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कम पैसे में ही बनानी होंगी सड़कें

Bijnor

Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। सड़कों की गुणवत्ता इस बार पटरी से उतरती नजर आ रही है। शासन ने सड़कों के निर्माण में खर्च होने वाले बजट में पांच प्रतिशत की कमी कर दी है। खास बात यह है कि गन्ना व पीडब्ल्यूडी विभाग को निर्धारित लंबाई चौड़ाई की सड़क अब कम पैसों में ही बनानी पड़ेगी। शासन के निर्देशों के बाद अब गन्ना विभाग दोबारा से नए बजट के आधार पर टेंडर निकालने की योजना बना रहा है। बजट में घटोतरी की वजह नई योजनाओं से सरकारी खजाने पर बढ़े बोझ को माना जा रहा है।
गन्ना विभाग ने इस बार करीब 60 सड़कों के निर्माण के लिए प्रस्ताव भेजा था। प्रस्ताव पास होने के बाद टेंडर की प्रक्रिया भी शुरू हो गई थी, लेकिन सितंबर के अंतिम सप्ताह में अचानक टेंडर स्थगित कर दिए गए थे। इसके पीछे शासन द्वारा बजट में पांच प्रतिशत की कमी किया जाना है। अब सभी सड़कों के बजट में घटोतरी की जा रही है। दोबारा से बजट बनाए जा रहे हैं। गजब तो यह है कि सड़कों की लंबाई या चौड़ाई को कम नहीं किया गया है। सड़कों की गुणवत्ता पर तलवार चलाई गई है। हालांकि अधिकारियों को कम पैसे में ही अच्छी सड़क बनाने के सख्त निर्देश दिए गए हैं। बजट में घटोतरी पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा प्रस्तावित सड़कों में भी की गई है।
विभागीय सूत्रों के अनुसार सड़कों के बजट में घटोतरी की वजह नई योजनाओं का सरकारी खजाने पर बढ़ा बोझ है। अब फिर से विभाग सड़कों के टेंडर निकालने की तैयारी में है। गन्ना विभाग के एई रामजन वर्मा ने भी बजट में कटौती की पुष्टि की है। उनका कहना है कि अभी मौखिक रूप से ही निर्देश मिले हैं।
तो क्या इस बार बन पाएंगी सड़कें!
इस बार सड़क निर्माण को लेकर चल रही प्रक्रिया इतनी धीमी है कि सड़कों का निर्माण होना मुमकिन लग रहा है। हर बार जून माह में ही टेंडर जारी कर दिए जाते थे, लेकिन इस बार सितंबर में टेंडर निकाले गए, लेकिन शासन के हस्तक्षेप के बाद टेंडर स्थगित कर दिए। माना जा रहा है कि अक्तूबर के अंत तक टेंडर खुलने की संभावना है। इसके बाद तापमान गिरने के कारण ठंड के मौसम में सड़कों का निर्माण प्रभावित हो जाता है। इस वित्तीय वर्ष में खस्ताहाल सड़कों से ही किसानों को गन्ने की ढुलाई करनी होगी। नवंबर में पेराई सत्र शुरू हो जाता है। डीसीओ संजय गुप्ता का कहना है कि प्रयास किए जा रहे हैं कि समय पूर्व ही सड़कों का निर्माण हो जाए।
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