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किसानों के लिए आदर्श बने बनाड़ी के छोटेलाल

Chitrakoot

Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
चित्रकूट। घाटे का सौदा बनी खेती-किसानी से जहां लोग तौबा कर रहे हैं, वहीं बनाड़ी के किसान छोटेलाल ने तरह-तरह के प्रयोग कर एक मिसाल कायम की है। अब फल और सब्जी की खेती कर छोटेलाल हर दिन चार से पांच सौ रुपए आराम से कमा लेते हैं। उनकी किस्मत बदलने में जिला उद्यान विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कर्वी ब्लाक के गांव बनाड़ी के छोटेलाल त्रिपाठी दस बीघे के काश्तकार हैं। वे गेहूं, चना, अरहर जैसी परंपरागत फसलों की ही खेती करते थे। उनकी माली हालत नहीं सुधर रही थी। इसी बीच किसी ने उनको उद्यान विभाग का रास्ता दिखाया। उद्यान विभाग की सलाह पर उन्होंने फल और सब्जी की खेती शुरू की। अब वे परंपरागत फसलों की खेती छोड़ सब्जी, फल और फूल की ही खेती करते हैं। अपने खेतों में तरह-तरह के प्रयोग करते हैं। अब उनकी किस्मत बदल गई है। रोजाना चार से पांच सौ रुपए तक की आमदनी हो रही। अभी उन्होंने एक बीघा मक्का, एक बीघा बैंगन, एक बीघा लौकी, दस बिस्वा खीरा, एक बीघा तरोई और दस बिस्वा खेत में भिंडी बो रखी है। इसके अलावा गेंदा और गुलाब की बागवानी के साथ आंवला, करौंदा और आम के बगीचे भी लगा रखे हैं।

खुद तैयार करते हैं जैविक खाद
पिछले साल उन्हें बुंदेलखंड पैकेज के तहत उद्यान विभाग से तीस हजार रुपए का अनुदान मिला। तीस हजार रुपए खुद के लगाए। 12×15 का चबूतरा बनवाया। बर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए चार और गोबर इकट्ठा करने के लिए चार गड्ढे बनवाए। गनीवां कृषि फार्म से तीन दो किलो केंचुआ लाए। अब उनकी यूनिट में जैविक खाद तैयार होने लगी है। इस यूनिट को देखने लखनऊ और अन्य जगह से भी वैज्ञानिक आए थे।

कभी-कभी लगता है घाटा
किसान छोटेलाल ने बताया कि कभी-कभी सरकारी बीज भी घटिया मिल जाते हैं, जिससे फसल उम्मीद के मुताबिक नहीं होती। कई बार दुकानदार भी ठग लेते हैं। उन्होंने बताया कि इस बार एक दुकान से आषाढ़ी मूंग के बीज लेकर एक बीघा बुवाई की। मूंग में पत्ते तो पर्याप्त आए पर अभी तक फूल नहीं लगे, जिससे वह निराश है। वे बीज विक्रेता की शिकायत डीएम से करेंगे।

ट्रैक्टर की योजना में घाटा मिला
वैसे तो छोटेलाल उद्यान विभाग से खुश है, पर वायदे के बाद भी ट्रैक्टर खरीद में अनुदान न मिलने से निराश हैं। उद्यान विभाग ने पिछले साल जून में ट्रैक्टर पर लगभग डेढ़ लाख रुपए अनुदान की बात कही तो खुद के तीन लाख लगाकर ट्रैक्टर खरीद लिया, बाद में विभाग अनुदान से मुकर गया। उन्हें खेत गिरवी रखकर कर्ज चुकाना पड़ा। इस संबंध में जिला उद्यान अधिकारी डा. बल्देव का कहना है कि जिला उद्यानिक मिशन के तहत पांच लोगों को ट्रैक्टर खरीद में अनुदान मिलना है। छोटेलाल की भी फाइल उच्च स्तर पर लंबित है। स्वीकृत होते ही अनुदान दे दिया जाएगा।
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