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मिट्टी के हिसाब से किसान तलाश रहे आलू बीज

Basti

Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। महंगाई का मुंहतोड़ जवाब देने के लिए किसानों ने कमर कस ली है। आलू की बुआई के लिए वे ऐसे बीज की तलाश कर रहे हैं, जिससे अच्छी से अच्छी पैदावार हो सके। इसके लिए मिट्टी के हिसाब से सही प्रजाति के बीज को तवज्जो मिल रही है। इस सीजन में आलू किसान बीज को लेकर काफी सावधानी बरत रहे हैं। आम तौर पर किसान कोल्ड स्टोर में रखे आलू ही बुआई में इस्तेमाल करते हैं। कुछ प्रगतिशील किसानों की पहल के बाद इस साल अच्छे बीज के चुनाव का चलन बढ़ा है। देखा जा रहा है कि छोटे-बड़े सभी जोत के किसान बीज का चुनाव काफी संजीदगी से कर रहे हैं।
जिले के 10 फीसदी से अधिक क्षेत्रफल में आलू की खेती की जाती है। हालांकि जबरदस्त पैदावार के बावजूद इन दिनों आलू 20 रुपये किलो तक बिक रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह है किसानों में जागरूकता की कमी। किसान अपनी उपज को अधिक समय तक नहीं रख पाते। या तो उन्हें औने-पौने दाम पर बेचना पड़ता है या कोल्ड स्टोर में जमा कर देना पड़ता है। विडंबना यह है कि जब तक किसान के पास आलू रहता है तब तक उसका भाव काफी नीचे रहता है। पर जैसे ही उसके हाथ से आलू की बोरी निकली, उसका भाव सातवें आसमान पर पहुंच गया।

मिट्टी बदलकर बोते हैं आलू के बीज (इंडेंट फोटो)
बेलाड़ी जय प्रकाश मिश्र आलू के अच्छे काश्तकार हैं। उनके मुताबिक, उन्हें अच्छे बीज की खासियत पता है। ऐसा करके वे देख चुके हैं। इसलिए उनकी कोशिश रहती है कि हर साल मिट्टी बदलकर बीज की प्रजाति का इस्तेमाल किया जाए। अगर संभव नहीं होता तो दूसरे गांव के किसानों से बीज बदल देते हैं।
नगर क्षेत्र के राम देव मिश्र का कहना है कि अच्छे बीज न हों तो आलू की बढ़त नहीं होती। इसके अलावा बीमारियां भी लग जाती हैं। इनका कहना है कि वे एक एकड़ में आलू की खेती करते हैं। कई बार अपना ही बीज बो दिया। मगर उस साल पैदावार आधी हो गई। तब से आलू की बुआई करते समय बीज की उपजाऊ प्रजाति का चुनाव करते हैं।
अठदमा निवासी गिरधारी लाल का कहना है कि वे तीन एकड़ में आलू की खेती करते हैं। मगर हर बार बाजार से नया बीज लाते हैं। इस बार उद्यान विभाग से फाउंडेशन बीज ले आए हैं। बताया गया है कि इस बीज में रोग कम लगते हैं और बढ़त अच्छी होती है। उनका कहना है कि आलू की पैदावार बीज की प्रजाति पर निर्भर करता है।

वैज्ञानिकों की नजर में आलू की अच्छी किस्में
कृषि वैज्ञानिक डाक्टर एचएन पांडेय के मुताबिक, केंद्रीय आलू अनुसंधान संस्थान की विकसित प्रजाति कुफरी सूर्या, कुफरी चंद्रमुखी, कुफरी अशोका की बुआई की जा सकती है। इसके अलावा कुफरी चंद्रमुखी ए-2708, कुफरी बहार, कुफरी बादशाह, कुफरी सिंदूरी की बुआई अच्छी पैदावार देती है। एंटी आक्सीडेंट की मात्रा अधिक होने के कारण स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह प्रजाति बेहतर है।

बुआई से पहले खेत का चयन और तैयारी पर दें ध्यान
आलू की खेती के लिए जल निकास वाली समतल और उर्वर बलुई दोमट मिट्टी सर्वोत्तम होती है। खेत को 2-3 बार जुताई के बाद छोड़ दें। आलू की अच्छी पैदावार के लिए खेत का पलेवा करना जरूरी है। इसके बाद सामान्यत: 180 किलोग्राम नाइट्रोजन, 80 किलोग्राम फास्फोरस व 100 किलोग्राम पोटाश की आवश्यकता होती है। अगर मिट्टी में जस्ता, लोहा जैसे सूक्ष्म तत्वों की कमी हो तो 25 किलोग्राम जिंक एवं 50 किलोग्राम फेरस सल्फेट (सभी आंकडे़ प्रति हेक्टेयर) की दर से बुआई के पहले खेत में डालें।

किस बीज का करें चुनाव
आलू का बीज रोग रहित, शुद्ध होना चाहिए। कम से कम 40-50 ग्राम वजन वाले अंकुरित आलू का बीज चुनना चाहिए। सामान्यतया एक हेक्टेयर की बुआई के लिए 30-35 कुंटल कंद वाले बीज की जरूरत होती है।

कैसे करें आलू की बुआई
पंक्ति से पंक्ति की दूरी 60 सेंटी मीटर और कंद से कंद की दूरी आलू के आकार के हिसाब से समायोजित किया जाना चाहिए। 20,30,40 व 60 ग्राम आकार वाले बीज कंदों को 15,20,30 व 40 सेंटीमीटर की दूरी पर रखना बेहतर होता है।
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