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बिजली की कटौती से लोगों की सांसत

Basti

Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
बस्ती। अनियमित बिजली आपूर्ति शेड्यूल से लोगों की दिनचर्या प्रभावित है। जिले में 105 मेगावाट बिजली की जरूरत है। इसके बदले आधी बिजली मिल रही है। घरेलू कामकाज हो या कारोबार, बिजली बिना सब कुछ अस्त व्यस्त है। रात में सोते समय अचानक बिजली कटने से लोगों की नींद उचट जा रही है। शहरी क्षेत्र में 70 और हर्रैया में 35 मेगावाट की बिजली खपत है। जबकि शासन की ओर से निर्धारित अवधि तक भी बिजली लोगों को नहीं मिल रही है। पिछले 24 घंटे में गांवों को पांच घंटे और शहरी इलाके में 12 घंटे बिजली मिली। आवास-विकास कालोनी के मनीष श्रीवास्तव, अशोक सिंह, रामसिंह, अरुणेश श्रीवास्तव का कहना है बुधवार को कटौती के बाद शाम पांच बजे बिजली आई। सात बजे के करीब कट गई। नौ बजे रात में दो घंटे के लिए आई तो 11 बजे से इमरजेंसी कटौती के नाम पर एक बजे तक कटी रही। सुबह फिर चार बजे बिजली चली गई। सात बजे आपूर्ति मिली। इसके बाद रोजाना की तरह 11 बजे कटौती हो गई। कप्तानगंज विकास खंड के पगार गांव निवासी केशव प्रसाद मिश्र, तिनियहवा निवासी पारसनाथ चौधरी, कच्चीपुर के सियाराम चौधरी और कस्बा निवासी आशुतोष श्रीवास्तव, हरिराम, यज्ञप्रसाद का कहना है बुधवार को अपराह्न 4.30 बजे बिजली कटी तो फिर गुरुवार पूर्वाह्न 11.30 बजे ही आई। पांच घंटे बाद 4.30 बजे दोबारा गुल हो गई तो देर शाम तक नहीं आई।
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जेनरेटर का शोर बना रहा है बहरा
जेनरेटर का शोर लोगों की सुनने की शक्ति को कम कर रहा है। शहर के नाक, कान गला रोग विशेषज्ञ डॉक्टर रामेंद्र चतुर्वेदी का कहना है स्वस्थ आदमी के लिए आठ घंटे नींद जरूरी है। नींद पूरी न होने से व्यक्ति की शारीरिक और मानसिक क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। इससे उनमें चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी देखने को मिल रही है। जेनरेटर के शोर से सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। 80 डेसीबल से अधिक के शोर में रहने से कान की कोशिकाएं धीरे-धीरे मृतप्राय: हो जाती हैं। वह कहते हैं प्रतिदिन करीब उनके पास 15-20 मरीज ऐसे आते हैं, जो शोर के कारण श्रवण बाधित समस्या से पीड़ित होते हैं।
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क्या है बिजली का शेड्यूल
शहरी क्षेत्र में दिन में 12-4 और रात में दो घंटे की इमरजेंसी कटौती की जाती है, जबकि गांवाें में रात 12 बजे से आठ बजे सुबह तक आपूर्ति दी जा रही है। आठ से दस बजे तक कटौती करने के बाद फिर दस से शाम छह बजे तक बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। इसके अलावा दो घंटे की इमरजेंसी कटौती होती है। इस लिहाज से शहरी क्षेत्र में छह घंटे की कटौती और 18 घंटे आपूर्ति और गांवों में 16 घंटे आपूर्ति मिलनी चाहिए। लेकिन स्थिति इसके उलट है। शहर में बमुश्किल 10-12 और गांवों में 6-8 घंटे ही बिजली मिल रही है। इसे विभागीय अधिकारी भी स्वीकार करते हैं। अधिशासी अभियंता द्वितीय वीके मिश्र का कहना है इधर कुछ दिनों से मांग के अनुसार बिजली आपूर्ति न मिलने से गांवों में महज 6-8 घंटे बिजली की आपूर्ति हो रही है।
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कारोबार पर पड़ रहा विपरीत प्रभाव
शहर के गांधीनगर के कपड़ा व्यवसायी प्रहलाद मोदी का कहना है दिन में 11-4 बजे तक बिजली की कटौती की जा रही है। लोकल फाल्ट ने स्थिति को और भी बदतर बना दिया है। कटेश्वर पार्क के निकट फोटो कापी की दुकान चलाने वाले मोहम्मद फरीद का कहना है कारोबार के समय बिजली नदारद रहती है। वेल्डिंग कारोबारी मैनुद्दीन कहते हैं उनका पावर कनेक्शन है। बिजली न होने से समय पर काम पूरा न कर देने पर ग्राहकों की खरी-खोटी भी सुननी पड़ती है। जीआईसी के सामने साइबर कैफे का व्यवसाय कर रहे मोहम्मद शाहिद का कहना है दुकान खुलने के कुछ देर बाद ही बिजली गुल हो जाती है। अनियमित बिजली आपूर्ति का खामियाजा रोडवेज के समीप रहने वाले तसब्बुर हुसैन को भी भुगतना पड़ता है। कहते हैं घर पर कंप्यूटर होने के बावजूद बिजली न होने के कारण 15 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से कैफे में देना पड़ता है।
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किसानों के साथ हो रहा सौतेला व्यवहार
ओड़वारा। गांवों में निर्धारित रोस्टर के अनुसार आपूर्ति न मिलने से किसानों के माथे पर हमेशा चिंता की लकीर खिंची रहती है। बिजली के न रहने पर खेती का हर काम डीजल के दम पर करने से लागत बढ़ जाती है। इन दिनों मुश्किल से चार घंटे ही बिजली मिल रही है। क्षेत्रीय नागरिक रमेश दूबे, रमजान अली, धर्मेंद्र मिश्र, राजेश गुप्ता, कन्हैया लाल गुप्ता, दयाराम चौधरी, देवरिया माफी के नेबूलाल, प्रदीप, राकेश चौधरी आदि का कहना है शहर में बिजली रहती है, लेकिन गांव वालों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है। अवर अभियंता अभिषेक श्रीवास्तव का कहना है शेड्यूल के अनुसार सुबह छह बजे से शाम के छह बजे तक बिजली मिलनी चाहिए, लेकिन इन दिनों उत्पादन में गिरावट से इमरजेंसी कटौती के कारण इसका अनुपालन नहीं हो पा रहा है।
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खंड प्रथम में हैं 29 हजार से अधिक उपभोक्ता
विद्युत वितरण खंड प्रथम में अधिकांश इलाका शहरी है। इस खंड में लाइट फैन के 24 हजार, पावर के 600 और वाणिज्यिक 3500 के करीब उपभोक्ता हैं। अधिशासी अभियंता एके राय का कहना है इस खंड के गांवों में सुबह दस बजे से शाम के छह घंटे तक आपूर्ति का शेड्यूल निर्धारित है, जबकि शहरी इलाके में कटौती का समय दिन में 12-4 और शाम या रात में दो घंटे तय है। पीक टाइम में ओवरलोड के चलते लोकल फाल्ट की समस्या भी आ रही है। इस पर नियंत्रण करने का पूरा प्रयास होता है। कर्मचारियों की कमी के कारण मुश्किल पेश आती है। फिर भी किसी तरह काम चलाया जा रहा है। नई भर्ती न होने से दिनाेंदिन लाइन स्टाफ की संख्या में कमी हो रही है। इसका असर आपूर्ति बनाए रखने पर पड़ रहा है।
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