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फूलों की खेती से बदलने लगी तकदीर

Chitrakoot

Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
चित्रकूट। दो भाइयों ने परंपरागत खेती से इतर गुलाब की फसल की। शुरुआती दौर में प्रयोग के तौर पर की गई खेती अब दोनों भाइयों के लिए भरण-पोषण का साधन बन चुकी है। पांच बीघे की जमीन पर गुलाब और लाल सफेद, पीले फूल की फसल लहलहा रही है। यहां से जिले में ही नहीं आसपास के जिलों में भी दोनों भाई फूलों की आपूर्ति कर रहे हैं। प्रयोग सफल होने पर दोनों ने अन्य फूलों की खेती शुरू कर दी है।
धार्मिक केंद्र होने से वैसे भी पूरे जिले में फूलों की मांग है। शादी ब्याह जैसे सीजन में फूलों की मांग बढ़ जाती है।
तरौंहा के हरिप्रसाद कुशवाहा के पुत्रों शिवबरन और शिवराम ने अपने पांच बीघे के खेत में परंपरागत फसलों के बजाय गुलाब की खेती करने की सोची। शिवबरन बताते हैं कि 12 साल पहले गुलाब की खेती करने की शुरुआत की थी। दोनों भाइयों ने जिन गुलाब के चंद पौधों से इस खेती की शुरू की, वह आज पांच बीघे तक फैल गई है। वह देशी गुलाब की खेती के साथ साथ नवरंगा, गेंदा, गुलदाउदी के फूल भी तैयार कर रहे हैं और इन फूलों की खेती का यह बेहद खास मौसम है। नवंबर से फरवरी तक गुलाब की कलम लगाने से पौधा आने वाले 6 माह में पूरी तरह तैयार हो जाता है। इस मौसम में न तो ज्यादा पानी की जरूरत होती है और न खाद की जबकि बरसात में जहां ज्यादा पानी से पौधा खराब हो जाता है तोे गर्मी में पानी की कमी से पौधे का विकास बाधित होता है। नवंबर दिसंबर में लगाए पौधे कई सालों तक फूलों से लदे रहते हैं। बस साल में दो बार गोबर की खाद और कीटनाशक दवा डालने के साथ समय समय पर इनकी छंटाई करते रहना चाहिए।
सीजन में मिलते हैं अच्छे दाम
छोटे भाई शिवराम ने बताया कि देशी गुलाब के फूल आम दिनों में तो 50 से 60 रुपए किलो बिकते हैं लेकिन शादी ब्याह के सीजन में इनकी कीमत 200 से 500 रुपए प्रति किलो तक बढ़ जाती है। ये देशी गुलाब चित्रकूट के रामघाट, बांदा, बदौसा, भरतकूप, राजापुर के व्यापारी यहां से आकर ले जाते हैं। सफेद और लाल गुलाब, गेंदा, नवरंगा, व गुलदाउरी के फूल भी उगाते हैं। हालांकि अन्य फूलों की आम दिनों में 20 रुपए व सीजन में 50 से 80 रुपए प्रति किलो तक होती है।
सरकारी योजना का फायदा नहीं लिया
दोनों भाइयों को उद्यान विभाग से मलाल है। इनका कहना है कि उनको फूलों की खेती के लिए आज तक कोई भी सरकारी मदद नहीं मिली। विभागीय लोगों ने उदासीनता ही दिखाई।


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