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ग्राम प्रधान बोले, साहब! हमारी भी तो सुनिए

Chitrakoot

Updated Wed, 28 Nov 2012 12:00 PM IST
पहाड़ी (चित्रकूट)। महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार योजना (मनरेगा) के तहत ग्राम पंचायतों में आई धनराशि को लेकर इस समय हलचल है। जिलाधिकारी ने समीक्षा के बाद कई गांवों की धनराशि दूसरी ग्राम पंचायतों को स्थानांतरित कर दी है। इसके पीछे ग्राम प्रधानों और सचिवों की लापरवाही और शिथिलता की बात कही गई है पर प्रधान और सचिव इस आरोप को सही नहीं मानते। कोई प्रधान इसके पीछे समय से धन आहरित न होना प्रमुख वजह बताता है तो कोई बीडीओ को वित्तीय अधिकार न होना।
जिलाधिकारी ने चालू वित्तीय वर्ष की समीक्षा में पाया कि कुछ ग्राम पंचायतों में प्रधान और सचिव ने विकास के लिए आए धन को उपयोग नहीं किया है। इनमें कर्वी ब्लाक की 18, मानिकपुर की नौ, मऊ की 13 और पहाड़ी की 12 ग्राम पंचायतें हैं। पहाड़ी की जिन ग्राम पंचायतों में ऐसा पाया गया है, उनमें अरछा बरेठी, असोह, भदेहदू, औदहा, बछरन, बकटा खुर्द, चकजाफर, ममसीबुजुर्ग, मिर्जापुर, पहाड़ीबुजुर्ग, सुरवल और सुरसेन हैं। इनमें बची 21.40 लाख रुपए की धनराशि अब ब्लाक की बाकी 12 ग्राम पंचायतों को दे दी जानी है। मुख्य विकास अधिकारी एमपी सिंह ने बताया कि इन सभी ग्राम पंचायतों के प्रधान और सचिवों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। यह तो प्रशासन का पक्ष है पर जब इस संबंध में प्रधानों से बात की गई तो ऐसी बातें सामने आईं, जिन पर निश्चित रूप से आला अफसरों को चिंतन-मनन करना होगा। सबसे बड़ी बात तो कमीशन की है। अधिकारियों ने भी नाम छिपाते हुए इस बात की पुष्टि भी की कि प्रधानों के सामने कमीशन एक बड़ा मुद्दा है। पहाड़ी बुजुर्ग में मनरेगा के तहत 7,34,711 रुपए बचे हैं। ग्राम विकास अधिकारी दिनेश सिंह ने बताया कि वहां विकास न होने के पीछे एक दिक्कत जहां बरसात रही तो वहीं दूसरी दिक्कत मजदूरों की रही। अब मजदूर 125 रुपए की दिहाड़ी में काम नहीं करना चाहते। बछरन गांव की प्रधान एगसिया देवी ने बताया कि मनरेगा में उनके खाते में 3,04,765 रुपए हैं। उन्होंने यह मानने से इंकार कर दिया कि गांव में काम नहीं हो रहा। ग्राम विकास अधिकारी ने भी बताया कि मेड़बंदी, समतलीकरण का काम चालू है, गांव में काम लगातार चल रहा है। ऐसे में प्रधान को यह समझ में नहीं आ रहा कि उनके गांव की रकम को दूसरे गांव क्यों स्थानांतरित किया जा रहा है। औदहा प्रधान शिवप्रेमधर द्विवेदी के गांव में मनरेगा के तहत 4,70,000 रुपए बाकी हैं। यहां मेड़बंदी चल रही है। प्रधान ने बताया कि मजदूर काम करने को तैयार ही नहीं है, ऐसे में कैसे काम कराया जाए? अरछा बरेठी के प्रधान रामसजीवन मिश्रा ने उस पहलू को छुआ, जिस पर खुलकर बोलने से कोई दूसरा प्रधान या सचिव कतराता रहा और इशारा भर करता रहा। उन्होंने कहा कि शायद मेरी ईमानदारी एक बड़ी वजह है जिसकी वजह से गांव में विकास नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि हर स्तर पर कमीशन मांगा जाता है और मैं कमीशन देने को तैयार नहीं। ग्राम विकास अधिकारी महेंद्र प्रताप सिंह ने हालांकि इस मामले से बचते हुए काम न होने का कारण बरसात बताया। इस गांव में खाते में 15 लाख रुपए बाकी हैं। यहां ग्रामीणों ने खुलकर सचिव पर आरोप लगाया कि वह कभी गांव आते ही नहीं, परिवार रजिस्टर की नकल लेने ब्लाक जाओ तो सचिव नहीं मिलते, ऐसे में वह विकास की बातें क्या करेंगे. ग्रामीणों ने इस संबंध में बीडीओ से भी शिकायत कर रखी है। असोह में प्रधान चिंता देवी ने बताया कि उनके ब्लाक में हाल ही में ग्राम विकास अधिकारी के बदल जाने की वजह से यह पता ही नहीं चला कि खाते में कितना पैसा है। स्वीकृति के लिए फाइल कर्वी जाती है, जिसमें लगभग दस दिन लग जाते हैं, मस्टररोल में भी 15 दिन से लेकर एक माह तक का समय लग जाता है। भदेहदू के प्रधान सत्यनारायण ने बताया कि गांव में मनरेगा के खाते में एक लाख रुपए हैं। कुछ दिन पहले तीन लाख आया था, जिसमें 1.20 लाख मैटेरियल खाते में ट्रांसफर कर दिया गया है। गांव में काम चल रहा है। सुरवल की प्रधान रानी देवी ने बताया कि अभी तक तो खाता निल ही था, काम की चार फाइलें पेंडिंग हैं। उन्होंने यह मानने से इंकार किया कि गांव में काम नहीं हो रहा और बताया कि मेड़बंदी चालू हैं, ब्लाक के एक महीने में पंद्रह बार चक्कर काटने पर मस्टररोल मिला है। उन्होंने कहा कि अब जेई एमबी कर गए हैं और जब इसकी रिपोर्ट मिलेगी तभी भुगतान हो पाएगा। उन्होंने कहा कि अगर उनके गांव का धन किसी दूसरे गांव गया तो ग्रामीणों को लेकर मुख्यालय में प्रदर्शन किया जाएगा। सुरेसेन के प्रधान सुभाष चंद्र ने कहा कि खाते में अभी कितना बाकी है इसकी जानकारी नहीं है, हां तीन लाख आया था, जिसमें काम चल रहा है। चकजाफर माफी की प्रधान गीता देवी ने मनरेगा में एक लाख पड़ा है, संपर्क मार्ग का इस्टीमेट डेढ़ माह से पड़ा है, कुछ तकनीकी वजह से काम रुका है।

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... और इनसे संपर्क नहीं हो सका
पहाड़ी ब्लाक में कुछ ग्राम विकास अधिकारी तो ऐसे भी हैं जो फोन को एक परेशानी मानते हैं। ब्लाक के दीवार पर नंबर तो लिखे हैं पर फोन उठते नहीं। इनमें चंद्रभान गुप्ता, संतोष निषाद, मथुरा प्रसाद आदि हैं। तिरहार के कुछ प्रधानों के पास भी फोन नहीं हैं।

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बीडीओ बोले, मुझसे बताइए
पहाड़ी ब्लाक के बीडीओ राकेश कुमार सोनी ने बताया कि उनके पास अभी तक वित्तीय अधिकार नहीं है। विकास कार्य न होने के लिए ग्राम प्रधान और सचिव दोनों ही जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि अभी तक किसी भी प्रधान ने उनसे न तो विकास और न अधिकारी कर्मचारी के संबंध में कोई शिकायत बताई, ऐसे में कैसे मान लिया कि वे सच कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि कमीशन के संबंध में उन्होंने कर्मचारियों को सख्त हिदायत दे रखी है। प्रधान इसकी सीधे उनसे शिकायत कर सकते हैं।

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जांच तो कराइए डीएम साब- प्रधान संघ अध्यक्ष
पूरे प्रकरण पर प्रधान संघ के जिलाध्यक्ष शिवसागर पांडे, जो अर्जुनपुर के प्रधान हैं, ने खुलकर कमीशनखोरी और भ्रष्टाचार को दोषी बताया। उन्होंने कहा कि टीएस यानी तकनीकी स्वीकृति के लिए दो फीसदी कमीशन खुलकर मांगा जाता है, इसे प्रधान कहां से दे। जिलाधिकारी पूरे मामले में जांच तो कराएं कि काम क्यों नहीं हुआ, कई बातें सामने आएंगी, कई लोग बेनकाब होंगे। उन्होंने कहा कि वह इस धन के दूसरी पंचायतों में भेजे जाने का विरोध कर रहे हैं और इसके लिए कोई रणनीति बनाई जाएगी।
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