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रामपुर घाट पीपापुल चालू होने में होगी देरी

Bhadohi

Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
गोपीगंज। क्षेत्र के रामपुर घाट पर गंगा नदी पर हर वर्ष बनने वाला पीपा पुल इस बार भी देर से शुरू हो सकता है। गंगा का जलस्तर काफी बढ़ जाने और पीपे की संख्या कम होने के कारण पुल का निर्माण अधर में लटक सकता है। पुल के निर्माण में प्रयोग होने वाले लकड़ी, बल्ली, तार आदि भी जर्जर हो चुके हैं। इससे कम ही संभावना है कि पीपा पुल समय से तैयार हो पाएगा।
लोक निर्माण विभाग की ओर से 1979 से रामपुर घाट पर पीपा पुल का निर्माण कराया जा रहा है। उस समय पुल को बनाने के लिए 100 पीपा मंगाया गया था। वर्तमान में करीब 75 पीपे बचे हुए हैं। 25 पीपे गायब हो चुके हैं। इसके चलते हर साल पीपा का पुल बनाने में पीपे कम पड़ जाते हैं। पिछले वर्ष छह पीपे भटौली घाट मिर्जापुर से मंगाया गया था। बावजूद इसके कमी पड़ जाने के कारण बालू की बोरी आदि लगाकर किसी तरह पुल तैयार किया गया था। पुल जब टूटा तो भटौली घाट के लोग अपने पीपे उठा ले गए। इस बार गंगा का पाट अधिक होने के कारण अधिक पीपे की आवश्यकता पड़ेगी, लेकिन रामपुर घाट पर पीपे की संख्या काफी कम है। क्षतिग्रस्त पीपे की मरम्मत, रंगाई आदि आज तक विभाग के द्वारा कभी नहीं कराई गई। पीपे की कमी के कारण पिछले वर्ष पीपा पुल छह माह देर से चालू हुआ था। इस बार इससे अधिक देरी होने की आशंका है।

इनसेट
हर विजयादशमी को शुरू होता है निर्माण
प्रत्येक वर्ष विजयादशमी के मौके पर पूजन अर्चन कर पीपा पुल के निर्माण का कार्य शुरू किया जाता है और पुल पर आवागमन कार्तिक पूर्णिमा को चालू कर दिया जाता है। नियमानुसार पीपा पुल का संचालन पूरे आठ महीने होना चाहिए, लेकिन पुल का संचालन एक वर्ष में बमुश्किल चार महीने ही हो पाता है। रामपुर घाट पर पीपा पुल की लंबाई तीन साल से घट रही है। अगल-बगल के जनपदों से पीपा उधार लेकर काम चलाया जा रहा है। पुल निर्माण के लिए बिछाई जाने वाली लकड़ियां भी पूरी तरह से नष्ट हो चुकी हैं। साथ ही बैरिकेंडिंग के तार भी खराब हो चुके हैं। पुल की देखरेख और मरम्मत आदि के लिए लोक निर्माण विभाग के 14 कर्मचारी लगाए गए हैं, लेकिन यहां कोई कार्य नहीं हो पाता है। पुल से गैपुरा, मांडा, लालगंज, छानबे क्षेत्र के लोगों का आवागमन रोजाना होता है। मध्य प्रदेश जाने के लिए भी यह पुल काफी कारगर साबित होता है। पुल चालू न रहने पर लोगों को मिर्जापुर से मध्य प्रदेश जाना पड़ता है। हर वर्ष ठेका लेकर पीपा पुल का निर्माण कराने वाले अखिलेश सिंह का कहना है कि पुल बनाने के काफी सामान घट गए हैं। अगर सामान समय पर नहीं मिले तो पुल तैयार होने में देरी होगी।
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