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किसानों और उनके खेतों का बनेगा हेल्थ कार्ड

Bulandshahr

Updated Fri, 30 Nov 2012 12:00 PM IST
बुलंदशहर। कृषि विशेषज्ञों ने दूसरी हरित क्रांति की तैयारी शुरू कर दी है। हरित क्रांति के जनक कृषि वैज्ञानिक डा. वैद्यनाथन के निर्देशन में इसकी योजना तैयार हो गई है। कृषि अधिकारियों ने योजना क्रियान्वित करने के लिए जिले में सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। दूसरी हरित क्रांति का आधार पहली के विपरीत तथ्यों को बनाया गया है।
मात्र 40 साल में देश की जमीन का रूप बदल गया है। यही कारण है कि कृषि वैज्ञानिकों को पैदावार बढ़ाने के लिए पहले से विपरीत कार्य करना पड़ रहा है। 1970 में वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक डा. ए वैद्यनाथन के निर्देशन में पहली हरित क्रांति आई थी। उस समय जमीन में जैव पदार्थ भरपूर मात्रा में थे और नाईट्रोजन, फास्फेट आदि का अभाव था। उस समय डीएपी, एनपीके, यूरिया और पोटास आदि का प्रयोग कराया गया तो खेतों ने अनाज उगलना शुरू कर दिया। खाद्यान्न की पैदावार पांच-आठ गुना तक बढ़ गई।
अब खेतों में सबसे ज्यादा कमी जैव पदार्थ चिंताजनक स्तर तक कम हो गए हैं। ऐसे में रासायनों के प्रयोग से खेतों के बंजर होने की आशंका है। अब विशेषज्ञ दूसरी हरित क्रांति लाना चाहते हैं। इसके लिए रासायनों को नियंत्रित करना चुनौती बना हुआ है। अब फिर से डा. ए वैद्यनाथन के निर्देशन में तैयारी शुरू हुई है।
विशेषज्ञों ने किसानों और उनके खेतों के हेल्थ कार्ड बनाने की योजना तैयार की है। किसानों का स्वास्थ्य परीक्षण कर डॉक्टर उनको डाइट चार्ट बनाकर देंगे, जिससे किसानों का विश्वास जीता जा सके। इसी तर्ज पर मृदा परीक्षण कर इनका उर्वरक चार्ट तैयार किया जाएगा। यह अभियान नाबार्ड, कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केन्द्र, गन्ना विभाग और उद्यान विभाग संयुक्त रूप से चलाएगा।

ऐसा भी होता था
70 के दशक में किसान जमीन के बंजर होने के भय से रासायनिक उर्वरक डालने को तैयार नहीं थे। तब कृषि अधिकारी रात में किसी खेत की एक क्यारी में रसायन डाल देते थे और इसका बोर्ड लगा देते थे, जिससे किसानों को पैदावार में अंतर महसूस हो सके। अब इसका उल्टा है। विशेषज्ञ रसायनिक उर्वरक बंद करने की बात कर रहे हैं और किसान अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं।

अफसरों की तैयारी
किसानों को उर्वरकों के मनमाने प्रयोग से रोकना होगा, वरना खेत बंजर हो जाएंगे। यदि किसान समझाने से नहीं मानते हैं तो रसायनिक उर्वरकों की राशनिंग शुरू करने की सिफारिश की जाएगी।
डा. हंसराज, प्रभारी वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केन्द्र

मृदा परीक्षण के बाद किसानों को फील्ड हेल्थ कार्ड बनाकर दिए जाएंगे। इनमें उर्वरक प्रयोग का समायोजन समझाया जाएगा। किसानों को इनके आधार पर उर्वरक प्रयोग करने से ज्यादा पैदावार मिलेगी।
डा. विवेक राज सिंह, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक

किसानों की मनमानी से खेतों की हालत बिगड़ रही है और पैदावार बढ़ नहीं रही। ऐसे में रासायनों को नियंत्रित करना प्राथमिकता है। किसानों को नई व्यवस्था के लिए तैयार होना पड़ेगा, वरना खेत बंजर हो जाएंगे।
डा.एके विशभनोई, उप कृषि निदेशक, प्रसार
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