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नहर का पानी पिलाने की योजना

Bareilly

Updated Sat, 03 Nov 2012 12:00 PM IST
बरेली। नहर के पानी को शुद्ध कर उसे शहर के लोगों को पिलाने की योजना बनाई जा रही है। यह नहर पीलीभीत रोड पर मयूर वन चेतना केंद्र के पास तक आती है। करोड़ों रुपये के इस प्रोजेक्ट को भेजने से पहले मेयर ने उत्तराखंड सचिवालय और नानकमत्ता डैम के अधिकारियों से संपर्क साधकर कंफर्म कर लिया है कि नहर से नगर निगम को पर्याप्त पानी मिल जाएगा।
डॉ. आईएस तोमर ने अपने पिछले कार्यकाल में यह योजना तैयार कराई थी, मगर योजना के परवान चढ़ने से पहले ही उनका कार्यकाल खत्म हो गया था। अब दोबारा सपा सरकार में मेयर बनने डॉ. तोमर ने फिर से योजना पर काम शुरू किया है। नानकमत्ता डैम के साथ ही नहरों पर अब भी यूपी सरकार का नियंत्रण है या नहीं? इस सवाल के जवाब में हां में जवाब मिलने पर उन्होंने पुरानी फाइल ढूंढने के निर्देश निर्माण विभाग के अधिकारियों को दे दिये हैं। ताकि प्रोजेक्ट तैयार कराया जा सके। इसके बाद वह सिंचाई मंत्री शिवपाल सिंह से मिलकर इसके लिए पैरवी करेंगे। प्रदेश में अभी इलाहाबाद, लखनऊ, आगरा, कानपुर व कुछ अन्य शहरों में इसी तरह पेयजल उपलब्ध कराया जाता है।
यहां भी करोड़ों रुपये खर्च होंगे, मगर एक बार सिस्टम बन गया तो शहर में भू-जल के गिरते स्तर को बचाने में काफी मदद मिल सकेगी। दरअसल, नहर के पास ही रिजर्व वायर (बड़ा पक्का तालाब) बनाने, फिल्टर प्लांट लगाने और शहर तक पाइप लाइन डालने में करोड़ों का खर्चा होगा।
हर वर्ष गिर रहा है जलस्तर
शहर में हर वर्ष जलस्तर में करीब 20 सेंटीमीटर की गिरावट आ रही है। दरअसल, यहां पीने के पानी की व्यवस्था पूरी तरह भू-जल पर ही निर्भर है। सिविल लाइंस इलाके में सबसे खराब स्थिति है। वहां पानी दस से 12 मीटर पर उपलब्ध हो पाता है। ऐसा तमाम वर्कशाप का इसी इलाके में होना है, इन वर्कशाप में पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल होता है। शहर के बाकी हिस्सों में पांच से आठ मीटर नीचे पानी मिल जाता है। इन हिस्सों में भी भूगर्भ जल गिर रहा है।
नगर निगम को यह फायदा होगा
नगर निगम को यदि नहर का पानी मिलेगा तो उसका काम इतना भर रह जाएगा कि उसे ओवर हेड टैंक में भरा जाए। ऐसे में बार-बार री-बोरिंग पर हर साल लाखों रुपये का होने वाला खर्चा भी खत्म हो जाएगा। साथ ही जमीन से पानी खींचने में इस्तेमाल होने वाले बड़े-बड़े मोटर का बिजली खर्चा बचेगा।
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