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शरदोत्सव के समापन की रात रही नितिन मुकेश के नाम

Chitrakoot

Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
सीतापुर (चित्रकूट)। दीनदयाल शोध संस्थान और जिला प्रशासन सतना के साथ मध्य प्रदेश संस्कृति संचालनालय के तीन दिवसीय शरदोत्सव की अंतिम रात पार्श्वगायक नितिन मुकेश के नाम रही। नितिन मुकेश ने अपने और पिता मुकेश के गाए गीतों से लोगों को लगभग दो घंटे तक झुमाए रखा।
उद्यमिता विद्यापीठ परिसर में बुधवार की रात हुए कार्यक्रम की शुरुआत नितिन मुकेश ने हाल ही में गोलोकवासी हुए रोमांटिक फिल्मों के शहंशाह रहे राजेश खन्ना को श्रद्धांजलि से की। उन्होंने जब गाया- मैं पल दो पल का शायर हूं, पल दो पल मेरी कहानी है, पल दो पल मेरी हस्ती है, पल दो पल मेरी जवानी है... तो सारा माहौल भावुक हो गया। इसके बाद नितिन मुकेश ने अपने गुलदस्ते से एक से बढ़कर एक नायाब नगीने निकाले। खास तौर पर उनके पिता मुकेश के गीतों को उन्होंने जब अपना स्वर दिया तो लोग वाह-वाह कर उठे। कुछ प्रस्तुतियां थीं- डम डम डिगा डिगा मौसम भीगा-भीगा..., जीना यहां मरना यहां/इसके सिवा जाना कहां..., मुबारक हो सबको समां ये सुहाना..., सुहाना सफर और ये मौसम हंसी..., सजन रे झूठ मत बोलो..., रुक जा ओ जाने वाले रुक जा..., फूल तुम्हें भेजा है खत में...। इसके अलावा अपने गाए गीतों जिंदगी की न टूटे लड़ी... आदि से भी लोगों को मोहा। भजन, फिल्मी और देशभक्ति के गीतों का संगम सा हो गया था। इनके साथ मुंबई की मानसी परांजपे ने युगलबंदी की। इस मौके पर मप्र के कृषि विकास एवं किसान कल्याण मंत्री रामकृष्ण कुसमारिया, सांसद सतना गणेश सिंह आदि मौजूद रहे।

इनसेट -------------------
हमारी शैली के गीत कम बन रहे- नितिन मुकेश
चित्रकूट। संक्षिप्त बातचीत में नितिन मुकेश ने चित्रकूट को आध्यात्मिक केंद्र बताते हुए कहा कि यहां आने से प्रेरणा मिलती है। कलाकारों को इस देवभूमि में आना चाहिए, जिससे उनको ऊर्जा मिले। उन्होंने बताया कि उनके पिताजी का सपना था कि वह कभी चित्रकूट आएं पर ऐसा हो न सका। उन्होंने आज की गायकी और संगीत पर टिप्पणी करते हुए कहा कि लोग जो पसंद करते हैं वही परोसा जाता है। उन्होंने कहा कि हम लोग जिस शैली के गायक हैं, उस शैली के गीत आजकल कम बन रहे हैं। उसका ट्रेंड नहीं है।
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