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स्कूली बच्चों से भरी नाव नदी में डूबी

Basti

Updated Fri, 28 Sep 2012 12:00 PM IST
कलवारी/गायघाट (बस्ती)। थानाक्षेत्र के रामपुर घाट पर स्कूली बच्चों से भरी नाव फिर डूब गई। नाव में सवार 50 से अधिक बच्चे नदी में डूबने लगे। तभी एक शिक्षक और अन्य लोगों ने बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। एक छात्रा अधिक पानी पी लेने से वह बेहोश हो गई थी। मगर अब उसकी हालत खतरे से बाहर बताई जा रही है। ठीक एक महीने पहले इसी घाट पर बच्चों से भरी नाव डूबी थी। उस बार भी इसी शिक्षक और नाविक ने फरिश्ते की तरह प्रकट होकर बच्चों को डूबने से बचाया था।
जानकारी के मुताबिक सदर तहसील के मनोरमा नदी के दूसरे पार स्थित डेवाडीहा, निरंजनपुर, मेहनौना, कड़सरी समेत दर्जन भर गांवों के बच्चे गायघाट पढ़ने जाते हैं। वे लोग रामपुर घाट से होकर गुजरते हैं। गुरुवार को भी करीब साढे़ आठ बजे बच्चे रामपुर घाट पर पहुंचे। वहां मौजूद शिक्षक गौरी शंकर कनौजिया के मुताबिक जैसे ही नाव पहुंची तो काफी बच्चे उस पर सवार हो गए। भीड़ काफी होने की वजह से शिक्षक समेत कई लोग नाव पर नहीं चढे़। ढोलहा घाट की ओर से नाव दूसरे पार जा रही थी। करीब सात मीटर आगे जाते ही नाव एक ही तरफ झुकते-झुकते डूबने लगी। नाव में सवार बच्चे पानी में गिरने लगे। कड़सरी निवासी कंचन नाम की एक छात्रा डूबने-उतराने लगी। तभी नदी के किनारे खडे़ शिक्षक गौरी शंकर कनौजिया, डेवाडीहा निवासी नाविक राम औतार और जनता इंटर कालेज गायघाट के अनुचर श्रीराम नदी में कूद पडे़ और एक-एक करके बच्चों को बाहर निकालने लगे। शोर सुनकर दौडे़ गांव के लोगों ने इस काम में उनकी मदद की। कुछ ही देर में सभी बच्चे सुरक्षित पानी से बाहर निकाल लिए गए। घटना की खबर मिलते ही बच्चों के परिवार के लोग भी मौके पर पहुंच गए।

इन बच्चों की बाल-बाल बची जान
कलवारी/गायघाट। रामपुर घाट पर डूबने वाली नाव में धनपति देवी बालिका इंटर कालेज गायघाट की छात्रा माया निवासी नरौली, कड़सरी निवासी कंचन, निरंजनपुर निवासी ममता, किरन, गंगोत्री, अंतिमा, किरन, नीलम, रेखा, रखौना निवासी इंद्रवती सवार थीं। इनके अलावा जनता इंटर कालेज की निरंजनपुर निवासी छात्रा मनीषा, काजल, शुचिता, डेवाडीहा निवासी दीपा, भद्दीपुरा निवासी आशा, शांति, सेमरा गलवा निवासी शीलम सहित करीब पचास बच्चे नाव पर सवार थे।

27 अगस्त को भी डूबी थी नाव
अजीब संयोग है कि पिछली बार भी 27 तारीख को रामपुर घाट पर नाव डूबी थी। इस बार भी 27 तारीख को ही नाव पलटी। समय भी करीब-करीब वही था। यहां तक कि उस पर सवार भी वही थे, यानी स्कूली बच्चे ही थे। इतना ही नहीं बचाने वाला भी वही था। लोग इस अजीबोगरीब संयोग की चर्चा करते सुने गए।

रियल हीरो बन गए गौरी शंकर कनौजिया
शिक्षक, नाविक के साथ बाकी लोग बनकर आए फरिश्ते
दुर्गेश ओझा/ विजय गुप्ता
कलवारी/गायघाट। शिक्षक गौरी शंकर कनौजिया पूरे क्षेत्र के हीरो बन गए हैं। अभिभावकों की नजर में गुरुवार को किसी फरिश्ते से कम नहीं थे। हों भी क्यों न। उनका कारनामा ही कुछ ऐसा है कि हर कोई उन पर नाज करे। एक महीने के भीतर दो बार अपनी जान दांव पर लगाकर कई बच्चों को डूबने से उन्होंने बचाया।
27 अगस्त को भी रामपुर घाट पर जो नाव डूब रही थी, उस पर गौरीशंकर कनौजिया भी सवार थे। बच्चों की चीख-पुकार सुनते ही वह खुद पानी में कूद गए। खुद तैरकर बाहर निकलने की बजाय वह बच्चों को बचाने में लग गए। इस बार भी जब नाव डूबने लगी तो किनारे खडे़ कनौजिया से नहीं देखा गया। उनकी दिलेरी को देखकर डेवाडीहा निवासी नाविक राम औतार और जनता इंटर कालेज गायघाट के अनुचर श्रीराम भी नदी में कूद पडे़ और एक-एक करके बच्चों को बाहर निकालने लगे। नाव में उनके मित्र बाबूराम भी सवार थे। उनकी जान भी कनौजिया ने ही बचाई। खुद कनौजिया ने बताया कि बच्चों को डूबते देख न जाने कहां से इतनी ताकत आ गई। सामने मित्र बाबूराम भी डूबते दिख रहे थे। इन हालात में वह खुद को नहीं रोक सके। उन्होंने कहा कि पूरी तरह से डूब चुकी कंचन को बचा लेने पर उन्हें काफी चैन का एहसास हो रहा है।

तीन घटनाओं से भी नहीं जागा प्रशासन
रामपुर घाट पर साल भर के भीतर एक के बाद तीन घटनाओं के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी। अब भी दर्जन भर से अधिक गांवों के स्कूली बच्चों और अन्य लोगों के आवागमन के लिए एक नाव तक का इंतजाम नहीं हो सका। इसे लेकर क्षेत्र के लोगों में बेहद नाराजगी है। धनपति देवी बालिका इंटर कालेज के संस्थापक फूलचंद्र तिवारी का कहना है कि प्रशासन से कई बार बड़ी नाव और कुशल नाविक की मांग की गई थी। निरंजनपुर के श्यामेंद्र सिंह, कपींद्र सिंह के मुताबिक सुबह के समय सबको जल्दी रहती है। 25 लोगों की क्षमता वाली नाव में मजबूरन 40-50 लोगों को बैठना पड़ता है।

पीसीएस अफसर ने बचाई थी बच्चों की जान
10 अक्टूबर 2011 को भी इसी घाट पर नाव डूबी थी। तब भी नाव में 32 बच्चे सवार थे। उसी में निरंजनपुर के निवासी पीसीएस अफसर नवलेंद्र सिंह ने जान पर खेलकर बच्चों को बचाया था। उस समय प्रशासन की ओर से कहा गया था कि जल्द ही उस घाट पर इंतजाम किया जाएगा। मगर कुछ नहीं हुआ।

खुद की जान की परवाह नहीं करते लोग
नाविक राम औतार का कहना है कि उसकी नाव में केवल 25 लोगों को बैठाकर ले जाने की क्षमता है। मगर जबरदस्ती 50-60 लोग सवार हो जाते हैं। मना करने पर लड़ाई करने पर आमादा हो जाते हैं। खासकर बच्चे एक साथ सवार हो जाते हैं। यही वजह है कि अक्सर ऐसी घटना हो रही है। गुरुशरन पाल इंटर कालेज के अनुचर श्रीराम के मुताबिक इस बार नाव में उनकी भी दो बच्चियां मनीषा और शुचिता सवार थीं। बताया कि स्कूल के समय बच्चों की संख्या काफी बढ़ जाती है। सभी पार जाने की जल्दी में रहते हैं।
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