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पानी की जंग में नहीं मिली कामयाबी

Bijnor

Updated Tue, 18 Sep 2012 12:00 PM IST
नजीबाबाद। जाब्तागंज में नलकूप बोरिंग और वाटर टैंक प्रस्ताव की फाइल धूल फांक रही है। सैकड़ों परिवार पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। पूर्व विधायक का दावा है कि फाइल शासन को भेजी गई, मगर बजट नहीं मिल पाया। उधर, जलनिगम के एई बताते हैं कि प्रस्ताव पर किसी भी योजना में फंड न मिलने की संभावना के चलते फाइल शासन को भेजी ही नहीं गई। अलबत्ता नवनिर्वाचित विधायक ने नलकूप बोरिंग और वाटर टैंक के लिए शासन से बजट स्वीकृत कराने के प्रयास की बात कही।
बसपा शासनकाल में जाब्तागंज क्षेत्र में नलकूप बोरिंग और वाटर टैंक निर्माण की कवायद शुरू की गई थी। पूर्व विधायक शीशराम सिंह ने पेयजल विकास के अंतर्गत फाइल तैयार कराई थी। विधायक का कहना था कि फाइल शासन को भेजी गई है। बजट मिलते ही नलकूप बोरिंग और वाटर टैंक बनवाकर जाब्तागंज लाइन, चारबाग, मुनीरगंज, घिसटपुरी, गीता नगरी, हाईवे के किनारे आबादी क्षेत्र, रायपुर मार्ग पर आबादी क्षेत्र को जलापूर्ति सुचारु करने की योजना बनाई गई थी। सूबे में सरकार बदल गई। बसपा शासनकाल में शुरू हुई पेयजल विकास की कवायद पर विराम लग गया। वर्तमान विधायक हाजी तसलीम अहमद बसपा से विधायक हैं। उन्होंने बताया कि पेयजल विकास के प्रस्ताव की फाइल को आगे बढ़ाया जाएगा। पेयजल विकास की योजना के साकार रूप लेने पर इसके बेहतर परिणाम सामने आएंगे। इसके लिए शासन से बजट स्वीकृत कराने का हरसंभव प्रयास किया जाएगा।
उधर, जलनिगम के एई अच्छेलाल ने बताया कि इस तरह का कोई प्रस्ताव शासन को नहीं भेजा गया है। दरअसल शहरी क्षेत्र में पेयजल विकास की केंद्र सरकार की योजना अरबन इंफ्रास्टक्चर डेवलपमेंट स्कीम फॉर स्मॉल एंड मल्टी टाउन बंद हो चुकी है। नगर क्षेत्र में पेयजल विकास के लिए प्रदेश सरकार द्वारा निगम को कोई बजट जारी नहीं किया गया है।

ये हैं दिक्कत
नजीबाबाद। जाब्तागंज लाइनपार, चारबाग और मुनीरगंज क्षेत्र को फिलहाल पठानपुरा और हवेलीतला नलकूप से जलापूर्ति की जा रही है। पर्याप्त प्रेशर न बन पाने के कारण मुनीरगंज में करीब 100 तथा जाब्तागंज लाइनपार और चारबाग क्षेत्र में करीब 150-150 कनेक्शन धारकों को समय पर पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। उधर, सैकड़ों परिवार निजी हैंडपंप और महंगे सबमर्सिबल पंप लगाने पर मजबूर हैं।

यहां मिली थी मदद
नजीबाबाद। गीता नगरी के कॉलोनाइजर द्वारा पेयजल विकास योजना के लिए भूमि देने की बात कही थी। ताकि गीता नगरी के साथ-साथ आसपास के उपेक्षित क्षेत्रों को सरकारी जलापूर्ति हो सके।
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