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कई सालों से बंद पड़ी है जिला अस्पताल की डायलिसिस यूनिट

Bareilly

Updated Thu, 06 Sep 2012 12:00 PM IST
बरेली। जिला अस्पताल का डायलिसिस सेंटर में बीते कई वर्ष से बंद पड़ा है। इससे किडनी के मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ ऐसे मरीज हैं, जिन्हें हफ्ते में दो बार डायलिसिस करानी पड़ती है। निजी अस्पतालों में इसमें खर्च ज्यादा आता है। नतीजा यह कि मध्यम आय वर्ग वाले मरीजों का परिवार या तो आर्थिक तौर टूट जाता है या ऊपर वाले के रहमोकरम पर खुद को छोड़ देता है। कुल मिलाकर जो सूरते - हाल है, उससे कम से कम बरेली में गरीबों को सस्ता इलाज देने के सरकार के वादे को भी झटका लगा है।
बता दें कि अस्पताल के हार्ट वार्ड में लाखों की मशीन लगाकर 10 बेड की अलग यूनिट बनाई गई। वर्ष 1999 में इसका उद्घाटन हुआ और विशेषज्ञ चिकित्सक के होने पर वर्ष 2004 तक यहां डायलिसिस होती रही। बाद में यूनिट के संचालन को एमडी मेडिसिन की नियुक्ति की गई और नेफ्रोलॉजी की ट्रेनिंग के लिए एसजीपीजीआई भेजा गया। इनमें डॉ. सुनील कुमार और डॉ. आशु अग्रवाल शामिल हैं। मगर उनके ट्रेनिंग करने के लौटते ही यहां से तबादला हो गया।
नतीजा यह कि यह यूनिट कुछ दिन चलने के बाद फिर से बंद हो गई। पर उसके बाद से आठ साल हो गए, यूनिट में कोई काम नहीं हुआ। अब हाल यह है कि मशीन ढंक दी गई है और उस पर धूल की परतें जम गई हैं। कमरे के भीतर दीवारों पर सीलन के निशान उभर आए हैं। यहां लगे बेड खराब हो रहे हैं।

अधिकारी का पक्ष
‘हम हर साल डायलिसिस यूनिट में विशेषज्ञ डॉक्टर की नियुक्ति करने की मांग शासन को भेजते हैं। डॉक्टर नहीं मिलने से यूनिट का संचालन नहीं हो पा रहा है।’-- डॉ. विजय यादव, चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल, बरेली।

क्या है डायलिसिस
ब्लड बैंक के नोडल अधिकारी डॉ. जीडी कटियार ने बताया कि रक्त की गंदगी को बाहर करने की प्रक्रिया ही डायलिसिस होती है। किडनी की स्थिति को देखकर ही डायलिसिस की जाती है। अगर किडनी ज्यादा खराब हो चुकी है तो मरीज को हफ्ते में दो बार भी डायलिसिस करानी होती है।

इनसेट में
बंद पड़े हैं सूबे के कई सरकारी डायलिसिस सेंटर
लखनऊ के दो अस्पतालों, कानपुर और बनारस जिला को छोड़कर अन्य मंडलीय चिकित्सालयों का यही हाल है। यहां के डायलिसिस सेंटर भी विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी की वजह से बंद पड़े हैं। पीएमएस के प्रदेश अध्यक्ष और बाराबंकी में सीएमओ डॉ. डीआर सिंह ने कहा कि सरकार पैसा देकर डायलिसिस की मशीनें लगवा देती है, लेकिन बाद में डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं कर पाती। पीएमएस की ओर से कई बार स्वास्थ्य मंत्री का ध्यान इस ओर आकृष्ट किया जा चुका है पर हालात बदलने को कोई सार्थक पहल अब तक नहीं हुई है।
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