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सिरदर्द और प्रदूषण बढ़ा रहे जेनरेटर

Basti

Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
बस्ती। डीजल से चलने वाले जेनरेटर बिना केनोपी के नहीं चलाए जा सकते। बावजूद इसके शहर में बिना केनोपी वाले जेनरेटर का धंधा खुलेआम चल रहा है। सुप्रीम कोर्ट की हिदायत की अनदेखी करके खुलेआम ऐसे जेनरेटर की बिक्री भी हो रही है। यही वजह है कि शहर में ध्वनि प्रदूषण का स्तर दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण अधिनियम-1996 के मुताबिक डीजल इंजन में केनोपी लगाकर ही जेनरेटर बेचा जा सकता है। यहां तक कि निर्माताओं को पाबंदी है कि बिना केनोपी लगाए कारखाने से जेनरेटर न बाहर जाने दें। मगर यहां कोई पाबंदी मानने को तैयार नहीं है। यहां तक कि आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र के लिए ध्वनि प्रदूषण के अलग-अलग मानक हैं। उस पर भी किसी को गौर करने की फुरसत नहीं है। नतीजा आंख मूंदकर उपभोक्ता और डीलर अपनी मनमानी करते जा रहे हैं। 65 डेसिबल या उससे अधिक शोर अस्थाई रूप से बहरा बना सकता है। ईएनटी डाक्टर राम केवल के मुताबिक तेज आवाज से परदे पर जबरदस्त दबाव बनता है। इससे आउट ईयर ड्रम में छेद हो जाता है।

मानक से ज्यादा शोर करते हैं
प्रदूषण नियंत्रण विभाग के वैज्ञानिक सहायक अनंत कुमार बताते हैं कि बिना कैनोपी वाला जेनरेटर 80 डेसिबल से ज्यादा शोर करता है, जो ध्वनि मानक से कहीं ज्यादा है। यही वजह है कि शहर की तकरीबन सभी सड़कों या गलियों में शोर कहते हैं। जहां शिकायत मिलती है वहां नियमानुसार कार्रवाई की जाती है। पर यह पूछने पर कि क्या जेनरेटर को लेकर कोई कार्रवाई हुई तो वह जवाब नहीं दे सके।

पार्ट बिलिंग करके धूल झोंक रहे
चूंकि बिना केनोपी का जेनरेटर महंगा है। जबकि बिना केनोपी के जेनरेटर का दाम तीस फीसदी तक कम है। ऐसे में ग्राहक भी बिना केनोपी का ही जेनरेटर खरीदना चाहता है। डीलर कार्रवाई से बचने के लिए पार्ट बिलिंग करते हैं। एक डीलर ने बताया कि इंजन और अल्टीनेटर का अलग-अलग रसीद बनाते हैं। ताकि यह साबित कर सकें कि वे जेनरेटर नहीं, बल्कि उसके पार्ट्स बेचते हैं। एक अन्य डीलर वंशराज बताते हैं कि उन्हें मालूम है कि गुनाह कर रहे हैं, लेकिन रोजी-रोटी के लिए इतना रिस्क लेना पड़ता है।

ध्वनि मानक स्तर
व्यावसायिक क्षेत्र में 65 डेसिबल। आवासीय क्षेत्र में 55 डेसिबल दिन में, 45 डेसिबल रात में। शांत क्षेत्र (अस्पताल, स्कूल, और मिलिट्री कैंट आदि) में 50 डेसिबल दिन में, 40 डेसिबल रात में।


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