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चिल्ड्रेन वार्ड: 25 बेड पर 85 मरीज

Basti

Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
बस्ती। जिला अस्पताल का चिल्ड्रेन वार्ड मासूमों से पट गया है। हालात ऐसे बन गए हैं कि पच्चीस बेड पर पच्चासी बच्चों को लिटाया गया है। एक बेड पर दो से तीन बच्चों का इलाज हो रहा है। भारी संख्या में मरीजों के आने से अधिकतर बच्चों को रेफर करना पड़ रहा है। वहीं तीमारदारों की भीड़ से भी वार्ड की हालत दयनीय हो गई है।
मौसम की मार का असर इन दिनों मासूमाें की सेहत पर दिख रहा है। वायरल फीवर, निमोनिया, डायरिया के मरीजों से पूरा वार्ड पटा है। चालीस बेड के वार्ड में दो कमरे हैं। इन बेड पर मरीजों की भारी भीड़ से अस्पताल में अव्यवस्था हो गई है। इंसेफेलाइटिस के नाम पर एक कमरे में लगे 15 बेड सुरक्षित किए गए हैं। बेड और संसाधन की कमी के नाते जेई, एईएस पीड़ितमरीज को सीधे गोरखपुर मेडिकल कालेज रेफर कर दिया जाता है। उन्हें भय सताता है, अगर किसी जेई, एईएस मरीज के साथ कोई अनहोनी हो गई तो बवाल उनके सिर ही फू टेगा। बेड नंबर चार पर संतकबीरनगर के पकरीराजा गांव निवासी चुन्नीलाल की ढाई साल की बेटी रेनू, बस्ती के हनुआ निवासी आठ वर्षीय सत्यम पुत्र रामरूप और कलवारी के मांझा कला निवासी दशरथ की तीन वर्षीया बेटी ज्योति को लिटा कर इलाज किया जा रहा था। बेड नंबर तीन कोतवाली के डुमरी गांव निवासी बलिराम शर्मा के 11 वर्षीय बेटे रवि, धौरहरा के मुन्नीलाल का तीन साल का लड़का जितेंद्र और जामडीह के तीन वर्षीय शुभम पुत्र सियाराम तथा बेड नंबर दो पर गौरा के झिन्नू का चार वर्षीय पुत्र राजू, भानपुर निवासी पप्पू का दो साल का बेटा सत्यम और श्याम सुंदर के पांच साल का पुत्र अमित का इलाज हो रहा था। वार्ड के 25 बेडों पर 85 मासूमों का इलाज हो रहा है। उनके इलाज में अस्पताल के अन्य संसाधन भी कम पड़ जा रहे हैं। डाक्टर और नर्सें कम संसाधन में बेहतर काम न होने की तोहमत बड़ी संख्या में जुटे तीमारदारों पर मढ़ रहे हैं। हर बेड के इर्द-गिर्द एक मरीज के साथ तीन से चार परिवारीजन टकटकी लगाए अपने मासूम को निहार रहे हैं। वार्ड के प्रभारी बाल रोग विशेषज्ञ डा. एसके गौड़ का कहना है इन दिनों संक्रामक बीमारियों के साथ बदलते मौसम की मार मासूमों की मार अधिक पड़ रही है। अस्पताल की व्यवस्था में ही उनका इलाज करने की मजबूरी है। परिजनों का सहयोग न मिल पाने से स्थिति और खराब हो रही है।
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