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बर्बादी के कगार पर 28 करोड़ का चावल

Basti

Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। राइस मिलों के गोदामों में डंप 28 करोड़ रुपये का चावल बर्बादी के कगार पर है। पिछले पांच महीने से भंडारण के अभाव में चावल खराब होने लगे हैं। बरसात के नाते बोरों के साथ ही चावल भी सड़ रहा है। अब खराब हो रहेचावल को लेकर मिलरों में खलबली मच गई है।
बताते चलें कि सरकार हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य योजना के तहत किसानों से धान खरीदती है। यह धान राइस मिलों को चला जाता है। चावल बनो के लिए मिलों को प्रति कुंतल दस रुपये की दर से भुगतान किया जाता है। नियमत: मिलों को 20 दिन के भीतर चावल दे देना होता है। खाद्य विभाग की जिम्मेदारी है कि मिलों से समय से चावल ले और उसके भंडारण की व्यवस्था करे। इसी के तहत वर्ष 2011-12 में मिलों को 1.71 लाख मीट्रिक टन धान दिया गया। विभाग का कहना है कि एक तो मिलों ने समय से 25544 मीट्रिक टन चावल नहीं दिया, ऊपर से एफसीआई ने भी भंडारण में आनाकानी की। इसके चलते इतनी मात्रा में सीएमआर फंस गया। अब राइस मिलों के गोदाम में पड़े चावल खराब हो रहे हैं। बारिश के चलते बोरे भीग गए हैं। चावल भी चूहों का निवाला बन रहा है। सरकार को भी सीएमआर में प्रत्येक वर्ष करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। इसमें अधिकतर नुकसान चावल मिलों के सीएमआर का गबन कर लेने के कारण होता है। अकेले हर्रैेया के एक मिल पर 85 लाख रुपये के सीएमआर का गबन कर लेने के आरोप में मुकदमा दर्ज है। आरएफसी एके सिंह कहते हैं कि मिलरों ने समय से चावल नहीं दिया इसके चलते इतनी मात्रा में सीएमआर अवशेष रह गया। वहीं आरएफसी एके सिंह कहते हैं कि उन्होंने फूड कमिश्नर को बुक एडजस्टमेंट के साथ ही तीन और सुझाव दिए हैं ताकि चावल का निस्तारण हो सके। राइस मिलर्स एसोसिएशन के मंडलीय अध्यक्ष जेपी सिंह कहते हैं कि मिलों पर सीएमआर और लेवी चावल सड़ रहा है। सरकार इसकी कोई व्यवस्था नहीं कर रही है। बताया कि दोनों स्थिति में नुकसान तो मिलर्स का ही होने वाला है।

मिलों पर 255440 कुंतल सीएमआर है बकाया
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, मंडल में चावल मिलों पर कुल 255440 कुंतल सीएमआर बकाया है। सबसे अधिक बकाया सिद्धार्थनगर के मिलों पर है। इसकी कुल लागत 28 करोड़ रुपये से अधिक की है। बस्ती में 73730 कुंतल, संतकबीरनगर में 63780 व सिद्धार्थनगर में 117930 कुंतल सीएमआर चावल बकाया है। एफसीआई के वादे के मुताबिक, भंडारण माह अगस्त से शुरू होगा।
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