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डेलापीर तालाब की रजिस्ट्री पर रोक

Bareilly

Updated Tue, 06 Nov 2012 12:00 PM IST

बरेली। डेलापीर तालाब की जमीन पर स्वामित्व का दावा करते हुए उसकी रजिस्ट्री कराने की कोशिश आखिरकार कामयाब नहीं हो पाई। सोमवार को एडीएम एफआर के कोर्ट में इस मामले में फैसला सुनाया गया। इसमें कहा गया कि जमीन तालाब की ही है। इसलिए उस पर न किसी का स्वामित्व हो सकता है, न कोई उसकी रजिस्ट्री कर सकता है।
बिहारमान नगला के गाटा संख्या 133 को दिखाते हुए इसी वर्ष 26 जून को रजिस्ट्री कराने की कोशिश की गई थी। इसमें रामभरोसे लाल धर्मार्थ ट्रस्ट को इस जमीन का स्वामी दर्शाया गया था। इसका पता चलने पर नगर निगम ने एडीएम एफआर के यहां आपत्ति दाखिल कर दी थी। तत्कालीन एडीएम ओपी राय ने जिला निबंधक की हैसियत से रजिस्ट्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद ट्रस्ट की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट ने 22 अगस्त को आदेश जारी कर एडीएम एफआर को चार सप्ताह के अंदर ट्रस्ट के प्रत्यावेदन का निस्तारण करने को कहा। इसके बाद संबंधित लोग 29 सितंबर को एडीएम के समक्ष पेश हुए। हाईकोर्ट के निर्देश पर एडीएम ने दोनों पक्षों को अपनी बात रखने का मौका दिया। नगर निगम के अधिवक्ता का कहना था कि यह बिहारमान नगला की यह जमीन जमींदारी विनाश उन्मूलन की धारा 132 के तहत राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। तालाब की जमीन पर स्वामित्व नहीं हो सकता। यह भी कहा कि जो गाटा संख्या 133 पर ट्रस्ट का बैनामा होने का दावा किया जा रहा है, वह उदयपुर खास में है, न कि बिहारमान नगला में। ट्रस्ट की ओर से अधिवक्ता ने कहा कि दस अक्टूबर 2009 को दीवानी न्यायालय ने उनके पक्ष में फैसला दे दिया है। अब तक हाईकोर्ट ने नगर निगम को स्टे नहीं दिया है। इसलिए जमीन उनकी है।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद एडीएम ने हिंचलाल तिवारी बनाम कमला देवी मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नजीर के रूप में रखते हुए अपना फैसला सुनाया। इसमें व्यवस्था दी गई थी कि तालाब पाटे नहीं जा सकते और यदि ऐसा हो गया है तो उन्हें खाली कराया जाए। एडीएम ने इसके अलावा मुख्य सचिव और समय-समय पर जारी हुए शासन के आदेशों का हवाला देते हुए तालाब की जमीन पर किसी हालत में रजिस्ट्री की अनुमति देने से इंकार कर दिया। रजिस्ट्री कराने की कोशिश करने वाले पक्ष को इसके लिए खरीदे गए 87 लाख के स्टांप की अवधि चार से बढ़ाकर छह महीने कर दी गई। ताकि यह बेकार न जाए। यह स्टांप अब दूसरी किसी रजिस्ट्री में इस्तेमाल किया जा सकेगा।
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