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पेयजल नहीं नसीब, शहर से देहात तक गहरा रही समस्या

Bulandshahr

Updated Fri, 02 Nov 2012 12:00 PM IST
बुलंदशहर। दावे चाहे जो हों, लेकिन सच्चाई यह है कि जिले की जनता को जरूरत के मुताबिक पेयजल नहीं मिल रहा है। 1450 एमएलडी की जरूरत के सापेक्ष जिले में मात्र 800 एमएलडी पानी ही मिल रहा है। ऐसे में लोग दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। अरबन एरिया की तर्ज पर ही रूरल में भी पेयजल गुणवत्ता बदहाल है। पेयजल किल्लत को अधिकारी भी गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
शासन ने लोगों की पेयजल जरूरत को मानक निर्धारित किए हैं। विभाग केे आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 70 लीटर और शहरी क्षेत्रों में 140 लीटर लीटर पेयजल प्रति व्यक्ति को रोजाना जरूरी माना गया है। इसके हिसाब से नलकूपों और वाटर हैड टैंकों का निर्माण किया गया है। जनपद में 77 नलकूप हैं, जिनमें से बुलंदशहर नगर में 30 हैं। जिले में 10 नलकूप खराब पड़े हैं। ये पानी देने की स्थिति में नहीं हैं। जिले के शहरी क्षेत्रों की आबादी 11 लाख है, जबकि बुलंदशहर नगर की 2.17 लाख। नलकूपों के अलावा जनपद में वर्ष 1990 से अब तक 35660 इंडिया मार्का नल लगाए गए हैं।
नलकूपोें की संख्या पर्याप्त होने के बावजूद पानी की किल्लत बनी हुई है। 1450 एमएलडी पानी के सापेक्ष लोगों को मात्र 800 एमएलडी पानी रोजाना ही मिल रहा है। जल निगम का मानना है कि विद्युत आपूर्ति में कमी के कारण पानी की सप्लाई में बड़ी समस्या है।

क्या होगा शासन के मिशन 2021 का
शासन ने लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने को मिशन 2021 शुरू किया है। इसके तहत पांच हजार से ज्यादा आबादी वाले और दूषित पानी के क्षेत्रों वाले गांवों को भी पाइपलाइन वाटर सप्लाई शुरू की जानी है। सूबे के कई जनपदों में इस योजना पर कार्य शुरू हो चुका है, लेकिन जनपद में जल निगम के अफसरों ने इसकी सुध नहीं ली है। काम शुरू होने और सर्वे कराने की बात तो दूर, अभी तक लोगों को योजना की जानकारी ही नहीं दी गई है।

कई क्षेत्र डार्क जोन में
जनपद में भूजल स्तर में साल दर साल गिरावट आ रही है। गुलावठी, खुर्जा, स्याना और सिकंदराबाद को डार्क जोन में घोषित किया जा चुका है। इसके बावजूद जल संचय अभियान शुरू नहीं किए गए हैं। जलनिगम इसको अपना काम तक मानने को तैयार नहीं है। शासन ने एनसीआर में सबमर्सिबल लगाने पर रोक लगाई हुई है। इसको लगाने से पहले डीएम की मंजूरी जरूरी है। इसके बावजूद जिले में धड़ल्ले से सबमर्सिबल लगाए जा रहे हैं।

क्या कहते हैं अफसर
जल निगम के एक्सईएन एसके भारद्वाज का कहना है कि मौजूदा संसाधनों में बेहतर सप्लाई देने की कोशिश की जा रही है। बिजली की कमी से पानी की थोड़ी परेशानी है। हालांकि इसकी जिम्मेदारी निकायों की है। विभाग को सबमर्सिबल के बारे में जानकारी नहीं है। पेयजल की गुणवत्ता को मानक निर्धारित किए हुए हैं।
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