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नहीं चले ऑटो, तमाम बच्चों का स्कूल छूटा

Bareilly

Updated Fri, 07 Sep 2012 12:00 PM IST
पुलिस ने कायदे-कानून का पाठ पढ़ाया तो हड़ताल पर गए ऑटो वाले, अभिभावकों को लगानी पड़ी दौड़
स्कूलों में काफी कम रही बच्चों की उपस्थिति
पुलिस की 14 शर्तें पूरी करने पर असहमत
सिटी रिपोर्टर
बरेली। डीजीपी के आदेश पर पुलिस ने कायदे-कानून का पाठ पढ़ाना शुरू किया तो बच्चों को स्कूल लाने-ले जाने वाले ऑटो ड्राइवर हड़ताल पर चले गए। नतीजा यह हुआ कि बृहस्पतिवार को सैकड़ों बच्चों का स्कूल छूट गया। ज्यादातर स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति काफी कम रही। तमाम अभिभावकों को बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने के लिए अपना कामकाज छोड़कर खुद दौड़ लगानी पड़ी।
पिछले दिनों डीजीपी ने सभी जिलों की पुलिस को आदेश दिया था कि बच्चों को स्कूल ले जाने वाले वाहनों के लिए तय नियम-कायदों पर सख्ती से अमल कराया जाए। इस आदेश पर पुलिस ने 14 नियमों पर अनिवार्य रूप से अमल करने की हिदायत देते हुए स्कूली वाहनों पर सख्ती शुरू की तो उन्हें चलाने वालों ने विरोध में अचानक दो दिन के लिए हड़ताल पर जाने का फैसला कर डाला। शहर भर के स्कूलों के बच्चों को ले जाने का काम करीब ढाई हजार ऑटो ड्रइवर करते हैं। बृहस्पतिवार को ये ऑटो बच्चों को स्कूल ले जाने के लिए घरों पर नहीं पहुंचे। नतीजा यह हुआ कि तमाम अभिभावकों को बच्चों को लेकर खुद स्कूल भागना पड़ा। इसके बावजूद सैकड़ों बच्चों का स्कूल छूट गया।
जीआरएम, बिशप कोनराड, सेंट फ्रांसिस, सेंट मारिया, माधवराव सिंधिया, वुडरो, बीबीएल आदि शहर के तमाम स्कूलों ऑटो वालों की हड़ताल की वजह से बच्चों की उपस्थिति काफी कम रही। बिशप कोनराड की जूनियर विंग की वाइस प्रिंसिपल सिस्टर फिलोमिना ने बताया कि कि ऑटो वालों की हड़ताल से हर किसी को परेशानी हुई है। सभी कक्षाओं में बच्चों की उपस्थिति में फर्क पड़ा। कुल मिलाकर करीब 25-30 प्रतिशत बच्चे स्कूल नहीं पहुंच सके। जीआरएम के प्रबंधक राजेश जौली ने बताया कि स्कूल ऑटो वालों की हड़ताल का बच्चों की उपस्थिति पर असर पड़ा। अभिभावकों को परेशानी भी हुई। मगर ज्यादातर बच्चे फिर भी स्कूल पहुंचे। बीबीएल के प्रिंसिपल दीपक गुप्ता ने बताया कि हमें ऑटोवालों के हड़ताल की सूचना मिल गई थीं। हमने बच्चों और उनके अभिभावकों को सूचित कर दिया था।




इनसेट में
अभिभावकों की मुसीबत
-सुभाषनगर में रहने वाले बुजुर्ग गौरीशंकर अपने नाती उत्कर्ष को लेने बिशप कोनराड पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी नातिन को लेने सेंट मारिया स्कूल गई है। मुझे यहां आना पड़ा। उत्कर्ष ने बताया कि ऑटो वाले अंकल ने बताया है कि दो दिन नहीं आएंगे।
- रूहेलखंड यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर सुधीर कुमार अपना कामकाज छोड़कर बेटी शिया को लेने बिशप कोनराड स्कूल पहुंचे। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में वह एक रिसर्च प्रोजेक्ट में व्यस्त थे, लेकिन बच्चे को लेने उन्हें काम छोड़कर आना पड़ा।
- हेड पोस्ट आफिस में काम करने वाले सैयद शहजाद को भी अपने बॉस की इजाजत लेकर बच्चे को लेने स्कूल पहुंचे हुए थे। बोले, लंच टाइम चल रहा है, इसलिए आसानी से बच्चे को घर ले जाने का वक्त मिल गया, वर्ना दिक्कत हो जाती।
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कायदों पर अमल किया तो नहीं निकलेगा खर्च
ऑटो ड्राइवरों ने एसपी ट्रैफिक को ज्ञापन दिया

दो घंटे तक दामोदर पार्क में धरने पर भी बैठे

सिटी रिपोर्टर
बरेली। हड़ताल पर गए ऑटो ड्राइवर अपनी मांगें मनवाने पर अड़े हैं। उनका कहना है कि प्रशासन उनसे बात नहीं करेगा हड़ताल जारी रहेगी। कमिश्नर को ज्ञापन देने वे कलेक्ट्रेट भी पहुंचे, लेकिन वह नहीं मिले तो एसपी ट्रैफिक को ज्ञापन देकर चले आए। इससे पहले उन्होंने दो घंटे तक दामोदर पार्क में धरना भी दिया।
आटो रिक्शा चालक आनर्स संगठन के अध्यक्ष जयराम गुप्ता के नेतृत्व में इकट्ठे हुए ऑटो ड्राइवर कमिश्नर को ज्ञापन देना चाहते थे, लेकिन वह नहीं मिले। इस पर डीएम को ज्ञापन देने के इरादे से कलेक्ट्रेट पहुंचे मगर वहां भी कोई अफसर नहीं मिला। इस पर वे एसपी ट्रैफिक को ही ज्ञापन देकर चले आए। ज्ञापन में उन्होंने कहा है कि स्कूली बच्चों को लाने-ले जाने के लिए करीब ढाई हजार टेंपो चल रहे हैं। मानकों का पालन किया तो उनका खर्च तक नहीं निकलेगा। उन्होंने मांग की कि उन्हें आटो रिक्शा में आठ से 10 और विक्रम में 10 से 15 बच्चों को बैठाने की छूट दी जाए, क्योंकि शासन का आदेश व्यवहारिक नहीं है। यह भी मांग की कि अवैध गैस किट लगाकर चलाई जा रही वैनों और बिना लाइसेंस या शराब पीकर ऑटो चलाने वालों के खिलाफ प्रशासन सख्त कार्रवाई करे। उन टेंपो ऑटो चालकों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाए जो सवारी बाहर लटकाकर चलते हैं। ज्ञापन में चेतावनी दी है कि जब तक प्रशासन का कोई अधिकारी उनके वार्ता नहीं कर लेता हड़ताल जारी रहेगी। इस मौके पर मुख्य रूप से सुरेश पाल, अलीमुददीन, बृजकिशोर मिश्रा, प्रदीप मिश्रा, संतोष गुप्ता, हरमिंदर बाबी, राकेश उस्ताद वीरेंद्र सक्सेना आदि मौजूद रहे।
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