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28 सालों से रखे गए बिसरा होंगे नष्ट

Bhadohi

Updated Thu, 18 Oct 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। 28 वर्षों से असामयिक मौत के शिकार लोगों के सहेजकर रखे गए बिसरे को नष्ट किया जाएगा। जगह की कमी के चलते जिला चिकित्सालय प्रशासन ने इन्हें आगे भी सुरक्षित रख पाने से हाथ खड़े कर दिए हैं। इसके लिए पुलिस और स्वास्थ्य महकमे की संयुक्त टीम गठित करने की तैयारी चल रही है। चिकित्सालय परिसर में निर्माण कार्य होने से लगभग ढाई सौ लोगों का बिसरा रखने के लिए जगह की कमी पड़ गई है। इससे चिकित्सालय प्रशासन ने सहेजकर रखे गए बिसरा को नष्ट करने की योजना बनाई है। इसके लिए जिला चिकित्सालय से पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम गठित करने के लिए पुलिस अधीक्षक को पत्र भेजा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक द्वारा टीम गठित करते ही अनुपयोगी बिसरों को नष्ट कर दिया जाएगा।
हादसों, हत्याओं और अबूझ हाल में होने वाली मौत पर मृत शरीर का अंत्य परीक्षण (पोस्टमार्टम) किया जाता है। इस दौरान मृत शरीर के जरूरी अवयवों को बिसरा के रूप में रख लिया जाता है। 1984 से असामयिक मौत के बाद शव के अंत्य परीक्षण किए गए और जांच के लिए निकाले गए बिसरे जिला चिकित्सालय में ही रखे गए हैं। जिला चिकित्सालय में रखे गए बिसरों की तादाद लगभग ढाई सौ पहुंच गई है। जबकि शव के पोस्टमार्टम के बाद पुलिस की जिम्मेदारी होती है कि, उसे लेकर जांच कराए और उसकी उपयोगिता खत्म हो जाने पर नष्ट कर दे।
जिला चिकित्सालय परिसर में वार्ड और ओटी का निर्माण चल रहा है। इससे जगह की कमी के चलते विसरा सहेज कर रखे गए भवन को तोड़ा जाएगा। लेकिन, चिकित्सालय परिसर में लोगों की मौत के बाद सलामत बिसरे को रखने के लिए जगह नहीं मिल पा रही है।

इनसेट
टीम के समक्ष नष्ट होगा बिसरा
ज्ञानपुर। सीएमएस डॉ. केएस राय ने बताया कि बिना एसपी की अनुमति के बिसरा नष्ट नहीं किया जा सकता। इसलिए एसपी को पत्र लिखा जा रहा है। पुलिस अधीक्षक द्वारा स्वास्थ्य और पुलिस अधिकारियों की गठित टीम के समक्ष बिसरे को नष्ट कर दिया जाएगा।
शरीर के अवयव होते हैं बिसरा
ज्ञानपुर। विभिन्न हादसों, अबूझ मौतों और हत्या आदि के मामले में शव का पोस्टमार्टम किया जाता है। बिसरा के रूप में मृतक के शरीर से ब्रेन, दिल, लीवर, तिल्ली और किडनी निकाल ली जाती है। उसे सुरक्षित रहने के लिए जार में रखा जाता है। इससे जब चाहे बिसरे को लैब में भेजकर जांच कराई जा सकती है।
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