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सूखे की आशंका से ग्रामीण भयभीत

Chandauli

Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
चंदौली। मानसून आने का इंतजार करते-करते जून बीत गया, लेकिन औसत से बहुत ही कम बरसात होने के कारण उभर रहे सूखे के खतरे को देखते हुए किसानों की माथे पर चिंता की लकीरें खींचने लगी हैं। विशेष तौर बांधों पर आधारित कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के पानी का संकट इस कदर बना हुआ है कि अभी तक पचास प्रतिशत किसान भी धान की नर्सरी नहीं डाल पाए हैं।
गौरतलब है वर्ष 2011 में जून में औसतन 135.5 मिली रिकार्ड बरसात आंकी गई थी, जो पिछले एक दशक मेें हुए दूसरी बड़ी रिकार्ड बारिश के बराबर रही। पिछले वर्ष 15 से तीस जून के बीच मात्र 15 दिनों में हुए रिकार्ड तोड़ बरसात ने वर्ष 2008 के 15 जून से 15 जुलाई के बीच हुए 155 मिली बरसात को भी पीछे छोड़ दिया था। किंतु इस वर्ष जुलाई माह की शुरूआत हो गई और पूरे जून माह में नहीं के बराबर बरसात हुई। इसके चलते सूखे की आशंका प्रबल हो गई है। बांधों पर आधारित कृषि क्षेत्रों में विशेष कर चंद्रप्रभा सिस्टम से सिंचित होने वाले चकिया क्षेत्र के चौबिसहां, चंदौली के बबुरी व समीपवर्ती मिर्जापुर जिले के जमालपुर क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि पर मानसून की बेरुखी का असर साफ दिखाई पड़ रहा है। चकिया क्षेत्र के चौबिसहां व चंदौली के बबुरी क्षेत्र की सिंचाई की व्यवस्था अब भगवान भरोसे रह गई है। चंद्रप्रभा बांध में पानी न जुटने व बांध के बियर वाले हिस्से में छेद हो जाने के कारण कई वर्षों तक पानी नहीं टिक पाता था। इसके लिए केंद्रीय जल आयोग के हाईड्रोलाजिकल सर्वे के बाद बांध के छिद्रों को भरने के लिए करोड़ों रुपये की लागत से एपाक्सी मैटेरियल्स के प्रयोग से छेद बंद किए गए। इस कार्य योजना के दौरान प्रमुख अभियंता सोन ने बांध मेें पानी के संकट को देखते हुए नए स्रोत बढ़ाने की कार्य योजना बनाई थी। इसके तहत जरगो बांध से निकले बंजरिया रेगुलेटर का पानी कूड़ा राजवाहा में बढ़ाकर चंद्रप्रभा बांध तक लाने का प्रयास किया गया था जिसका सोनभद्र के किसानों ने तब पुरजोर विरोध किया। किंतु वर्ष 2009 में इस रेगुलेटर से पानी का प्रवाह बढ़ाया गया जो बाद में कूड़ा राजवाहा तक ही सिमट कर रह गया। कूड़ा राजवाहा नहर को बढ़ाकर चंद्रप्रभा बांध तक पहुंचाने की योजना ठंडे बस्ते तक सिमट गई।
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