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सीएचसी है या पीएचसी, यही तय नहीं

Basti

Updated Thu, 01 Nov 2012 12:00 PM IST
गौर। साल भर पहले लगभग चार करोड़ की लागत से बने सीएचसी भवन में इलाज केवल कागजों में ही चल रहा है। ताज्जुब की बात यह है कि अब तक यही नहीं तय हो सका है कि गौर स्वास्थ्य केंद्र सीएचसी है या पीएचसी। अधिकारी कहते हैं कि सीएचसी है पर अस्पताल के प्रभारी अधिकारी इसे पीएचसी ही मानते हैं। हालांकि आम लोग कहते हैं कि सीएचसी हो या पीएचसी, यहां हमारा इलाज होना चाहिए।
अस्पताल में स्टाफ और संसाधनों की कमी के चलते लोग सुविधा पाने से वंचित हैं। इससे चार एडिशनल हेल्थ पोस्ट भी जुड़े हैं। बावजूद इसके अस्पताल में सुविधाएं नदारद हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी) के रूप में 1957 में इसकी स्थापना हुई थी। 55 साल बाद भी अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। लंबे समय के बाद इस स्वास्थ्य केंद्र को वर्ष 2008 सीएचसी का दर्जा भी मिल गया। भवन बनकर भी तैयार हो गया। लेकिन स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में यह बेकार साबित हो रहा है। चिकित्साधिकारी डा. उवैद उल्लाह खां के पास यहां का प्रभार है। दो दिन पहले एक और चिकित्सक डॉ. कुमार अखिलेश की तैनाती हुई है। जबकि महिला डॉ. विनीता यादव यहां संविदा पर हैं। नेत्र चिकित्सक डॉ. हरिश्चंद्र यादव, बीएचएमएस डॉ. रामप्रकाश, फार्मासिस्ट सुशील श्रीवास्तव और आरआर शुक्ला यहां हैं। वहीं दो वार्ड ब्वाय, एलटी, एक एचईओ, एक एआरओ, तीन एचवी, दो बीएचडब्ल्यू तैनात हैं। इसके साथ 30 एएनएम भी कार्यरत हैं। इससे जुड़े 26 उपकेंद्र हैं। केंद्रों पर दो क्लर्क हैं। इस सब के बावजूद एंबुलेंस की सुविधा नहीं है। ऐसी दशा में गंभीर मरीजों को जिला चिकित्सालय पहुंचाने में दिक्कतों से जूझना पड़ता है। ओपीडी में मरीज तो देखे जाते हैं लेकिन भर्ती करने लिए उन्हें दूसरी जगह रेफर कर दिया जाता है। 10 बेड के अस्पताल में छह बेड जननी सुरक्षा कक्ष में हैं। बाकी के चार बेड पर मरीजों का उपचार होता है।
बेमतलब साबित हो रहा अस्पताल
क्षेत्र के लोगों की मानें तो पीएचसी उनके लिए सुविधा के बजाए बेमतलब साबित हो रहा है। क्षेत्र के गौर बाजार निवासी सत्येंद्र सिंह, रामसागर यादव, विजय कसौधन, जयप्रकाश पांडेय, मनोज कुमार का कहना है कि अस्पताल में बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं। ऐसे में हमारे लिए इसका कोई मतलब नहीं है। जबकि अस्पताल पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लिखा गया है। मगर सुविधा कुछ नहीं है। यदि यहां सीएचसी की सुविधा मिले तो मरीजों की सभी स्वास्थ्य संबंधी जांच के साथ एक एंबुलेंस व 26 बेड वाला अस्पताल मिल जाएगा। मगर सुविधा न होने के कारण मरीजों को लेकर जिला अस्पताल जाना पड़ रहा है। 6.33 लाख की लागत से जननी सुरक्षा वार्ड तो बना है। मगर सुविधाओं का मोहताज वो भी है।
अभी पीएचसी ही है अस्पताल
केंद्र पर तैनात प्रभारी डा. उवैद उल्लाह का कहना है कि जननी सुरक्षा वार्ड को अभी पूर्व डॉक्टर से हैंडओवर नहीं किया गया है। अभी मुझे एक माह से तैनाती मिली है। जल्द ही हैंडओवर कर लिया जाएगा। रही बात एंबुलेंस की तो इसके लिए पिछले डॉक्टर ने सीएमओ को अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि अभी यह अस्पताल पीएचसी ही है। क्योंकि कागज में पीएचसी ही लिखा जा रहा है। यदि सीएचसी हो जाएगा तो यहां मरीजों को जिले स्तर की सुविधा मिलने लगेगी।
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