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सभी पुलिस मित्र हटाए, शांति समितियां भी भंग होंगी

Bareilly

Updated Fri, 17 Aug 2012 12:00 PM IST
बरेली। त्योहारों और जुलूसों पर अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने पर प्रशासन ने सभी पुलिस मित्र हटा दिए। उन्हें दिया गया परिचय पत्र जमा कराया जा रहा है। प्रशासन ने शांति समितियों को भंग करने का निर्णय लिया है, जिनका नये सिरे से गठन किया जाएगा।
शहर के हर थाना क्षेत्र में शांति समिति गठित की गई थी। इसमें इलाके के शिक्षित और गणमान्य लोगों को शामिल किया गया है। किसी भी त्योहार से पहले संबंधित थाने में बैठक की जाती है। प्रशासन के अफसर और समिति सदस्यों के बीच जन सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था पर चर्चा होती है। समिति सदस्यों पर इलाके के संदिग्ध लोगों पर नजर रखने और गोपनीय सूचनाएं प्रशासन को देने की जिम्मेदारी होती है। जिससे उपद्रव करने से पहले प्रशासन संदिग्ध लोगों पर शिकंजा कस सके। वर्ष 2010 में पुलिस मित्र बनाए गए थे। इन पुलिस मित्रों को एसपी सिटी और संबंधित थाना प्रभारी के हस्ताक्षर किया परिचय पत्र जारी किया गया था। त्योहारों और जुलूस निकलने पर शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग और संदिग्ध व अपराधी किस्म के लोगों की सूचना पुलिस को देने की जिम्मेदारी दी गई थी। देखने में आया कि ज्यादातर शांति समिति के सदस्य, किसी न किसी वजह से अफसरों के इर्द गिर्द घूमने वाले लोग और यहां तक कि कई अपराधी किस्म के लोग भी पुलिस मित्र बन गए। कई पुलिस मित्रों ने अपने घर पर बड़ा सा बोर्ड लगा लिया और उन्होंने सीधे पुलिस और लोगों के बीच दलाली शुरू कर दी। पुलिस मित्रों के सक्रिय न रहने के चलते ही कांवर यात्रा और जन्माष्टमी पर उपद्रव होने से पहले पुलिस को इस बाबत कोई भनक नहीं लगी।
एसएसपी सत्येंद्र वीर सिंह ने बताया कि शांति समिति के सदस्य और पुलिस मित्रों की खास उपयोगिता नहीं दिखी। मीटिंग में दिखाई देने के अलावा माहौल को शांत कराने में कोई खास सहयोग नहीं किया। न ही धार्मिक स्थलों की सुरक्षा में सहयोग किया। इससे पुलिस मित्रों को हटा दिया गया। उन्होंने बताया कि शांति समितियां भी भंग की जाएंगी। एसएसपी के मुताबिक पहले तो पुलिस मित्र और शांति समिति का सदस्य, दोनों एक ही व्यक्ति नहीं हो सकता। शांति समितियों में पढ़े लिखे, प्रोफेसर, डाक्टर, संभ्रांत और साफ छवि वाले लोग शामिल होंगे।
प्रशासन के फैसले के कोई समर्थन में तो कोई विरोध में शांति समिति सदस्य व पुलिस मित्र जेसी पालीवाल का कहना कि कि प्रशासन का कदम एकदम सही है। लोग बैठकों में तो दिखाई देते थे, लेकिन उसके बाद शांति का माहौल तैयार करने के लिए कोई काम नहीं करते थे। शांति कमेटियों का नये सिरे से गठन होगा तो ईमानदार आगे आएंगे। खलील कादरी के मुताबिक पुलिस मित्रों को हटाना तो ठीक है, मगर दंगे के माहौल में उनकी अपनी भी दिक्कत होती है। इस दौरान लोकल पुलिस होती नहीं है, बाहर की पुलिस पहचानती नहीं। ऐसे में पुलिस मित्र काम कैसे करें? शांति समिति सदस्य और पुलिस मित्र जहीर अहमद का कहना है, यह प्रशासन पर निर्भर करता है कि उनका सहयोग लेना है कि नहीं। हम तो अमन चैन चाहते हैं। मो. नबी कोतवाली व किला की शांति समिति सदस्य होने के साथ पुलिस मित्र हैं। उनका कहना है कि इस माहौल में शांति समिति और पुलिस मित्रों का सहयोग अत्यधिक जरूरी है। इसलिए अभी उन्हें हटाना उचित निर्णय नहीं है।
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