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गंगा के तेवरों ने बढ़ाई किसानों की चिंता

Bijnor

Updated Thu, 20 Sep 2012 12:00 PM IST
बिजनौर। गंगा पार से गन्ना लाना किसानों के लिए इस बार टेढ़ीखीर साबित होगा। गंगा की धार की चौड़ाई बढ़ने से किसान परेशान हैं। इस पर गंगा की लहरों पर लकड़ी का पुल बनाना भी मुश्किल लग रहा है। ि
गंगा के तटीय गांव रावली, ब्रह्मपुरी, शहजादपुर, सीमला कला, फतेहचंद सभा, डैबलगढ़ समेत कई गांवों के लगभग 50 हजार किसान गांगा के उस पार खेती करते हैं। इस जमीन पर ज्यादातर किसानों ने गन्ने की फसल उगाई हुई है। अक्तूबर के अंत में गन्ने की फसल तैयार हो जाती है। कई वर्षों से किसान गंगा के उस पार से गन्ना लकड़ी का पुल बनाकर लाते हैं। इस बार लकड़ी का पुल बना पाना किसानों के लिए आसान नहीं लग रहा। गंगा की धारा पहले के मुकाबले काफी चौड़ी है। पानी में अधिक लंबा पुल बनाकर उस पर वजन लाना खतरनाक है। दो वर्ष पूर्व भी सीमला कला में पुल टूटने से एक बच्चे की मौत हो गई थी। गंगा की धारा को देखकर इस बार पुल बनाना मुमकिन नहीं लग रहा है। किसान अपने खेतों पर भी नहीं जा पा रहे हैं। गंगा में पानी कम होने पर नाव के जरिए ही किसान गंगा पार कर पाते हैं। ऐसे हालात में इस बार गंगा पार से गन्ना कैसे आएगा, किसानों की चिंता बढ़ रही है। किसानों की नजर प्रशासन पर टिकी है। प्रशासन चाहें तो इन किसानों के लिए पेराई सत्र के दौरान पीपे का पुल बनवाकर किसानों की मदद कर सकता है।
भाकियू जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह का कहना है कि तटीय गांवों के किसानों के लिए प्रशासन को अस्थाई पुल बनवाना चाहिए। इसकी एवज में प्रशासन किसानों से चाहे टोल टैक्स ले ले। पीपे का पुल बनवाने में अधिक खर्च आने के कारण किसान इसे खुद वहन नहीं कर सकते। इसमें संबंधित शुगर मिल को भी मदद करने की जरूरत है। एडीएम वित्त एवं राजस्व रणविजय सिंह का कहना है कि शासन स्तर से पुल निर्माण की अनुमति मिलती है। सदर विधायक कुंवर भारतेंद्र सिंह का कहना है कि वे खादर क्षेत्र में पीपे का पुल बनवाने के लिए मामले को शासन स्तर पर रखेंगे। प्रशासन से भी इस मामले में बात करेंगे। पुल के लिए पूरे प्रयास किए जाएंगे।
ग्रामीणों का एसडीएम कार्यालय प्रदर्शन
धामपुर। पहाड़ों पर मंगलवार को हुई भारी बारिश से खो नदी में फिर से उफान आ गया है। उफान को देख गांव मुकुरपुरी के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों पर बाढ़ राहत बचाव कार्य नहीं करने का आरोप लगाते हुए एसडीएम कार्यालय पर प्रदर्शन किया।
बुधवार को उक्त गांव के लोग ट्रैक्टर ट्राली से बुधवार सवेरे एसडीएम कार्यालय पर पहुंचे और सिंचाई विभाग के विरुद्ध नारेबाजी की। आरोप लगाया कि विभाग ने बाढ़ से बचाव के लिए अभी तक कुछ नहीं किया है। अब तक हजारों हेक्टेयर फसल भूमि कटाव के कारण खो की भेंट चढ़ गई है, लेकिन विभाग ने अभी तक बाढ़ बचाव संबंधित कोई कार्य नहीं किए हैं। ग्रामीणों ने एसडीएम को ज्ञापन भी सौंपा। जिसमें खो नदी कटाव से बर्बाद फसलों का मुआवजा दिलाने की मांग की। एसडीएम श्रीप्रकाश गुप्त ने अफजलगढ़ सिंचाई खंड धामपुर के एक्सईन नंदीश्वर जैन को घटना से अवगत कराया। एक्सईएन टीम के साथ मौका मुआयना करने गांव में पहुंचे।
प्रदर्शन में पदम सिंह, घासीराम, चेतन सिंह, नेमीशरणसिंह, ओमप्रकाश सिंह, सुरेश कुमार, नरेश कुमार, हरप्रसाद सिंह, मेहराव सिंह, सुशील कुमार, महिपाल सिंह, बलवंत, नरदेव, राजपाल, सुभाष आदि शामिल रहे।

बाढ़ की स्थिति कतई नहीं: एक्सईएन
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता ने बताया कि नदी में ज्यादा पानी नहीं है। नदी की धार गांव की बने बंदे से दूर है। करीब 70 हजार की क्षमता वाली नदी में मात्र चार हजार क्यूसेक पानी ही चल रहा है। इससे नुकसान की कोई संभावना नहीं है।
खो का जल बढ़ने से ग्रामीण भयभीत
नगीना। मैदानी क्षेत्र और पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही वर्षा के कारण नगीना क्षेत्र में खो नदी का जल स्तर बढ़ने से नदी के किनारे स्थित ग्राम चमरावाला गांव के लोग भयभीत हैं।
ग्राम चमरावाला के एडवोकेट अवधेश कुमार, नरेन्द्र जीत, संजीव कुमार, कर्मवीर सिंह, अजय कुमार, सुल्तान अहमद ने मंगलवार को तहसील दिवस में डीएम को एक प्रार्थना पत्र दिया कि गांव की उत्तर दिशा में बहने वाली खो नदी का जल स्तर बढ़ जाता है। ऐसा पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के कारण होता है। क्षेत्र के सिंचाई विभाग द्वारा बचाव के साधन किए गए हैं लेकिन उन साधनों से ग्रामीणों को कोई लाभ नहीं पहुंचता, पानी के तेज वेग से संपर्क मार्ग टूट जाता है और ग्रामीणों के लिए समस्या खड़ी हो जाती है। इस संबंध में एसडीएम का कहना है कि मामले को संज्ञान में लिया गया है जल स्तर में वृद्धि तो हुई है लेकिन गांव को खतरा नहीं है। इस संबंध में सिंचाई विभाग को अवगत करा दिया गया है।
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