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कृषि भूमि में जीवांश कार्बन पोषक तत्व का टोटा

Bijnor

Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
धामपुर। कृषि विभाग ने प्रदेश में अपनी कृषि मिट्टी पहचानो अभियान चरणबद्ध तरीके से चलाएं हैं। अब तक इस अभियान के दो चरण पूरे हो चुके हैं। इनमें विभाग की तरफ से जो मिट्टी के नमूने लिए गए हैं, उनका परीक्षण करने के बाद पता चला है कि कृषि भूमि में जीवांश कार्बन की भारी कमी हो गई है। इस कारण फसलों की पैदावार स्थिर हो गई है। यदि किसानों ने फसल चक्र को अपनाकर खेतों में हरी खाद या फिर गोबर की खाद का प्रचुर मात्रा में उपयोग नहीं किया तो मिट्टी की दशा में सुधार होना संभव नहीं है। ऐसा न करने से किसानों को भारी लागत लगाने के बाद भी कोई खास लाभ नहीं होगा।
कृषि विभाग ने प्रदेश में अपनी मिट्टी पहचानो अभियान चलाया है। पहला चरण आठ अक्तूबर को चला था। विभागीय अधिकारियों ने तहसील क्षेत्र के चारों ब्लाकों में 1200 किसानों के खेतों में जाकर मिट्टी के सैंपल लिए थे। दूसरे चरण (20 अक्तूबर को) में 1100 मिट्टी के नमूने लिए गए। इस प्रकार से अब तक विभाग 2300 मिट्टी के नमूनों को ले चुका है। विभाग के अनुसार अभियान का तीसरा चरण तीन नबंवर को चलेगा। इसमें और मिट्टी के नमूने लिए जाएंगे।
कृषि विभाग के प्रभारी उप संभागीय कृषि प्रसार अधिकारी राजपाल सिंह से जब इस अभियान के बारे में पूछा गया तो उन्होंने बताया कि विभाग की ओर से अधिकांश मिट्टी के सैंपलों का परीक्षण किया जा चुका है। अधिकांश का नमूनों का परीक्षण करने पर स्पष्ट हुआ है कि कृषि भूमि में जीवांश कार्बन की भारी कमी होने से फसलों का उत्पादन स्थिर हो गया है। किसानों द्वारा भारी लागत लगाने के बाद उस हिसाब से उत्पादन नहीं मिल रहा है। बाकी और पोषक तत्वों की स्थिति सामान्य है।
उन्होंने कहा यदि किसानों ने खेती करने की पुरानी पद्धति को नहीं अपनाया तो नुकसान के और होने से कोई नहीं रोक सकता। जीवांश कार्बन की भारी कमी को खेतों में हरी खाद और गोबर की खाद को प्रचुर मात्रा में प्रयोग कर ही दूर किया जा सकता है। किसानों को फसल चक्र को भी अपनाना होगा। खेत में एक फसल को एक नहीं बार - बार लेने का प्रयास कर रहा है। इससे भारी लागत लगाने के बाद उत्पादन उपज स्थिर है। उन्होंने किसानों से कृषि विभाग के वैज्ञानिकों के सुझाव पर फसल में उर्वरक का प्रयोग करने को कहा। किसानों ने यदि ऐसा नहीं किया तो खेती में और नुकसान होने की संभावना को नहीं नकारा जा सकता। जीवांश कार्बन ही मिट्टी की जान होता है।
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