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घोटाले की सूई बैंक और एमआई पर टिकी

Basti

Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
बस्ती। सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ गेहूं खरीद केंद्र पर हुए करोड़ों रुपए के गोलमाल की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, बेईमानों की कलई खुलती जा रही है। प्रथम दृष्ट्या घोटाले की सूई केंद्र प्रभारी और स्थानीय बैंक के लोगों पर टिक गई है। बैंक की संलिप्तता का पता इससे भी चलता है कि जो चेक बुक नोयडा से जारी होना चाहिए, उसे बैंक ने अपने स्तर से जारी कर दिया। इसी सीरीज के चेक बुक से फर्जी भुगतान हुआ। आरएफसी भी इसके लिए बैंक सहित दोनों केंद्र प्रभारियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कहते हैं कि रिपोर्ट आने पर बैंक और केंद्र प्रभारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
बता दें कि वर्ष 2012-13 में खाद्य विभाग के शोहरतगढ़ क्रय केंद्र पर 20771 कुंटल गेहूं की खरीद हुई। विभाग ने 2.66 करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया। फर्जी खरीद का खुलासा तब हुआ, जब कुछ किसान जिला खाद्य विपणन अधिकारी कमलेश पांडेय के पास यह शिकायत लेकर पहुंचे की केंद्र प्रभारी का दिया चेक बैंक ने खाते में धन न होने की बात कह वापस कर दिया। डिप्टी आरएमओ की जांच में पता चला कि फर्जी किसानों के नाम पर लाखों रुपये का भुगतान हो गया है। यहां तक कि बैंक ने फर्जी हस्ताक्षर और एकल हस्ताक्षर वाले चेक पर लाखों रुपये का भुगतान भी कर दिया। जबकि चेक पर दो एमआई के हस्ताक्षर जरूरी हैं। एसएमआई अवधेश वर्मा की मानें तो विभाग ने अधिकृत तौर पर गेहूं खरीद की जिम्मेदारी एमआई सौरभ चौधरी को दी है। चेक बुक भी सौरभ अपने पास ही रखते थे। कहा कि अगर एसबीआई ने अपने स्तर से चेक बुक जारी की होती तो गोलमाल नहीं होता।
क्रय पंजिका में छुपा है घोटाले का राज
जांच टीम के मुखिया विनोद कुमार का कहना है कि खरीद केंद्रों पर जो क्रय पंजिका रहती है उससे यह पता चलता है कि किस किसानों से खरीद की गई और किस चेक नंबर से भुगतान हुआ। बताया कि जो क्रय पंजिका केंद्र प्रभारी ने दी है उस पर दोनों प्रभारियों के संयुक्त हस्ताक्षर है। अब टीम बैंक से मिले भुगतान स्टेटमेंट और क्रय पंजिका से मिलान कर रही है। बताया कि जो पचास चेक बैंक से मिले हैं, उन सभी पर केंद्र प्रभारी सौरभ चौधरी के हस्ताक्षर हैं। इससे पता चलता है कि बैंक ने भुगतान में अनियमितता बरती है।
कौन करेगा किसानों का भुगतान
खाद्य विभाग के सामने सबसे बड़ी यह समस्या यह है कि जब एक बार गेहूं का भुगतान सरकार ने कर दिया है तो तो उसी गेहूं का दोबारा भुगतान कैसे किया जाएगा। आरएफसी और संभागीय लेखाधिकारी कहते हैं कि केंद्र प्रभारी से धन की रिकवरी करके भुगतान कराया जाएगा।
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