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लाखों के गोलमाल में फंसते जा रहे अफसर

Basti

Updated Sat, 14 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। मनरेगा में बिना काम कराए लाखों रुपये के अनियमित भुगतान को लेकर वन विभाग के जिम्मेदार फंसते ही जा रहे हैं। गोलमाल की गूंज शासन तक पहुंच चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कमिश्नर ने डीएम और वन संरक्षक को कार्रवाई का निर्देश दिया है। डीएम ने कहा है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।
वन विभाग में मनरेगा के लगभग 43 लाख रुपये के बंदरबांट की साजिश रची गई। मनरेगा का यह धन पौधरोपण पर खर्च करना था। धन के बंदरबांट के लिए न सिर्फ कागजों में कार्य पूरा होना दिखा दिया बल्कि, उपभोग प्रमाण-पत्र भी दे दिया। एमआईएस फीडिगं तक करा दी गई। साजिश का खुलासा उस समय हुआ जब डीएम ने छापा डलवाया। छापे में न तो कोई जिम्मेदार मिला और न अभिलेख ही मिला। मगर बैंक से जो सूचना मिली वह चौंकाने वाली रही। जिस धन का उपभोग प्रमाण-पत्र दिया गया वह धन खाते में मिला। अब सवाल यह उठता है कि जब भुगतान होना दिखा दिया गया तो इतनी बड़ी रकम कैसे अवशेष रह गई। जांच अधिकारी पीडी वीरपाल कहते हैं कि वन विभाग ने काम अक्टूबर 2011 में कराया। चेक मार्च 2012 में काटा और भुगतान जून 2012 में हुआ। इससे पता चलता है कि मनरेगा के धन का गोलमाल करने की साजिश रची गई। बताया कि जांच के लिए जो अभिलेख वन विभाग ने दिए हैं, उससे पता ही नहीं चलता कि काम कराया गया है कि नहीं? कामवार बिल भी नहीं दिया गया। अभिलेख अव्यवस्थित और अपूर्ण हैं। सीडीओ राम अरज मौर्य कहते हैं जांच चल रही है। पूरे कामों की जांच कराई जा रही है। कमिश्नर एसके वर्मा कहते हैं कि डीएम को वन सचिव से डीएफओ के खिलाफ कार्रवाई के लिए बात करने और प्रारंभिक जांच रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया गया है। वन संरक्षक से भी अलग से रिपोर्ट तैयार करने को कहा गया है। डीएम एस. मथुशालिनी ने कहा कि वन सचिव से बात हो चुकी है। दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

स्पेशल आडिट टीम की जांच में फंसेंगे प्रधान और सेक्रेटरी
बस्ती। इस गोलमाल में फंसे वन विभाग के अफसरों के साथ ग्राम प्रधान, ग्राम रोजगार सेवक और पंचायत सेक्रेटरी की गर्दन भी फंसी हुई है। इसका पता स्पेशल आडिट में लग सकता है। कथित फर्जी कार्य बिना इन लोगों की मिलीभगत से नहीं हो सकता है। कराए गए कार्यों में इन लोगों का भी हस्ताक्षर होता है।
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