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महज कमाई का जरिया बनकर रह गए उर्दू सेंटर

Bareilly

Updated Sun, 18 Nov 2012 12:00 PM IST
बरेली। नेशनल काउंसिल फॉर प्रमोशन ऑफ उर्दू लैंग्वेज (एनसीपीयूएल) के शहर में चल रहे ज्यादातर सेंटर सिर्फ केंद्र सरकार से मिल रही इमदाद को ठिकाने लगाने का काम कर रहे हैं। यहां विद्यार्थियों का महज ‘कागजी’ पंजीकरण भर होता है। रिकॉर्ड में दिखाए गए मानदेय पाने वाले शिक्षक भी सेंटरों पर कहीं नजर नहीं आते। हैरानी की बात तो यह है कि काउंसिल की उच्च स्तरीय टीम भी यहां मुआयने कर गई, मगर उसने यहां सबकुछ ठीकठाक चलता हुआ दिखाया। नतीजतन टीम के काम करने के ढंग पर भी सवाल उठने लाजिमी हैं।
एनसीपीयूएल, केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन एक स्वायत्त शासी संस्था है। इसका उद्देश्य उर्दू का प्रचार-प्रसार बढ़ाना और वैज्ञानिक ज्ञान को उर्दू जबान में भी मुहैया कराना है। पूरे मुल्क में तमाम सेंटर चलाए जा रहे हैं। यहां रजिस्ट्रेशन कराने वाले विद्यार्थियों को मुफ्त में किताबें उपलब्ध कराई जाती हैं। उनसे कोई फीस नहीं ली जाती। पढ़ाने वाले शिक्षकों को भी तीन हजार रुपये महीना बतौर मानदेय दिया जाता है। पच्चीस विद्यार्थियों पर एक शिक्षक रखने का नियम है। यहां से एक साल के डिप्लोमा कोर्स इन उर्दू लैंग्वेज और सर्टिफिकेट कोर्स इन अरैबिक लैंग्वेज के अलावा दो साल के डिप्लोमा कोर्स इन फंक्शनल अरैबिक कर सकते हैं। एनसीपीयूएल की अधिकृत वेबसाइट के मुताबिक, बरेली जिले में नौ सेंटर चल रहे हैं।
शाहबाद में रूहेलखंड ग्राम विकास उत्थान समिति को ये कोर्स चलाने की अनुमति दी गई है। रिकॉर्ड में इस समिति के पास 140 विद्यार्थी दिखाए गए हैं। लेकिन उनके पास जगह बीस विद्यार्थियों के बैठने की भी नहीं है। क्लास कब लगती हैं? समिति के सेक्रेटरी महबूब हुसैन ने बताया कि शनिवार, इतवार और सोमवार को 4-5 बजे के बीच क्लास लगती हैं। पांच शिक्षक हैं। लेकिन इतनी कम जगह में शिक्षक और विद्यार्थी कैसे बैठते होंगे? कुछ देर सोचने के बाद उनका जवाब था- अरबी के पचास विद्यार्थी बीबीजी मस्जिद में चल रहे मदरसे में पढ़ते हैं। पचास विद्यार्थियों को फरीदपुर में बड़ा इमामबाड़े के पास रहने वाले एक मौलवी साहब पढ़ाते हैं। 15-20 बच्चे यहां भी आ जाती हैं। यह सवाल पूछने पर कि रिकॉर्ड में तो आपने यही दिखा रखा है कि सभी विद्यार्थी यहीं आते हैं। उनका जवाब था कि बच्चों की सहूलियत के लिए ही यह व्यवस्था की गई है। अलबत्ता, उनका रिकॉर्ड में सभी विद्यार्थियों के नाम बाकायदा दर्ज थे। एक रजिस्टर के पन्नों पर पानी पड़ जाने से यह खराब हो चुका था।
खन्नू मोहल्ला में चल रहे हिना एजूकेशन सोसाइटी के केंद्र पर असिस्टेंट मैनेजर इरफान मिले। उन्होंने बताया कि उनके यहां 100 विद्यार्थी हैं। तीन शिक्षक हैं। रोज सुबह 7-8 बजे तक क्लास लगती हैं। दीवाली के चलते अभी कुछ दिन की छुट्टी कर दी गई है। संवाददाता के यह कहने पर कि कल सुबह 7-8 बजे आकर देखना चाहते हैं कि कितने विद्यार्थी आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि टाइम बदल दिया गया है। अब क्लास शाम को लगाई जाएंगी। इसकी सूचना जो विद्यार्थी आ रहे हैं, उन्हें देते जा रहे हैं। साथ ही जोड़ा कि अखबार वालों को इसके अलावा कोई और काम नहीं रह गया है। खन्नू मोहल्ला के ही एक दूसरे सेंटर के संचालक से फोन पर पता पूछा तो उन्होंने इतवार को आने की बात कहते हुए टाल दिया। कमोबेश ज्यादातर सेंटरों का हाल इसी तरह का है।अलबत्ता, स्वाले नगर में इमाम अहमद रजा एकेडमी में विद्यार्थी जरूर आते हैं। आसपास वालों ने भी इसकी ताईद की। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि पिछले दिनों मुआयने को आई एनसीपीयूएल की टीम ने मीरगंज के एक सेंटर के खिलाफ रिपोर्ट दी थी, जबकि वहां के दोनों ही सेंटर चलते हुए मिले।
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एनसीपीयूएल की एक टीम को मुआयने के लिए कुछ समय पहले मैंने भेजा था। उसकी रिपोर्ट में सिर्फ मीरगंज के एक सेंटर के खिलाफ रिपोर्ट दी गई थी। आप (संवाददाता) जैसा बता रहे हैं, अगर ऐसा है तो वाकई चिंता का विषय है। जल्दी ही एक टीम को भेजकर मुआयना कराऊंगा।-वसीम बरेलवी, वाइस चेयरमैन, एनसीपीयूएल


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इनको दी गई है एनसीपीयूएल के सेंटर चलाने की अनुमति
एनसीपीयूएल कंप्यूटर सेंटर-148 सिविल लाइंस, रूहेलखंड ग्राम विकास उत्थान समिति-773 शाहबाद (भूड़), एचएडब्लू मेमोरियल इंग्लिश स्कूल धौरा टांडा, जन जागरण शैक्षिक उत्थान सेवा समिति-41 खन्नू स्ट्रीट, डॉ. शकील एजूकेशनल वेलफेयर सोसाइटी-सुजातपुर (मीरगंज), इमाम अहमद रजा एकेडमी-स्वाले नगर, अहले साहबा वेलफेयर एजूकेशन सोसाइटी-सिंघौली (मीरगंज), हिना एजूकेशन सोसाइटी-231 मोहल्ला खन्नू, पारस समाज कल्याण समिति-159 मौला नगर।
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