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बस्ती में तैयार होगा 88 कुंतल रेशम

Basti

Updated Mon, 03 Sep 2012 12:00 PM IST
बस्ती। जिले की जलवायु रेशम उत्पादन के लिए प्रदेश के अन्य जनपदों से बेहतर है। बस्ती के छह रेशम फार्म लगातार कई सालों से रेशम के वर्षों में बेहतर योगदान कर रहे हैं। साल के दूसरे चरण में 88 कुंतल रेशम कोकून उत्पादन की संभावना है। विभाग इसके लिए रूपरेखा तैयार कर सकता है।
रेशम उत्पादन कृषि आधारित व्यवसाय है। कृषि की आय बढ़ाने के साथ ही परिवार के सभी सदस्यों खासकर महिलाओं और कार्य करने में सक्षम बुजुर्गों को घर बैठे ही रोजगार उपलब्ध कराता है। जिले के 63 एकड़ में छह राजकीय रेशम फार्म है। इनमें कीट पालन होता है। अंडे से निकलने वाले लार्वा को दस दिन तक रेशम फार्मों पर रखा जाता है। इसके बाद यह फार्म के आसपास रहने वाले भूमिहीन श्रमिक खासकर एससी/एसटी को वितरित कर दिया जाता है। 20 दिन तक कीटपालकों के घरों में कीटपालन के बाद रेशम कोकून तैयार होता है। इसी से रेशम निकलता है। साल में चार बार रेशम कीट पालन का कार्य होता है। दूसरे चरण में 8750 किलो रेशम कोकून के उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। इस कार्य के लिए छह सौ कीट पालकाें को लगाया गया है। इसके लिए उन्हें 87 लाख 50 हजार अंडे उपलब्ध कराए जा चुके हैं। एडी रेशम आरएल मौर्य ने बताया कि चालू चरण में करीब साढ़े सात लाख के रेशम का उत्पादन होगा।

वर्ष में चार बार होता है कीटपालन
पहली बार पहली अप्रैल से 25 अप्रैल
दूसरी बार 25 अगस्त से 20 सितंबर
तीसरी बार पहली अक्टूबर से 28 अक्टूबर
चौथी बार 25 फरवरी से 25 मार्च तक

तीन चरणों में रेशम कीट पालन
रेशम कीट पालन तीन चरणों में पूरा होता है। पहला चाकी कीट पालन, दूसरा प्रौढ़ अवस्था कीट पालन और तीसरा कोया निर्माण। चाकी कीट पालन वह अवस्था होती है जब रेशम कीट बहुत नाजुक अवस्था में होता है। यह रेशम फार्मों पर किया जाता है। इसके बाद प्रौढ़ कीटपालन के लिए कीटपालकों को दे दिया जाता है।

दिन में चार बार दी जाती है पत्ती
रेशम कीटों को 24 घंटे में चार बार पत्ती दी जाती है। सुबह छह बजे, दस बजे, दिन में चार बजे और रात में नौ बजे पत्ती दी जाती है। एक रेशम कीट पूरे कीट पालन अवधि में 28 से 30 ग्राम पत्ती का प्रयोग करता है और औसतन चार से पांच ग्राम का हो जाता है।

राजकीय रेशम फार्म
कजरीकुंड कप्तानगंज ब्लाक
हाथा खुर्द सल्टौआ गोपालपुर
हल्लौर नगर बनकटी
तरेता सांऊघाट
सुरुवार कला रुधौली
शाहपुर भनवापुर
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