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महंगी गैस, मिड डे मील बंद

Bareilly

Updated Mon, 01 Oct 2012 12:00 PM IST

कॉमर्शियल रेट पर सिलेंडर देने से तमाम स्कूलों ने हाथ खींचा, कुछ स्कूलों में शुरू हुआ लकड़ी का चूल्हा


स्कूलों को भी 1023 का मिल रहा गैस सिलेंडर
बढ़ते दाम ने छीना मिड-डे मील का निवाला

कई स्कूलों ने मिड-डे मील बनाना बंद किया
कुछ विद्यालयों ने वैकल्पिक व्यवस्था कर ली


केस-1
क्यारा ब्लाक के बैजिया जागीर प्राथमिक विद्यालय की प्रधानाध्यापक शशि बाला जौहरी के मुताबिक, अब तक किसी तरह से ग्राम प्रधान सिलेंडर की व्यवस्था कर रहे थे। लेकिन, सिलेंडर के दाम दुगने से भी ज्यादा होने पर उन्होंने सिलेंडर नहीं ला पाए। इसलिए, हफ्ते भर से लकड़ी के चूल्हे पर मिड-डे मील बन रहा है।
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केस-2
भोजीपुरा ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय दुनका के लिए ग्राम प्रधान मुइउद्दीन सिलेंडर लेने गए, लेकिन वहां पर जब उन्हें पता चला कि इतने दाम बढ़ गए हैं तो वह लौट आए और प्रधानाध्यापक से बोले, अब लकड़ी या कोयले के ईंधन का इस्तेमाल कर मिड-डे मील बनवाए, क्योंकि इतना महंगा सिलेंडर नहीं लिया जा सकता।

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केस-3
भोजीपुरा ब्लाक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय दुनका के शिक्षक भानु प्रताप भी गैस एजेंसी पर सिलेंडर लेने गए तो उन्हें बताया गया कि 1023 का गैस सिलेंडर मिलेगा। इस पर उन्होंने मैनेजर से यह आदेश दिखाने के लिए कहा कि जिस पर लिखा हो कि स्कूलों को इतने दाम पर सिलेंडर मिलेंगे। इस पर उनका मैनेजर विवाद हो गया।


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बरेली। रसोई गैस क्या महंगी हुई, स्कूलों में बच्चों को दिए जाने वाले मिड डे मील पर भी संकट खड़ा हो गया। गैस एजेंसियों के मिड डे मील के लिए स्कूलों को भी अब कॉमर्शियल रेट पर यानी 1023 रुपये में सिलेंडर दिए जाने से तमाम स्कूलों ने मिड डे मील बनाने से हाथ खींच लिए हैं। वजह यह है कि एक तो कन्वर्जन कॉस्ट पहले से ही काफी कम है, दूसरे कई महीनों से कन्वर्जन कॉस्ट का पैसा भी नहीं दिया गया है। कुछ स्कूलों ने लकड़ी के चूल्हों का इस्तेमाल शुरू किया है, लेकिन ऐसे स्कूलों की तादाद काफी कम है। विभागीय अफसरों को भी इस बारे में बताया गया है, लेकिन अभी कोई हल नहीं निकल पाया है।
तमाम स्कूलों को पांच महीने से कन्वर्जन कॉस्ट न मिलने के बावजूद अभी तक ग्राम प्रधान किसी तरह मिड डे मील बनवा रहे थे, लेकिन गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से उनका हौसला भी टूट गया है। जिले के तमाम स्कूलों में मिड डे मील बनना बंद हो गया है। मीरगंज और फतेहगंज पश्चिमी में राशन और कन्वर्जन कॉस्ट न मिलने की वजह से पहले से ही मिड डे मील बनना बंद है। स्कूलों को इससे पहले 405 रुपये में गैस सिलेंडर मिलता था। अब ढाई गुना दाम में कोई सिलेंडर खरीदने को तैयार नहीं है। मिड डे मील की कन्वर्जन कॉस्ट में जुलाई में 32 पैसे बढ़ाई तो गई थी, लेकिन स्कूलों के मुताबिक यह अब भी काफी कम है। एबीएसए डीएल गुप्ता ने बताया, स्कूलों के प्रधानाध्यापक कई बार शिकायत कर चुके हैं।

फरीदपुर के बकैनिया गांव के प्राइमरी स्कूल, बल्लिया के प्राइमरी और जूनियर हाईस्कूल, फरीदापुर रामचरन और बिथरी चैनपुर ब्लाक के खजुरिया जुल्फिकार के रक्षपुरा माफी गांव के प्राइमरी स्कूल समेत
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ये है मिड-डे मील के लिए एक बच्चे की कन्वर्जन कास्ट
प्राइमरी स्कूल के प्रति बच्चे की कन्वर्जन कॉस्ट - 3.11 रुपये अब, पहले 2.89 रुपये
जूनियर हाईस्कूल के प्रति बच्चे की कन्वर्जन कॉस्ट- 4.65 रुपये अब, पहले 4.33 रुपये

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कुल बच्चे स्कूल जाने वाले शहर - 24 हजार 500
कुल बच्चे स्कूल जाने वाले देहात - एक लाख 48 हजार 500
कुल विद्यालय शहर में - 160
कुल विद्यालय देहात में - दो हजार 680
शहर में मिड-डे मील देने वाले एनजीओ - उज्ज्वल सवेरा, निर्मल सेवा संस्थान
तकरीबन हर विद्यालय में एक महीने में- दो से तीन सिलेंडर
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12 रुपये आता है प्रति बच्चे का खर्च
एनजीओ उज्ज्वल सेवा समिति के सचिव रवींद्र ने बताया कि हर बच्चे पर 10-12 रुपये का खर्च आता है। इतने कम रुपये में खर्च निकालना मुश्किल होता है, क्योंकि केवल हर बच्चे पर केवल दाल का खर्च ही पांच रुपये, दलिया का खर्च छह-सात रुपये और पांच रुपये मसाला, तेल, गैस का आता है। बस, केवल चावल सरकार मुफ्त में देती है। उससे ही मुक्ति है। वहीं मिड-डे मील ले जाने वाली वैन का भी पहले किराया 650 था। वह अब बढ़कर 900 रुपये हो गया है। लेकिन, मिड-डे मील की कन्वर्जन कॉस्ट जो जुलाई में मिलती थी, वही अब भी मिल रही है।
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हफ्तेभर से नहीं हुई कोई बुकिंग
आल इंडिया एलपीजी एसोसिएशन की अध्यक्ष रंजना सोलंकी ने बताया, जब से गैस सिलेंडर का मूल्य बढ़ा है, तब से किसी भी प्राथमिक, जूनियर या कस्तूरबा विद्यालय के लिए सिलेंडर की बुकिंग नहीं हो रही है। इससे पहले जिले के आठ कस्तूरबा विद्यालयों के लिए हर महीने 15 सिलेंडर यानी हर तीसरे दिन एक सिलेंडर जाता था। लेकिन, हफ्तेभर से कोई बुकिंग नहीं आई है। वहीं प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल के रोज 10-5 सिलेंडर की बुकिंग होती थी, लेकिन हफ्तेभर से स्कूलों में कोई सिलेंडर नहीं आया है।

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96 स्कूलों में नहीं बन रहा मिड-डे मील
सूत्रों के मुताबिक गैस सिलेंडर के दाम बढ़ने से करीबन बरेली जिले में तकरीबन 96 स्कूलों में मिड-डे मील बनना बंद हो गया है। हालांकि, इस संबंध में बीएसए चंद्रकेश यादव ने कोई भी जानकारी होने से इंकार किया। उन्होंने कहा कि गैस सिलेंडर और महंगाई होने से दिक्कत तो बहुत आ रही है, लेकिन मिड-डे मील बनना बंद हुआ है। इस बारे मेें कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि स्कूल इस संबंध में सीधे शासन को मैसेज भेजते हैं।



मिड-डे मील की खबर का जोड़...

कम से कम पांच रुपये हो प्रति छात्र कन्वर्जन कॉस्ट
फहेतगंज पश्चिमी के मड़ौली गांव की प्रधान पिंकी सिंह ने बताया, इस महीने का राशन नहीं आया है। किसी तरह से काम चला रहे हैं। अगर हिसाब लगाएं तो जूनियर हाईस्कूल और प्राथमिक हर बच्चे पर कम से कम पांच रुपये का खर्च आता है। जुलाई से कुछ पैसा बढ़ चुका है, लेकिन हमें प्रति छात्र दो रुपये 69 पैसे की कन्वर्जन कॉस्ट के हिसाब से ही भुगतान किया गया है। एक तो गैस सिलेंडर महंगा दूसरे लाइन में खड़े होकर लेना। इसमें भी एक दिन बुकिंग होती है और दूसरे दिन गैस सिलेंडर मिलना है। कुल मिलाकर दो दिन का आने-जाने का खर्च अलग से। इसलिए, सिलेंडर महंगा होने की वजह से बल्लिया प्राथमिक और जूनियर, फरीदापुर राम चरन प्राथमिक विद्यालय में तो मिड-डे मील बनना ही बंद हो गया है।
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राशन भी नहीं पूरा आया
बिथरी चैनपुर ब्लाक के खजुरिया जुल्फिकार के रक्षपुरा माफी गांव के प्रधान मोहम्मद हनीफ ने बताया, अभी तक तो मिड-डे मील बनता था, लेकिन अब इसे बंद करने की वजह यह है कि इसके लिए एक लाख रुपये हम अपनी तरफ से लगा चुके हैं। इतना ही नहीं राशन भी कम आ रहा है। प्राथमिक विद्यालय के लिए चार कुंटर आना चाहिए, लेकिन 60 किलो आया है वहीं जूनियर में 64 किलो आना चाहिए तो सिर्फ 28 किलो ही आया है। एक तो कन्वर्जन कॉस्ट ही इतने महीने से नहीं आई है, दूसरे सिलेंडर की कीमत और महंगाई ने मिड-डे मील बंद करा दिया है।
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