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गोदामों पर नहीं पहुंचे 35 हजार कुंटल अनाज

Basti

Updated Sun, 28 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। परिवहन ठेकेदारों की लापरवाही से नवंबर में भी हजारों गरीबों को अनाज से वंचित होना पड़ सकता है। ठेकेदारों ने अब तक 35 हजार कुंटल से अधिक गेहूं और चावल गोदामों पर पहुंचाया ही नहीं। डिप्टी आरएमओ की रिपोर्ट पर आरएफसी ने ठेकेदारों को चेतावनी जारी की है।
बता दें कि एफसीआई के गोदामों से खाद्य विभाग के गोदामों तक पीडीएस का अनाज पहुंचाने के लिए विभाग ने पांच परिवहन ठेकेदारों का अनुबंध कर रखा है। अनुबंधित ठेकेदारों को 22 तारीख तक हर हाल में आवंटित अनाज गोदामों तक पहुंचाना रहता है। जो अनाज समय से नहीं उठ पाता वह लैप्स हो जाता है। यानी कार्डधारकों को उस महीने का अनाज नहीं मिलेगा। डीएसओ की मानें तो ठेकेदार पिछले कई महीनों से समय के भीतर गोदामों पर अनाज नहीं पहुंचा रहे हैं। बताया कि अनाज पहुंचाने की जिम्मेदारी खाद्य विभाग की है।
ट्रकों की संख्या बढ़ाने का निर्देश : आरएफसी
जिले के 13 खाद्य विभाग के गोदामों पर नवंबर के लिए 105700 कुंटल गेहूं और चावल पहुंचना था। डिप्टी आरएमओ के रिपोर्ट के मुताबिक 19 अक्टूबर तक ठेकेदारों ने 70660 कुंटल ही अनाज पहुंचाया। जिसमें 2180 कुंटल अंत्योदय चावल, 23030 कुंटल बीपीएल चावल, 4920 कुंटल एपीएल नियमित गेहूं और 4900 कुंटल एपीएल अतिरिक्त गेहूं नहीं पहुंचा। आरएफसी एके सिंह ने बताया कि ठेकेदारों को नोटिस जारी किया गया है। अधिक से अधिक ट्रक लगाकर शत-प्रतिशत अनाज पहुंचाने के निर्देश दिए गए है। ठेकेदारों का कहना है कि एफसीआई के पास चावल ही नहीं है।

इन ठेकेदारों की बनती है जिम्मेदारी
जिन परिवहन ठेकेदारों को गोदामों तक अनाज पहुंचाने की जिम्मेदारी दी गई है, उनमें संगम ट्रांसपोर्ट को रूधौली, रामनगर व सल्टौआ। संगम कंस्ट्रक्शन कंपनी को बहादुरपुर व कप्तानगंज। रामप्रकाश चौधरी को विक्रमजोत, परशुरामपुर, बभनान व बस्ती केंद्र। मंजू देवी को हर्रैया व बनकटी और शशिकांत पांडेय को साऊंघाट व कुदरहा के गोदामों तक अनाज पहुंचाना है।

कार्रवाई नहीं कर रहा विभाग
विभाग के अफसरों पर आरोप है कि गरीबों को उनके हक से वंचित करने वाले ठेकेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई नहीं करता। नोटिस देने तक की ही कार्रवाई की जाती है, जबकि अनुबंध के मुताबिक दोषी ठेकेदारों को ब्लैक लिस्ट करने का प्रावधान है। विभाग का ठेकेदारों के प्रति नरम रुख रखना चर्चा का विषय बना हुआ है।
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