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एक महीने धरती पर विचरेंगे महादेव

Basti

Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
बस्ती। आज से शुरू हो रहे श्रावण मास में महीने भर देवाधिदेव महादेव धरती पर विचरण करेंगे। इस दौरान भोले नाथ के भक्त पूरे महीने अपने आराध्य की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके लिए जिले के 56 से अधिक शिव मंदिरों पर व्यापक तैयारियां की गई हैं। मंदिरों की साफ-सफाई और सजावट की गई है।
पहले ही दिन रुद्राभिषेक के लिए बड़ी संख्या में भक्तों ने तैयारी कर ली है। फूल, बेलपत्र, अक्षत, भांग, धतूरा लेकर महादेव का जलाभिषेक करने की तैयारी की गई है। बड़ी संख्या में लोगों ने व्रत भी रखते हैं। भारीनाथ, महादेवा, हरदेवनाथ, देवरिया, तिलकपुर समेत अन्य सभी शिवमंदिरों में भी श्रद्धालु शिव को जल चढ़ाएंगे। सावन भर आधी रात से ही हर-हर महादेव के जयघोष से शिवमंदिर गूंजने लगता है। रात 12 बजे से ही शिवालयों पर भक्तों ने जलाभिषेक करना शुरू कर देते हैं। पंडित जय प्रकाश द्विवेदी के मुताबिक, श्रावण महीने को शिव मास भी कहा गया है। इस महीने में शिव की आराधना करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही भोले का निर्बाध आशीष मिलता है।

कड़ी रहेगी मंदिरों की सुरक्षा व्यवस्था
भोले शंकर की पूजा आराधना के दौरान पुलिस बल के जवान और प्रशासनिक अधिकारियों की पैनी नजर सुरक्षा व्यवस्था पर रहेगी। मेला मंदिर परिसर में सुरक्षा के इंतजाम के लिए पुलिस बल की व्यवस्था की गई है। मेले के दौरान सादे ड्रेस में महिला और पुलिस जवान मूवमेंट करते रहेंगेेे। भीड़ बढ़ने के बाद भद्रेश्वरनाथ मेले में एक कंट्रोल रूम और पुलिस सहायता केंद्र सक्रिय किया जाएगा। एएसपी मनोज कुमार झा के मुताबिक, फिलहाल कोतवाली थाने को मंदिर परिसर की व्यवस्था संभालने का जिम्मा दिया गया है। साथ ही जिले के अन्य मंदिरों पर भी स्थानीय थाने से सुरक्षा व्यवस्था करने को कहा गया है।

आधीरात से शुरू हो गया रुद्राभिषेक
श्रावण मास के पहले दिन सबसे पहले अपने आराध्य की पूजा अर्चना के लिए होड़ लगी रही। मंगलवार/बुधवार को रात एक बजे से ही मंदिरों पर शिव भक्तों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। इसके बाद तांता टूटने का नाम नहीं ले रहा था।

कैसे करें शिव का पूजन
वैसे तो भगवान भोलेनाथ पूजा सामग्री नहीं बल्कि, भाव से ही प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी सबसे प्रिय वस्तु बिल्व पत्र, भांग-धतूरा, बेर आदि हैं। इसके अलावा मीठा, दूध, का करा भोग लगाया जाता है। प्रात: स्नान आदि से निवृत्त होकर फूल, अक्षत, बेलपत्र, धतूरा, चंदन, धूप दीप आदि सजाकर शिवलिंग का पूजन करना चाहिए। सबसे पहले लिंग का जलाभिषेक करके उसकी मालिश की जाती है। इसके बाद दूध, मधु आदि अर्पित किया जाता है। फिर भोग लगाया जाता है।
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