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पांच से दस हजार ही मिले

चंदौली ब्यूरो, अमर उजाला

Updated Fri, 02 Dec 2016 01:19 AM IST
Five to ten thousand received

कतार में खड़े उपभोक्ता।

केंद्र और राज्य कर्मचारियों के वेतन दिवस पर भी बैंकों में पर्याप्त पैसा नहीं पहुंचा। मांग के मुताबिक बैंकों तक पर्याप्त पैसा पहुंचाने का शासन का दावा हवा हवाई साबित हुआ। बैंकों में पैसा आया लेकिन मांग के अनुरूप नहीं आया। बैंक शाखाओं में लोगों की भीड़ जुटी लेकिन लाइन में लगने के बाद भी लोगों को बैंक में उपलब्ध कैश के हिसाब से पांच से दस हजार रुपये में संतोष करना पड़ा।
जिले में लगभग अस्सी हजार रेलकर्मी और सेवा निवृत्त कर्मी जबकि इतने ही राज्य कर्मचारी व सेवा निवृत्त कर्मी हैं। अधिकतर कर्मचारियों को माह के एक से सात तारीख  के बीच तनख्वाह मिलती है। ये सेलरी बैंक एकाउंट में होती है। पचास प्रतिशत कर्मियों के एकाउंट में पहले दिन सेलरी आ गई। शासन ने बैंकों में पर्याप्त कैश पहुुंचाने का आश्वासन दिया था। इसी आश्वासन के बाद दैनिक आवश्यकता के लिए नकदी निकासी के लिए कर्मचारी बैंक शाखाओं में पहुंचे, लेकिन यहां मानक के अनुरूप धन नहीं मिला। बैंक शाखाओं में कर्मचारियों और पेंशन धारकों के लिए अलग काउंटर बनाए गए लेकिन यहां भी रिजर्व बैंक के गाइड लाइन के अनुसार चौबीस हजार रुपये नहीं मिले।
 किसी शाखा में पांच हजार तो किसी में दस हजार रुपये ही कर्मचारियों के हाथ में आए। इससे कर्मचारियों में निराशा हाथ लगी। स्टेट बैंक आफ इंडिया परमार कटरा शाखा में कर्मचारियों को जरूरत के मुताबिक धन दिया गया। यूनियन बैंक आफ इंडिया, इलाहाबाद बैंक, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ इंडिया, बैंक आफ बड़ौदा, केनरा बैंक, ओरियंटल बैंक आफ कामर्स, विजया बैंक सहित अन्य बैंकों में  पांच से दस हजार रुपये ही दिए गए। बैंक आफ इंडिया में सेलरी आने पर बीस हजार रुपये निकालने आए रेलकर्मी एचआर मिश्र ने बताया कि उन्हें मात्र दस हजार रुपये ही मिले। इसी तरह स्टेट बैंक आफ इंडिया रेलवे स्टेशन परिसर में रुपये निकालने आए रेलकर्मी केदार मौर्य ने बताया कि वेतन मिलते ही पूरे माह का राशन, स्कूल की        फीस, लोन, बीमा की किस्त चुकानी होती है।
इसके लिए तीस हजार रुपये की आवश्यकता थी लेकिन यहां सिर्फ दस हजार रुपये ही मिले। इस बावत अग्रणि जिला प्रबंधक एसके पाढी ने बताया कि बैंकों में जरूरत के मुताबिक पैसे आए हैं। हालांकि लेन देन अधिक है, इससे बैंकों ने जरूरत के हिसाब से लोगों को कैश उपलब्ध कराया है।

 
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