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घाव छोड़ पट्टी की धुलाई में लगा कृषि विभाग!

Bijnor

Updated Tue, 16 Oct 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। किसानों की आय बढ़ाने के लिए एक बार फिर से सह फसली खेती को बढ़ावा देने की तैयारी की जा रही है। गन्ने के साथ उर्द व मूंग की बुआई के लिए बीज पर पचास प्रतिशत का अनुदान दिया जाएगा। खास बात यह है कि जिले में दलहन के दुश्मन वनरोज (माहे) पर काबू पाने के लिए कोई प्लान नहीं बनाया गया है। नतीजा माहे दलहन के साथ साथ गन्ने की फसल को भी जबरदस्त नुकसान पहुंचाते हैं।
कृषि विभाग द्वारा वसंत कालीन गन्ने की बुआई के दौरान किसानों को दलहन की खेती व आय बढ़ाने की दृष्टि से उर्द व मूंग के बीज पर पचास प्रतिशत अनुदान दिया गया जाएगा। कीटनाशक पर भी 75 प्रतिशत अनुदान की योजना है। सह फसली खेती के लिए गन्ना विभाग के अफसरों की भी मदद ली जाएगी। बिजनौर में आठ हजार हेक्टेयर, सहारनपुर में आठ हजार हेक्टेयर, मुजफ्फरनगर में सात हजार हेक्टेयर, मेरठ में तीन हजार हेक्टेयर, बागपत में तीन हजार हेक्टेयर, गाजियाबाद में दो हजार हेक्टेयर, बुलंदशहर में दो हजार हेक्टेयर गन्ने में दलहन की फसल बुआई का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। कृषि विभाग का मानना है कि सह फसली खेती को अपनाने से किसानों की आय बढ़ेगी और दलहन का उत्पादन भी अधिक होगा, जबकि जिले में इसका रकबा घटने की वजह वनरोज का आतंक है।
करीब डेढ़ दशक पूर्व जिले में 20 हजार हेक्टेयर भूमि में दलहन की फसल होती थी, लेकिन गत वर्ष जिले में महज 3616 हेक्टेयर भूमि में बोई गई और इस बार यह आंकड़ा अभी 1680 हेक्टेयर के आसपास ही है। भाकियू के जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह व किसान मजदूर संगठन के जिला महामंत्री कैलाश लांबा के अनुसार जिले में दलहन न बोई जाने की वजह माहे हैं। शासन स्तर से माहों को रोकने के लिए कोई योजना नहीं बनाई गई है। दो वर्ष पूर्व गन्ना विभाग द्वारा गन्ने के साथ उर्द की सह फसल कराई गई थी, लेकिन योजना फ्लाप हो गई और किसानों को नुकसान हुआ। किसानों का कहना है कि अगर माहों को रोकने की प्लानिंग बने तो दलहन का रकबा बिना अनुदान के ही बढ़ जाएगा।
क्या कहते हैं अधिकारी
कृषि विभाग के उपनिदेशक जसपाल का कहना है कि फिलहाल उर्द व मूंग के बीज पर अनुदान की योजना है। वनरोज को रोकने के लिए अभी कोई स्कीम नहीं बनी हैं।
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