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खराब व्यवस्था का शिकार बना कूड़ा-कचरा प्रबंधन

Basti

Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
बस्ती। कूड़ा-कचरा प्रबंधन के लिए लगभग सात करोड़ रुपये की लागत से बनी सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना खटाई में पड़ती नजर आ रही है। योजना पिछले एक साल से अधिक समय से लटकी पड़ी है। खराब व्यवस्था का हवाला देकर कार्यदाई संस्था ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। नियुक्ति आपरेटर ने तो कार्य करने से ही मना कर दिया है। नगरपालिका अभी तक प्रदूषण बोर्ड से एनओसी तक नहीं ले सकी है। जबकि प्रशासन नि:शुल्क जमीन देने को तैयार है।
बता दें कि नगरपालिका क्षेत्र से निकलने वाले ठोस अपशिष्ट के निस्तारण के लिए सरकार ने एक साल पहले सालिड वेस्ट मैनेजमेंट योजना की हरी झंडी दी थी। इस योजना के लिए लगभग सात एकड़ नि:शुल्क जमीन उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन से कहा गया। जमीन गनेशपुर के ग्राम कोईलपुरा में चिह्नित की गई। उ.प्र. प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वैज्ञानिक सहायक अरुण कुमार श्रीवास्तव, नगरपालिका के सहायक अभियंता बीसी पटेल और नायब तहसीलदार सुभाष सिंह की टीम ने चिह्नित स्थल का निरीक्षण किया। टीम ने पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन कराने का सुझाव दिया। तभी से मामला लटका पड़ा है। पालिका की मानें तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड वाले एनओसी देने में आनाकानी कर रहे हैं। उधर, बोर्ड पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन न कराने का रोना रहा है। कार्यदाई संस्था सीएंडडीएस जमीन उपलब्ध न कराने का ठीकरा पालिका प्रशासन पर अलग से फोड़ रही है। संस्था के परियोजना प्रबंधक रवींद्र नाथ कहते हैं कि चिह्नित जमीन का सीमांकन नहीं हो पा रहा है। पालिका को जमीन की पैमाइश कराने के लिए कई बार लिखा गया। मगर अभी तक पैमाइश नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि पूर्व में नियुक्त आपरेटर को जमीन न मिलने के कारण उससे अनुबंध की कार्रवाई नहीं हो सकी। इसके चलते अब आपरेटर ने कार्य करने से ही मना कर दिया है। इसकी जानकारी लिखित में पालिका के ईओ को दे दी गई है।

एनओसी के बाद मिलेगी जमीन: सीआरओ
नगरपालिका के अधिशासी अधिकारी डा. आरपी श्रीवास्तव कहते हैं कि चार दिन पहले जमीन की पेमाइश करा दी गई है। जमीन का सीमांकन कराकर पिलर भी लगवा दिए गए हैं। बताया कि आवश्यकता से अधिक जमीन दी गई है। अब प्रदूषण बोर्ड से एनओसी लेना बाकी है। वहीं सीआरओ देवीदास कहते हैं कि जब तक एनओसी नहीं मिल जाती तब तक जमीन योजना के नाम नहीं की जा सकती है।
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