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स्कूल से बच्चों को नहीं जोड़ पा रही सरकारी योजनाएं

Bareilly

Updated Mon, 24 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। इस साल जिले में पौने सात हजार बच्चों ने स्कूल से मुंह मोड़ लिया। इनमें काफी लड़के लड़कियां शिक्षा ग्रहण करने की बजाय ढाबों, दुकानों तथा छोटे कारखानों में काम कर के परिवार का खर्च चलाने में हाथ बटा रहे हैं। अगस्त, 2012 में शिक्षा विभाग की ओर से कराए गए हाउस होल्ड सर्वे की रिपोर्ट में यह स्थिति सामने आई। कुल मिलाकर 6725 बच्चों को चिन्ह्ति किया गया है जो स्कूल नहीं जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति ज्यादा चिंताजनक है। जिन बच्चों ने शिक्षा से मुंह मोड़ा है वह छह से चौदह वर्ष के बीच है।
बेसिक शिक्षा परिषद में छह से 14 साल तक के बच्चों को स्कूल से जोड़ने के लिए सरकार की ओर से तमाम योजनाएं चल रही हैं। इसके बाद भी असर नहीं दिख रहा है। जिले में 6725 बच्चों का स्कूल न जाना गंभीर मुद्दा है। स्कूल न जाने वाले अधिकांश बच्चे ढाबों, दुकानों, कारचोबी, घरेलू काम और कचरा बीनने में लगे हैं। सर्व शिक्षा अभियान, स्कूल चलो अभियान, मिड-डे मील और शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के बाद भी स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही हैं। वर्ष 2011 में जहां छह हजार बच्चों ने स्कूल छोड़ा था वहीं इस बार 6725 बच्चों ने पढ़ाई छोड़ी। हालांकि, बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों का कहना है कि अब पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों के लिए स्पेशल कैंप लगाया जाएगा। उन्हें सेवानिवृत्त शिक्षकों और एनजीओं के माध्यक से पढ़ाने की भी कोशिश की जाएगी।

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सब बच्चों को किसी न किसी तरह से पढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। कुछ को स्कूल लाकर तो कुछ को स्पेशल कैंप तथा एनजीओं के माध्यक से पढ़ाया जाएगा। इनकी पढ़ाई का खर्च सरकार वहन करेगी। सभी बच्चों को मुफ्त ड्रेस और किताबें दी जाएंगी।
- योगराज सिंह, बीएसए
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वर्ष 2012-13 के सर्वे के आंकड़े
जिले में कुल बच्चे- एक लाख 26 हजार 725
स्कूल जाने वाले कुल बच्चे- एक लाख 20 हजार
स्कूल न जाने वाले बच्चे- 6725
सबसे चिंताजनक स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों की है।
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वर्ष 2011-12 के सर्वे के आंकड़े
कुल बच्चे- एक लाख 21 हजार
स्कूल जाने वाले बच्चे- एक लाख 15 हजार
स्कूल न जाने वाले बच्चे- छह हजार
ग्रामीण क्षेत्रों की स्थिति ज्यादा खराब
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