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रामसर साइट में कछुओं-मछलियों का हो रहा शिकार

Bulandshahr

Updated Mon, 29 Oct 2012 12:00 PM IST
बुगरासी (ब्यूरो)। स्याना की डेयरियों और हापुड़ की शुगर मिलों के केमिकलयुक्त पानी के कारण पहले से ही गंगा नदी के जीवों पर खतरा मंडरा रहा है। अब यहां बड़े पैमाने पर शिकार शुरू हो गया है। अफसरों की मिलीभगत के कारण रामसर साइट में मछलियों और कछुओं के जीवन पर संकट गहरा गया है। गंगा में जाल बिछाकर इन जलीय जीवों का शिकार किया जा रहा है। मछलियों और कछुओं की जिले से बाहर तस्करी की जा रही है। न तो वन विभाग के अफसर कार्रवाई को तैयार हैं और न ही पर्यावरण संस्थाएं आगे आ रही हैं। तस्करी का यह खेल लंबे समय से चल रहा है।
बुगरासी गंगा का क्षेत्र है। पूरा एरिया रामसर साइट में आता है। यहां गंगा में विभिन्न प्रजाति की मछली, कछुए और अन्य जीव बहुतायत में हैं। क्षेत्र रामसर साइट में होने के कारण जलीय जीवों का शिकार पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके बावजूद भी क्षेत्र के गांव भगवानपुर, बसीबांगर, फरीदाबांगर और निजामपुर गंगा में खुलेआम जलीय जीवों का शिकार हो रहा है। शिकारी और तस्कर मछली और कछुओं को पकड़ने के लिए गंगा में जाल डाले रखते हैं। क्षेत्र सहित हसनपुर और गढ़मुक्तेश्वर क्षेत्र के शिकारी जीवों के दुश्मन बने हुए हैं। तंत्र विद्या में काम आने वाले कछुए को तस्कर बड़े पैमाने पर पकड़ते रहे हैं।

रामसर साइट में मछलियों की प्रजाति
डॉल्फिन, रोहू, गौच, केरल, झींगा, गैंड मछली। इनमें से डॉल्फिन की संख्या क्षेत्र में बहुत कम रह गई है। गंगा में प्रदूषण और शिकार के कारण डॉल्फिन कभी-कभार ही गंगा में नजर आती है।

अफसरों की मिलीभगत
नेहरू युवा मंडल के अध्यक्ष एवं पर्यावरण प्रेमी अनिल कुमार का कहना है कि वन विभाग की मिलीभगत से जलीय जीवों का शिकार हो रहा है। लोगों की शिकायत पर भी वन विभाग के अफसर कभी कार्रवाई नहीं करते। यह खेल चलता रहा तो रामसर साइट से जलीय जीव खत्म हो जाएंगे।

होगी छापेमारी
डीएफओ यशपाल मलिक का कहना है कि गंगा में जीवों के शिकार पर रोक है। वन विभाग की टीम समय-समय पर छापामारी करती रहती है। पुलिस को भी निर्देश जारी किए जा चुके हैं। संबंधित क्षेत्रों में सर्च कर शिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों का सहयोग लिया जाएगा। विभाग के जिस एसडीओ के क्षेत्र में शिकार हो रहा है, उसकी भूमिका की भी जांच कराई जाएगी।
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