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आतिशबाजी से करें परहेज

Bijnor

Updated Mon, 12 Nov 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। दीपावली पर थोड़ी सी लापरवाही आपको बहरा कर सकती है। तेज आवाज वाले पटाखों से परहेज करें, पटाखों से निकली 125 डेसीबल आवाज बहरा भी कर सकती है। ये तेज ध्वनि बच्चों और गर्भवती महिलाओं के लिए अधिक घातक है। पटाखों से निकलने वाला धुआं बच्चाें और अस्थमा रोगियों के लिए परेशानी का सबब बन सकती है।
पटाखों के शोर सहित धुएं में नाइट्रोजन सल्फर डाई आक्साइड और रेस्पाइबिल सस्पेक्टेड पर्टीकुलर मैटर होता है। पर्टीकुलर मैटर की अधिकता हृदय की धड़कन को बढ़ा सकती है। इसका गर्भस्थ शिशु पर बुरा पड़ सकता है और अनिंद्रा सहित कई बीमारियां जकड़ सकती हैं। पटाखों से निकलने वाले धुएं से अस्थमा रोगियों की सांस फूल सकती है, अधिक सांस फूलने पर मौत भी हो सकती है। पटाखों की तेज ध्वनि से मानसिक बेचैनी से लेकर अस्थाई बहरापन हो सकता है।
बच्चोें को रखे आतिशबाजी से दूर
छोटे बच्चों को आतिशबाजी से दूर रखें। बच्चों को छोड़ने के लिए फुलझड़ी ही दें अथवा या छोटे पटाखे को अपनी देखरेख में बच्चों को पटकाने दें।
तेज ध्वनि के नुकसान
धमाका होने से निकली 70 डेसीबल आवाज से मनुष्य को बेचैनी, मानसिक तनाव
80 डेसीबल में सिरदर्द, थकान, कार्यक्षमता में कमी,
85 में बहरापन या श्रवणदोष,
90 डेसीबल में कान के आंतरिक भाग को क्षति,
100 डेसीबल में हृदय धड़कन बढ़ना, थकान, हाई ब्लडप्रेशर,
120 डेसीबल में याददाश्त में कमी, गर्भस्थ शिशु पर बुरा प्रभाव
140 डेसीबल पर कुछ मिनटों तक सुनने से ही अत्याधिक पीड़ा या अस्थाई बहरापन

पटाखे छोड़ते समय सावधानी
कम आवाज और कम धुएं के पटाखे छोड़ें।
पटाखे छोड़ते समय कानों में टाइट क्लिप लगाएं। (जो तैराकी के समय लगाए जाते हैं।)
पटाखे खुले मैदान में छोड़े।
किसी भी तरह की परेशानी होने पर तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।
तेज धमका होते समय आंखों से न देखें।
आतिशबाजी को दूर खड़े होकर देखें।
60 डेसीबल से अधिक आवाज के होते हैं पटाखे
ईएनटी सर्जन डॉ. सुभाष चंद राणा ने बताया कि सभी पटाखे 60 डेसीबल से अधिक ध्वनि के होते हैं। यह ध्वनि कानों के लिए पेनफुल होती है। अस्थमा रोगी आतिशबाजी से बहुत दूर रहे, ताकि उनके पास तक धुआं न पहुंचे सके।
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