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बरेली कॉलेज में छेड़छाड़, तीन छात्र निलंबित

Bareilly

Updated Fri, 21 Dec 2012 05:33 AM IST
बरेली। दिल्ली में चलती बस में युवती से गैंग रेप की घटना से जिस वक्त पूरा देश सदमे में है, उसी बीच बरेली कॉलेज में बीकॉम की तीन छात्राएं गुरुवार को सरेआम छेड़छाड़ का शिकार हो गईं। हालांकि उन्होंने सूझबूझ और दिलेरी से काम लिया। छेड़छाड़ के बाद उन्होंने तत्काल चीफ प्रॉक्टर को सूचित किया। इसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने तीनों आरोपी छात्रों को पकड़ लिया। तीनों छात्रों को हफ्ते भर के लिए निलंबित कर दिया गया है। उनके अभिभावकों से भी स्पष्टीकरण मांगा गया है कि क्यों न तीनों को कॉलेज से निष्कासित कर दिया जाए।
घटना गुरुवार दोपहर करीब सवा 12 बजे हुई। बीकॉम की तीनों छात्राएं घंटाघर के पास होकर विवेकानंद मूर्ति के पास पहुंचीं थीं। तभी वहां मौजूद बीए तृतीय वर्ष के मो. शाहिद, बीसीए द्वितीय वर्ष के आकाश चौहान और बीसीए के ही राहुल राजपूत ने उन्हें टोका। शाहिद ने अभद्र लहजे में टिप्पणी की तो छात्राओं ने एतराज किया। इस पर छात्र बदतमीजी करने लगे। छात्राओं ने मौके की नजाकत भांपकर चुपचाप आगे बढ़ीं और मोबाइल पर ही चीफ प्राक्टर से घटना की शिकायत की। कुछ ही देर में कॉलेज के सुरक्षा कर्मी मौके पर पहुंच गए। इससे हड़बड़ाए छात्रों ने भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें पकड़ लिया गया। तीनों को चीफ प्राक्टर डॉ. जोगा सिंह होठी के सामने पेश किया गया और पीड़ित छात्राओं को भी बुला लिया गया।
छात्राओं से लिखित शिकायत ली गई। एक छात्र ने प्रत्यक्षदर्शी के रूप में घटना की पुष्टि की। डॉ. होठी ने बताया कि आरोपियों के अभिभावकों से संतोषजनक जवाब न मिलने पर उनको कॉलेज से निकाल दिया जाएगा। माना जा रहा है कि कॉलेज प्रशासन का उस शासनादेश के तहत तीनों आरोपी छात्रों को निकालने का इरादा है जिसमें ऐसे मामलों में दोषियों को निष्कासित करने तक का अधिकार संस्थान प्रशासन को दिया गया है।


परिसर - आसपास में छात्राओं से छेड़छाड़ की घटना
बरेली। बरेली कॉलेज में आते-जाते और परिसर में छात्राओं से छेड़छाड़ की घटनाएं आम हैं। इसकी पुष्टि इसी से हो जाती है कि छह नवंबर को छात्रसंघ चुनाव के प्रत्याशियों ने इस मसले को एक अहम मुद्दे के तौर पर उछाला था। हर प्रत्याशी ने जीतने पर ऐसी घटनाओं को रोकने को ठोस पहल का वादा किया था। परिसर में गुरुवार को छात्राओं के छेड़छाड़ के आरोपियों को पकड़वाने की चर्चा हर तरफ रही। पहले ऐसी घटनाओं की शिकायतें कॉलेज प्रशासन को मिलती जरूर थीं लेकिन न आरोपी के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी मिल पाती थी, न कोई कार्रवाई ही होती थी।

कॉलेज की प्राध्यापिकाओं की राय
1. छेड़ने वालों को खिलाफ छात्राओं ने जो सूझबूझ इस मामले में दिखाई है, वह दूसरों को प्रेरित करने वाली है। इस घटना ने फिर साबित किया है कि भले ही लोग खुद को मॉडर्न कहें लेकिन उनके अंदर सोच वही पुरानी है। कहीं न कहीं नारी को भोग्या के रूप में देखते हैं भले ही सार्वजनिक तौर अभिव्यक्त नहीं करते। जरूरत वुमन फ्रेंडली समाज गढ़ने की है और इसमें महिलाओं को ही लीड रोल लेना होगा। -- डॉ. वंदना शर्मा, प्राध्यापिका, राजनीति विज्ञान विभाग बरेली कॉलेज
2. ऐसी घटना आहत कर देती है चाहे वह कॉलेज में हो या शहर अथवा देश के किसी भी हिस्से में। इक्कीसवीं सदी में जब गृहस्थी की चौखट से बाहर निकलकर रोजगार की दुनिया में नारी पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने लगी है तब ऐसा आचरण देखकर तो यही लगता है कि ऐसी घटना विक्षिप्त मानसिकता वाले ही करते हैं। -- डा. शुभ्रा कटारा, सांख्यिकी विभाग प्रभारी बरेली कालेज

बरेली कालेज छात्र संघ पदाधिकारियों की टिप्पणी
1. घटना काफी गंभीर है। शुक्रवार को प्राचार्य से मिलकर परिसर और आसपास में छात्राओं के साथ ऐसी घटनाओं की रोकथाम को प्रभावी कार्ययोजना बनायेंगे। पहले ही परिसर में सभी प्रमुख संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की मांग की गई है। अब प्रभावी प्राक्टोरियल बोर्ड गठित करने की मांग करेंगे। -- जवाहर लाल, अध्यक्ष
2. काफी संवेदनशील घटना घटी है। अराजकता वाली ऐसी घटनाओं की रोकथाम सुनिश्चित कराने को संघ के सदस्यों और कालेज प्रशासन के साथ मिलकर प्रभावी कदम उठायेंगे। परिसर और परिसर से बाहर भी अपने कालेज की छात्रा पर कोई बुरी निगाह न डाल सके, ऐसा माहौल बनाने को कटिबद्ध हूं। -- विनोद जोशी, उपाध्यक्ष।
3. पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। छात्र और छात्रा दोनों ही कॉलेज के अंग हैं। कहीं किसी पुरानी रंजिश या साजिश के तहत कोई निर्दोष बलि का बकरा न बनाया जाए। घटना के इस पक्ष को भी संजीदगी से लिया जाना चाहिये। जिस हड़बड़ी में चीफ प्राक्टर ने निलंबन का फैसला लिया है, वह नहीं होना चाहिए था। -- हृदेश यादव, महामंत्री
4. छात्रसंघ सदस्यों और कॉलेज प्रशासन को साझे तौर पर ऐसी पहल करनी चाहिए ताकि कोई भी अभिभावक अपनी बच्ची को उच्च शिक्षा के लिए घर से बाहर अकेले भेजने में न हिचकिचाए। परिसर में आने वाले हरेक का आई कार्ड चेक होना चाहिए। छात्राओं के साथ अभद्रता करने वाले और टिप्पणी करने वालों के परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगनी चाहिए। -- मनदीप कौर, पुस्तकालय मंत्री।
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