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सरकारी व्यवस्था पर भारी अनाज माफिया

Basti

Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। प्रदेश में अनाज की कालाबाजारी और घोटाले पर रोक लगाने में जिम्मेदार विफल हैं। अनाज माफिया सरकारी व्यवस्था पर भारी हैं। खाद्यान्न डायवर्जन और गबन पर शासन-प्रशासन का अंकुश नहीं रह गया है। गरीबों के हिस्से का अनाज खुले बाजार में बिक जा रहा है। इस बात का खुलासा हाईकोर्ट के आदेश पर अनाज घोटाले की जांच कर रही ईओडब्लू एजेंसी के डीआईजी की ओर से फूड कमिश्नर को भेजे पत्र में हुआ।
बता दें कि वर्ष 2005-06 में प्रदेश में बड़े पैमाने पर अनाज घोटाले का खुलासा हुआ था। बताया गया कि यह अब तक सबसे बड़ा खाद्यान्न घोटाला है। चूंकि मामला सीधे गरीबों के हक से जुड़ा हुआ था, इस लिए हाईकोर्ट ने सीअीआई सहित ईओडब्लू और फूड सेल जैसी एजेंसी से जांच करने का आदेश दिया। ईओडब्लू के एक जांच अफसर का कहना है कि इस जांच की मानिटरिगं खुद कोर्ट कर रही है। बताया कि इस घोटाले में छोटे से लेकर बड़े स्तर के अधिकारी और राजनेता के शामिल होने का खुलासा जांच में हो रहा है। इस बात की पुष्टि ईओडब्लू के डीआईजी के उस पत्र से भी होती है, जो उन्होंने शासन और फूड कमिश्नर को लिखी है। यह पत्र सुल्तानपुर के केंद्र बल्दीराय और धनपतगंज की जांच में हुए खुलासे के बाद शासन और फूड कमिश्नर को लिखा गया।

फूड कमिश्नर ने आरएफसी को माना जिम्मेदार
बस्ती। डीआईजी के खुलासे के बाद फूड कमिश्नर अर्चना अग्रवाल ने अनाज की कालाबाजारी, गबन और घोटाले के लिए आरएफसी को जिम्मेदार बताते हुए प्रभावी कदम उठाने का निर्देश दिया। आरएफसी को घोटाले पर अंकुश न लगाने पर फटकार लगाते हुए गबन ओर अनियमितताओं को रोकने के प्रवर्तन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए नियमित छापेमारी, सत्यापन और भौतिक चेकिंग कराने का फरमान जारी किया। आडिट कराने पर सबसे अधिक जोर दिया गया। आरएफसी एके सिंह कहते हैं कि इस संबंध में मंडल के समस्त जिला खाद्य विपणन अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

मंडल में गबन में फंस चुके 37 अफसर और कर्मी
बस्ती। पिछले पांच वर्षों में गरीबों का हक मारने वाले 37 जिला खाद्य विपणन अधिकारी, विपणन निरीक्षक और खाद्यान्न की ढुलाई करने वालों के विरुद्ध गबन के मुकदमे से लेकर निलंबन तक की कार्रवाई हो चुकी है। एक आंकड़े के मुताबिक इन लोगों पर लगभग 15 करोड़ रुपये के अनाज का गोलमाल करने का आरोप है। इसमें तीन ऐसे केंद्र प्रभारी हैं, जिन पर तीन-तीन बार अनाज घोटाले के आरोेप में मंडल के विभिन्न थानों में मुकदमा दर्ज हो चुका है।
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