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सख्त स्वभाव रहा केसरवानी पर हमेशा भारी

Basti

Updated Sat, 28 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। जेल अफसर आरके केसरवानी का सख्त स्वभाव हमेशा उन पर भारी रहा। बिगड़ैलों को सुधारने के लिए उनका अपना अलग ही फंडा था। यही स्वभाव उनके खुद के परिवार के लिए कई बार घातक साबित हुआ। सख्ती के नाते बस्ती तैनाती के दौरान उन पर हमले की योजना भी बनाई गई थी। बंदियों के मोबाइल लिसिनिंग के बाद पुलिस ने बदमाशों को पकड़ लिया था। उसी घटना के बाद जेल में जमकर बवाल हुआ। आगजनी, मारपीट और फायरिंग में दो बंदियों की मौत से जिला प्रशासन हिल गया। घटना के कुछ ही दिन बाद वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके केसरवानी को निलंबित कर लखनऊ भेज दिया गया।
बताते चलें कि एक मार्च को वरिष्ठ जेल अधीक्षक आरके केसरवानी ने मेरठ से मंडलीय कारागार बस्ती का जेल अधीक्षक का चार्ज लिया। तीन दिन बाद ही जेल के भीतर उनके खिलाफ बंदियों की गुटबंदी शुरू हो गई थी। सबसे पहले जेल के भीतर मोबाइल के इस्तेमाल पर पाबंदी लगने से कुछ बंदी चिढ़ गए। इसके बाद दबंग बंदियों के अलग भोजन बनाने की प्रथा पर शिकंजा कसा गया। इससे बंदी और तिलमिला उठे। इसके साथ ही जेल के भीतर अवैधानिक वस्तुओं की आवाजाही भी रोक दी गई।
सूत्रों की मानें तो बंदियों के आक्रोश की आग में घी डालने का काम जेल के कुछ लोगों ने किया। ये वे लोग हैं, जिनको बंदियों को सुविधा देने के नाम पर मोटी रकम मिलती थी। अंदर कड़ाई होने से उनकी आमदनी भी बंद हो गई थी। वे भी चाहते थे कि बवाल हो जाएगा तो माहौल फिर से पहले जैसा हो जाएगा। त्रिस्तरीय जांच में यह बात सामने आ चुकी है कि माहौल बिगाड़ने और दहशत पैदा करने के लिए हमले का प्लान बनाया गया था। इसके बाद क्या हुआ? यह सभी लोग जानते हैं। रही बात केसरवानी पर कार्रवाई की तो उन्हें इसलिए खामियाजा भुगता पड़ा क्योंकि उन्हें जेल के भीतर बवाल का माहौल पैदा करने का दोषी पाया गया। उन्होंने हड़बड़ी में वे बंदियों की पिटाई न कराई होती तो बगावत और आगजनी की नौबत ही नहीं आती। इसे रोकने के लिए गोलियां चलाई गईं। हालांकि यह प्रकरण अब भी बहस का मुद्दा बना हुआ है कि केशरवानी का कदम बवाल रोकने के लिए उठाया गया या बवाल को उकसाने के लिए वे ही जिम्मेदार थे? शुक्रवार को जैसे ही इस बात की जानकारी हुई कि केसरवानी ने खुद और पत्नी को गोली मारकर सुसाइड कर ली है तो लोगों की जेहन में जेल कांड एक बार फिर ताजा हो उठी।

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