनका कहना है कि इस भयावहता के बावजूद जिले में पानी का दोहन रुकने का नाम नही ले रहा है। उनका कहना है कि जनपद में 15600 हैंड पंप लगे हैं और अभी भी उन्होंने उन क्षेत्रों को चुना है, जहां हैंडपंप की अति आवश्यकता है।

इनसेट-
वाटर हार्वेस्टिंग एक बेहतर तरीका
जलस्तर को रिचार्ज करने के लिए वाटर हार्वेस्टिंग एक बेहतर तरीका है। इसके तहत छत के पानी को एक गड्ढा बनवाने के बाद उसका पानी पाइप के द्वारा जमीन में डाल दिया जाए तो जल स्तर में सुधार आएगा। कुओं को रिचार्ज करना भी एक तरीका है जिससे जल स्तर ऊंचा किया जा सकता है बशर्ते कुएं की सफाई कराने के बाद ही रिचार्ज किया जाय। उन्होंने बताया कि पहली वर्षा के जल को छोड़कर इकट्ठा किया गया छत का पानी नहाने-धोने, सिंचाई, जानवरों को पिलाने आदि के काम लाया जा सकता है। जल निगम के अधिशासी अभियंता ने कहा कि लोगों के अंदर जागरूकता की भी कमी है जिससे लोग अपने मकानों के निर्माण के समय वाटर हार्वेस्टिंग का गड्ढा नहीं बनवाते।

इनसेट...
पेयजल के नाम पर धन की खूब हुई बंदरबांट
बुंदेलखंड पैकेज के तहत करोड़ों रुपए का बजट जिले में जल संरक्षण व भूजल-स्तर को रिचार्ज करने के लिए खर्च हो चुके हैं इसके बावजूद जनपद में जल स्तर निरंतर गिरता जा रहा है। लोगों की माने तो पेयजल के नाम पर बुंदेलख्ंाड पैकेज के धन की खूब बंदर-बांट हुई। वाटर रिचार्ज के नाम पर बनाए गए चेकडैम तो एक भी बारिश नही झेल पाए। लघु सिंचाई विभाग के द्वारा कुओं को कागजों पर ही रिचार्ज कराकर रुपए निकाले गए। जो चेकडैम वाटर रिचार्ज के नाम पर बनाए गए उनसे तो नदियां भी सूखने लगीं। नदियों के सूखने की घटना से परेशान रामनगर के ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को पत्र भी दिया जिसके बाद तत्कालीन डीएम डा. आदर्श सिंह ने चेकडैमों का निर्माण रोकने के भी आदेश दिए थे। जिलाधिकारी ने इस मामले में चेकडैमों के निर्माण प्रारुप व उनके बजट आवंटन को लेकर अपनी रिपोर्ट शासन को भेजते हुए जांच की अनुशंसा की। इसी के आधार पर इलाहाबाद स्थित एमएलएनआर की तकनीकी इकाई को सीएनडीएस कंपनी के द्वारा बनवाए गए चेकडैमों की जांच के आदेश दिया प्रमुख सचिव उत्तर प्रदेश ने दिया था।

आंकडे़..
ब्लाक जलस्तर (मीटर में)
मानिकपुर 50-55
मऊ 30-40
रामनगर 10-15
राजापुर 10-15
पहाड़ी 8-10
कर्वी 8-25
इस साल के आंकड़ों में औसतन 50 सेमी की गिरावट
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