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तीन दुश्मनों को ढेर कर शहीद हो गए थे सत्यवान

Basti

Updated Mon, 17 Dec 2012 05:30 AM IST
बस्ती। देश की आन-बान की रक्षा में सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले रणबांकुरों का जिक्र आने पर बस्ती (जिले) का सीना यूं ही नहीं चौड़ा हो जाता। वीर चक्र प्राप्त शहीद सत्यवान सिंह, शौर्य चक्र प्राप्त शहीद अमर यादव, शहीद हनुमान सरीखे यहां के एक दर्जन ‘लाल’ दुश्मनों की मांद में घुसकर उन्हें उनकी असली औकात बता चुके है। आज भी जिले के पांच हजार से अधिक जवान किसी न किसी रूप में अमन को सुरक्षा की गारंटी देने में लगे हैं।
1971 के भारत-पाक युद्ध की बात करें तो पांच दिसंबर (1971) को पाकिस्तान बार्डर पर राजपूत रेजीमेंट के जांबाज सिपाही शहीद सत्यवान सिंह तीन दुश्मनों को ढेर करने के बाद शहीद हो गए थे। रविवार को उस युद्ध में शहीद जवानों की याद में विजय दिवस मनाया गया। घोरांग संतकबीरनगर (तब का बस्ती जिला) निवासी सत्यवान सिंह के परिवार को ऐसी सभी सुविधाएं हासिल हैं, जो शहीद परिवार को मिलनी चाहिए। बहन चंदन सिंह शहीद सत्यवान गैस सेवा के नाम से एजेंसी चलाती हैं। कोटे की दुकान इनके परिवार के नाम पर आवंटित है। जमीन भी आवंटित किया गया है। मंडलीय स्टेडियम का नामकरण भी शहीद सत्यवान सिंह के नाम पर है। इसके अलावा सोल्जर बोर्ड कार्यालय में उनके नाम से हाल बनाया गया है।

सत्यवान ने मुझे सबकुछ दिया
कलावती देवी शहीद सत्यवान सिंह की मां हैं। जैसे ही पूछा गया कि उनकी मां होना उनके लिए कितने गौरव की बात है तो भावविभोर होकर बोलीं, मुझे मेरे लाल पर घमंड है। वे कहती हैं कि मेरे बेटे ने मुझे वह सब कुछ दिया है जो जिंदा रहते शायद न दे पाता। एक मां अपने बेटे से इससे अधिक की उम्मीद नहीं कर सकती। न ही कोई बेटा इससे ज्यादा कुछ दे सकता है।

अपने बेटों को फौजी बनाएंगी बहन
शहीद सत्यवान सिंह की बहन किरन सिंह कहती हैं कि उन्हें गर्व है कि स्वर्गीय सत्यवान सिंह उनके भाई थे। उनकी वजह से ही हर जगह उनको विशिष्ट दर्जा मिलता है। बहन का कहना है उनके दो बेटे अभय (15) और दिव्यांशु (08) को भी फौज में भेजना चाहेंगी। उनका मानना है कि इंडियन आर्मी ने एक भाई लिया है तो हजारों भाई दे दिया है।

मेरे भाई जैसे लगते हैं सभी फौजी
दूसरी बहन चंदन सिंह गोंडा में उन्हीं के नाम से गैस एजेंसी चलाती हैं। वे कहती हैं कि इंडियन आर्मी अपना परिवार और सभी फौजी अपने भाई जैसे लगते हैं। कहती हैं कि टेलीविजन पर कार्यक्रम के दौरान बार्डर का दृश्य देखकर दिल करता है कि वहां जाकर तोप-गोले छू लूं। देश की सीमा पर भारतीय सेना को देखकर मन रोमांचित हो जाता है।
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