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हरित क्रांति योजना कर रही प्रोत्साहित

Chandauli

Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
चकिया। जिले में गेहूं की खेती को जीरो ट्रिल से करने की योजना धीरे धीरे मूर्त रूप लेती जा रही है। धान के कटोरे में हर साल किसानों को जीरो ट्रिल मशीन खरीदने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके तहत किसानों को 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इस वर्ष जिले का कृषि विभाग जनपद में गेहूं की खेती के रकबे का 25 प्रतिशत जीरो ट्रिल सिस्टम से आच्छादित करा रहा है। हरित क्रांति योजना में इसके लिए बाकायदा निवेश भी किया जा रहा है। जिला कृषि अधिकारी का कहना है कि उक्त पद्धति से खेती करने से पानी, बीज तथा उर्वरक की बचत होती है तथा उत्पादन बढ़ता है।
धान के कटोरे में लंबी अवधि की धान की प्रजातियों की खेती की परिपाटी है इसलिए गेहूं की खेती देर से होने की स्थिति बनती रही है। इससे क्षेत्र में गेहूं की खेती की परंपरागत परिपाटी में बदलाव की जरूरत महसूस की जा रही थी। विशेषकर धान की दक्षिण भारतीय प्रजाति एमटीयू-7029 के आने से परंपरागत खेती में बदलाव जरूरी हो गया था। इसी कारण सिमिट (अंतर्राष्ट्रीय संस्था) ने जनपद में जीरोट्रिल पद्धति से खेती की प्रणाली को लागू करने के लिए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद को प्रोत्साहित किया। दो दशक पूर्व धान के कटोरे में जीरो ट्रिल मशीन से गेहूं की खेती आरंभ हुई। इससे खेती में क्रांतिकारी परिवर्तन हुआ। धीरे धीरे बड़े के साथ मझोले किसानों ने भी इसे अपनाने पर जोर दिया तथा अब जीरो ट्रिल पद्धति से खेती परवान चढ़ रही है। हरित क्रांति योजना के तहत पिछले वर्ष से जिले में जीरो ट्रिल मशीन से गेहूं की खेती को बढ़ावा देने की प्रक्रिया आरंभ हुई, जिससे चकिया के किसानों को गेहूं के मुफ्त बीज तथा दवाएं दी गई थी। इस बार भी हरित क्रांति योजना के तहत जिले के बड़े हिस्से को आच्छादित करने की योजना बनी है। वैसे भी सरकार द्वारा जीरो ट्रिल मशीन की खरीद के लिए 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। जिसके चलते हर वर्ष मशीनों की संख्या बढ़ रही है। कृषि वैज्ञानिक डा. अरूण कुमार जोशी का कहना है कि जीरोट्रिल सिस्टम से मशीन में उर्वरक तथा बीज एक साथ डाला जाता है तथा मशीन द्वारा जमीन में सिर्फ चीरा लगाया जाता है तथा हर बीज के साथ उर्वरक गिरता है, जिससे कृषि लागत में भारी बचत होती है। कृषि अधिकारी आरएन सिंह कहते हैं कि इस सिस्टम से खेती करने में गेहूं की उपज भी बढ़ती है तथा 70 प्रतिशत पानी, 25 प्रतिशत उर्वरक तथा बीज की बचत होती है। उन्होंने कहा कि जिले में साल दर साल जीरो ट्रिल मशीन से खेती करने की परंपरा हर वर्ष और पकड़ती जा रही हैं।
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