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24 साल में पूरी नहीं हुई गांव की चकबंदी

Basti

Updated Sat, 25 Jan 2014 05:46 AM IST
बस्ती। ग्राम रामपुर रेवटी के काश्तकारों की तरह ग्राम साहूपार उर्फ कोहरसा के काश्तकार भी थकाऊ चकबंदी प्रक्रिया से तंग आकर तहसील दिवस में डीएम से मिलकर गांव की चकबंदी को निरस्त करने और नए सिरे से चकबंदी कराने की मांग की है। डीएम ने एसओसी को कार्रवाई का निर्देश दिया है। इस गांव में पिछले 24 साल से चकबंदी चल रही है।
चकबंदी अधिकारी कार्यालय पिपरागौतम के तहत आने वाले ग्राम साहूपार उर्फ कोहरसा में चकबंदी का बिगुल जनवरी वर्ष 1990 में बजा था। गांव में चकबंदी का ऐलान होते ही गांव के काश्तकारों ने इस बात की खुशी जताई थी कि चलो अब तो उनके खेतों का विवाद समाप्त हो जाएगा। सबसे अधिक खुशी उन काश्तकारों ने जताई थी जिनके खेत कई टुकड़ों में इधर-ऊधर बिखरे हुए थे। उनके खेत अब एक स्थान पर हो जाएंगे, जिससे खेती का कार्य करने में आसानी होगी और लागत भी कम आएगी। काश्तकारों की खुशी और उम्मीदें उस समय खत्म होने लगीं जब 24 सालों में भी काश्तकारों की मंशा पूरी नहीं हुई। मंगलवार को तहसील दिवस में गांव के पुरुषोत्तम उपाध्याय, अवधेश प्रसाद, घनश्याम उपाध्याय, उमेशचंद्र, रामउजागिर शिवचंद्र, हरीशचंद्र, वशिष्ठ, दीनानाथ, रवींद्रनाथ, मनोज कुमार, महेंद्र, संजय, राकेश सहित अन्य काश्तकारों ने डीएम अनिल कुमार दमेले से मिलकर उन्हें बताया कि वर्ष 1990 में जब गांव की चकबंदी शुरू हुई तो मालियत लगाकर काश्तकारों को फार्म पांच दे दिया गया था। उसके बाद चकबंदी प्रक्रिया न जाने किस कारण से वर्ष 2013 तक रुकी रही। इसके बारे में चकबंदी वालों ने गांव के लोगों को भी कुछ नहीं बताया। उसके बाद अचानक गांव में एसीओ, कानूनगो और लेखपाल आए और वर्ष 1990 के आधार पर चकबंदी प्रक्रिया शुरू कर दी। गांव वालों ने बताया कि चकबंदी प्रक्रिया शुरू हुए 24 साल हो गए। इस बीच कई परिवर्तन हो चुके हैं। उत्तराधिकारी बदल गए हैं, वारिश तक जीवित नहीं रहे। यहां तक कि चकबंदी कमेटी के सदस्य भी नहीं रहे। काश्तकारों के पास उस समय का कोई कागजात भी नहीं है। कई ऐसे काश्तकार हैं, जो जीवित ही नहीं हैं। गांव वालों ने डीएम से गांव की चकबंदी को वर्तमान समय की मालियत लगाकर उत्तराधिकारी अंकित कर नया फार्म पांच वितरित कराकर चकबंदी कराने की मांग की है। गांव वालों ने चकबंदी पूरी न होने और विवाद होने के लिए चकबंदी वालों को जिम्मेदार ठहराया।
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चकबंदी वाले ही नहीं चाहते शीघ्र पूरी हो चकबंदी
अभी एक दिन पहले चकबंदी अधिकारी मुंडेरवा के तहत आने वाले ग्राम रामपुर रेवटी की 23 साल पुरानी चकबंदी को काश्तकारों की शिकायत पर चकबंदी आयुक्त ने गांव की चकबंदी को ही निरस्त कर दी। जिले में अभी 12 ऐसे गांव हैं, जहां पर 20 साल से चकबंदी चल रही है। यहां के काश्तकार अनेक बार चकबंदी को पूरा कराने के लिए शासन और प्रशासन को खत लिख चुके हैं। काश्तकारों की मानें तो चकबंदी वाले ही नहीं चाहते कि किसी गांव की चकबंदी जल्दी समाप्त हो। यहां तक कि मुकदमों तक का निस्तारण कराने में चकबंदी अधिकारी कोई रुचि नहीं ले रहे हैं।

गांव वाले नहीं कर रहे सहयोग: एसओसी
वहीं एसओसी एसके शुक्ल कहते हैं कि जब तक गांव वाले चकबंदी प्रक्रिया में सहयोग नहीं करेंगे तब तक गांव की चकबंदी बाधित रहेगी। कहते हैं कि विवादों को हल करने में काश्तकार ही सहयोग नहीं करते। वैसे भी चकबंदी आयुक्त ने 10 साल पुरानी चकबंदी को निरस्त करने का प्रस्ताव देने का आदेश दे रखा है।
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